Satirical Story In Hindi : बिहार के गया तीर्थ में पिंडदान करने से पितर स्वर्गलोक का टिकट पा जाते हैं तो आधार कार्ड द्वारा व्यक्ति को मृत्युलोक की सुखसुविधाओं का लाभ मिल जाता है. पंडित हमारी जन्मकुंडली बनाता है और सरकार आधारकुंडली को लिंक करा कर आम आदमी के कर्मों का लेखाजोखा रखने लगी है. हम जब भी दुनियादारी से परेशान होते हैं, तो हमें भगवान की याद आती है और मठमंदिरों में बैठे पंडेपुजारी हम से चढ़ोतरी ले कर भगवान से हमारी सिफारिश कर देते हैं. ठीक वैसे ही, जब हमें सरकारी लाभ लेना होता है तो आधार कार्ड को सेवा शुल्क दे कर लिंक कराना पड़ता है. यदि आप का आधार कार्ड लिंक नहीं है, तो इस का मतलब है आप की नीयत में खोट है. सरकार की नजरों में आप चोर हैं.

सरकार चाहती है कि देश के विकास में अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का योगदान हो. तभी तो सब्जी वाला, दूध वाला, कपड़ों की धुलाई करने वाला, चाय वाला, रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरी करने वाला आम आदमी सरकार की मंशा पूरी करने के लिए आधार कार्ड को लिंक कराने में लगा है. सरकार ने भी योजनाओं का पिटारा खोल रखा है. कन्यादान योजना में मुफ्त शादी कराओ, बच्चे पैदा करने के लिए जननी सुरक्षा योजना और बंद करने के लिए नसबंदी योजना तो है ही. शिक्षकों का वेतन बढ़ाने पर भले ही सरकार पर आर्थिक संकट आ जाता हो परंतु देश के नौनिहालों को आंगनवाड़ी और स्कूलों में मध्याह्न भोजन, पुस्तकें, स्कौलरशिप, साइकिल सबकुछ बांटा जा रहा है. बूढ़ों को वृद्धापैंशन मिलती है, एक रुपए किलो गेहूंचावल मिलता है. इस के बावजूद गरीबी दूर नहीं हो रही, तो करमजले गरीब का ही दोष है.

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