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ब्रेकफास्ट रैसिपीज : सेमोलीना स्वीट इडली

सेमोलीना स्वीट इडली

सामग्री

– 1/2 कप बारीक सूजी

– 2 बड़े चम्मच मैदा

– 5 बड़े चम्मच चीनी पाउडर

– 4 बड़े चम्मच दही

– 1/6 छोटा चम्मच बेकिंग सोडा

– 1 छोटा चम्मच वैनिला ऐसेंस

– 1/2 छोटा चम्मच इलायची चूर्ण

– 1 बड़ा चम्मच बादाम, पिस्ता बारीक कटा

– 2 बड़े चम्मच रिफाइंड औयल

– 1 सैशे ईनो – थोड़ सा फ्रूट साल्ट.

विधि

सूजी में मैदा और बेकिंग सोडा डाल कर छान लें. दही फेंटें. इस में चीनी और रिफाइंड औयल डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें. धीरेधीरे सूजी डालें और मिक्स करें. 10 मिनट ढक कर रखें. पुन: मिक्स करें. यदि मिश्रण गाढ़ा लगे तो 1-2 बड़े चम्मच दूध मिक्स करें. वैनिला ऐसैंस, इलायची पाउडर और ईनो, फ्रूट साल्ट मिश्रण में डाल कर हलके हाथ से मिलाएं. मिनी इडली स्टैंड के खांचों को तेल से चिकना करें. प्रत्येक खांचे में थोड़ाथोड़ा बादाम, पिस्ता फ्लैक्स बुरकें और मिश्रण डाल दें. बचे फ्लैक्स ऊपर से बुरकें. 6-7 मिनट पकाएं. थोड़ा ठंडा कर के खांचों से बाहर निकाल लें.

नोटबंदी पर आखिर नीतीश कुमार ने क्यों मारी पलटी

नरेंद्र मोदी सरकार के 4 साल पूरे होने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बधाई नहीं दी, उलटे, यह कहते पलटी मार दी कि पहले वे नोटबंदी के समर्थक थे पर इस से कितनों को फायदा हुआ. बात या मंशा की गुगली फेंकने के बाद वे बैंकिंग सिस्टम की खामियों का रोना रोते रहे.
सोचना वाजिब है कि क्या अब नीतीश कुमार पश्चात्ताप की तरफ बढ़ रहे हैं और उन्हें एनडीए का हिस्सा बनने के नुकसान नजर आने लगे हैं. 2014 में नींद में भी नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले सुशासन बाबू आखिर डर किस बात से रहे हैं, यह किसी को समझ नहीं आ रहा.

कुछकुछ लोग मानते हैं कि बिहार में गठबंधन के नाम पर भाजपा ने उन्हें नहीं, बल्कि उन्होंने भाजपा को फंसाया है और 2019 का लोकसभा चुनाव आतेआते वे फिर अपने पुराने रूप में आ जाएंगे जिस से नुकसान भाजपा का होगा. फंसनेफंसाने के इस खेल के मानें अब सामने आने लगे हैं तो इस में कर्नाटक के ड्रामे का भी अहम रोल है. यों नीतीश कुमार को भी पूरा हक है कि वे नोटबंदी की तारीफों में गढ़े अपने पूर्व कसीदे वापस ले लें.

पिया बिन नहीं जीना मुझे : सीमा की कहानी

राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल सीमा अपनी 4 वर्षीय बेटी वंशिका के साथ बीछवाल थाना प्रांगण में बने स्टाफ क्वार्टर में रहती थी. उस के साथ उस का भाई सुमित भी रहता था. सुमित भी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल था. सीमा की ड्यूटी बीकानेर पुलिस लाइन में थी. करीब डेढ़ महीना पहले ही वह पाली जिले से ट्रांसफर करा कर बीकानेर आई थी. पहले उस की पोस्टिंग पाली के औद्यौगिक थाने में थी.

25 मार्च, 2018 की शाम को सीमा बेटी के साथ थी. उस का भाई सुमित किसी काम से बाजार गया हुआ था. जब वह बाजार से घर लौटा तो घर में कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला. सुमित ने दरवाजा खटखटा कर बहन को आवाज दी पर दरवाजा नहीं खुला.

कई बार आवाज देने के बावजूद भी जब अंदर से कोई हलचल नहीं हुई तो सुमित ने खिड़की से अंदर झांक कर देखा तो उसे बहन सीमा व वंशिका फंदे पर झूलती दिखाई दीं. यह देख कर सुमित की चीख निकल गई.

उस के चीखने की आवाज सुन कर पड़ोसी भी वहां आ गए. सुमित ने लोगों की सहायता से खिड़की तोड़ी. उस ने सब से पहले अपनी बहन और भांजी को फंदे से उतारा. तब तक बीछवाल के थानाप्रभारी धीरेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच चुके थे. दोनों को तुरंत पीबीएम अस्पताल ले जाया गया. जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया.

मृतका सीमा के कमरे से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ. उस में कांस्टेबल सीमा ने सासससुर से माफी मांगते हुए लिखा कि सभी ने उस का और बेटी वंशिका का खयाल रखा, लेकिन पति हरकेश की मौत के बाद से मैं बहुत तनाव में हूं. इसलिए बेटी के साथ फांसी लगा कर आत्महत्या कर रही हूं. सीमा ने पत्र में इच्छा जताई कि मेरा अंतिम संस्कार भी वहीं हो, जहां पति का किया गया था और उस की और बेटी की आंखें दान कर दी जाएं. ताकि किसी को रोशनी मिल सके.

चूंकि मामला एक पुलिसकर्मी से संबंधित था, इसलिए थानाप्रभारी की सूचना पर एसपी दीपक भार्गव भी वहां पहुंच गए. उन्होंने भी मौका मुआयना किया. थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए पीबीएम अस्पताल भेज दिया.

सीमा सरकारी मुलाजिम थी, उसे कोई आर्थिक परेशानी नहीं थी. ससुराल में सभी लोग उस का बहुत खयाल रखते थे. इन सब बातों के बावजूद आखिर ऐसी क्या वजह रही जो उस ने अपने साथ बेटी को भी फंदे पर लटका दिया. जांच करने के बाद पुलिस को इस के पीछे की जो बात पता चली, वह हृदयविदारक थी.

सीमा सन 2006 में राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भरती हुई थी. उसी के बैच में हरकेश मान नाम का युवक भी भरती हुआ था. हरकेश झुंझनू जिले के भीरी गांव का मूल निवासी था. पर बाद में उस का परिवार चिढ़ावा कस्बे में रहने लगा था.

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साथसाथ पुलिस ट्रेनिंग करने के दौरान सीमा और हरकेश की अच्छी जानपहचान हो गई थी. बाद में घर वालों की मरजी से दोनों की शादी हो गई. सीमा का भाई सुमित भी राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भरती हो गया था.

सीमा पति के साथ बहुत खुश थी. हरकेश भी उस का बहुत ध्यान रखता था. दोनों की गृहस्थी की गाड़ी हंसीखुशी से चल रही थी. इस दौरान सीमा एक बेटी की मां भी बन गई थी जिस का नाम वंशिका रखा गया.

सीमा का पति हरकेश एक जांबाज व होशियार सिपाही था. अपनी मेहनत के बूते पर उस ने अनेक बडे़ केसों को खोलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस की तैनाती पाली की कोतवाली में थी. अपने प्रयासों के बल पर उस ने दीपक हत्याकांड को खोलने में विशेष भूमिका निभाई थी.

इस के अलावा उस ने कंजर गैंग, नायडू शेट्टी गैंग तथा गत दिनों पाली में मोबाइल शोरूम से लाखों रुपए के मोबाइल चुराने वाले गैंग का पता लगा कर उन्हें गिरफ्तार कराने में विशेष भूमिका निभाई थी. इन केसों में मिली सफलता के बाद हरकेश को एसपी के अलावा डीआईजी और आईजी ने भी सम्मानित किया था.

पति की इस उपलब्धि पर सीमा का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया था. चूंकि वह भी पति के साथ उसी थाने में तैनात थी, इसलिए पति से उसे काफी प्रेरणा मिली थी. अपने छोटे से परिवार में सीमा बहुत खुश थी. लेकिन 31 अक्तूबर, 2017 को इन के परिवार में अचानक एक ऐसी घटना घटी जिस से उन की हंसतीखेलती गृहस्थी उजड़ गई.

दरअसल हरकेश मान के साले की शादी थी. 31 अक्तूबर, 2017 को हरकेश ड्यूटी से चिड़ावा में स्थित अपने क्वार्टर पर पहुंच कर शादी में जाने की तैयारी करने लगा. सीमा भी भाई की शादी में जाने की तैयारी में जुटी थी. हरकेश ने अपने बालों में मेंहदी लगाई हुई थी. वह बालों की मेंहदी को धो रहा था तभी अचानक आगे की तरफ गिर गया. सामने कोई एक पाइप था जो सीधे हरकेश के सिर में घुस गया.

हरकेश के चीखने पर सीमा बाथरूम में गई तो वहां खून देख कर वह भी घबरा गई. उस ने पड़ोसियों को बुलाया, जिन की मदद से हरकेश को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन डाक्टर उसे बचा नहीं सके. उस की मौत हो गई.

पति की मौत पर सीमा का तो घरसंसार ही उजड़ गया था. शादी में जाने की खुशी रंज में बदल गई थी. एक तेजतर्रार सिपाही की मौत की खबर पा कर जिले के पुलिस अधिकारी भी वहां पहुंच गए. सभी इस आकस्मित मौत पर आश्चर्यचकित थे.

घर वालों का तो रोरो कर बुरा हाल था. घर वालों के अलावा विभाग के लोगों ने भी सीमा को बहुत समझाया. पर वह अपने प्रियतम को भला कैसे भुला सकती थी. लोगों के समझाने पर सीमा ने खुद को संभालने की कोशिश की. वह अपने काम में व्यस्त रह कर दुख को भुलाने की कोशिश करती रही लेकिन रहरह कर उसे पति की यादें बेचैन किए रहती थीं.

पहले सीमा की पोस्टिंग पाली थाने में थी जबकि उस का भाई सुमित बीकानेर के महिला थाने में था. अरजी दे कर उस ने करीब डेढ़ महीने पहले ही अपना ट्रांसफर बीकानेर करा लिया था. ताकि भाई के साथ रहने पर वह खुद अकेला महसूस न समझे.

वह भाई के साथ ही बीछवाल थानापरिसर में बने आईएसी क्वार्टरों में रहती थी. हालांकि ससुराल पक्ष के लोगों की तरफ से भी सीमा का हर तरह से खयाल रखा जा रहा था. इस के बावजूद भी सीमा को रहरह कर पति की यादें आ रही थी. पति के बिना वह खुद को अकेला महसूस कर रही थी. उसे लगने लगा था कि अब पति के बिना उस का जीना ही बेकार है. वह खोईखोई सी रहने लगी.

फिर एक दिन सीमा ने फैसला कर लिया कि जब उस का पति ही न रहा हो तो अब उस का जीना ही बेकार है. उस ने तय कर लिया था कि वह भी अपनी जीवनलीला खत्म कर पति के पास जाएगी. तभी उसे अपनी बेटी वंशिका का ध्यान आया कि उस के जीवित न रहने पर बिन मांबाप के पता नहीं उस की जिंदगी कैसे कटेगी. लिहाजा उस ने अपने साथ बेटी वंशिका की भी जीवनलीला खत्म करने का निर्णय ले लिया.

25 मार्च की शाम को उसे यह मौका मिल ही गया. उस दिन सीमा का भाई सुमित भी अपनी ड्यूटी से आ गया था. वह शाम के समय बाजार गया. तभी सीमा ने सब से पहले अपनी बेटी को फंदे पर लटकाया इस के बाद वह खुद भी लटक गई. इस से पहले उस ने एक सुसाइड नोट लिख दिया था, जिस में किसी को भी दोषी न ठहराते हुए अपनी और बेटी की आंखें दान करने की बात लिख दी थी.

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सीमा ने भले ही अपनी समझ से अपनी और बेटी की सांसें रोक दीं पर ऐसा कर के उस ने कोई समझदारी का काम नहीं किया. बेटी के सहारे वह जिंदगी काट सकती थी. उसे उस समय काउंसलिंग की जरूरत थी. यदि उस की उस समय काउंसलिंग हो जाती तो शायद वह यह कदम नहीं उठाती.

जादुई चश्मा : लालच बुरी भला

लालच बुरी बला होती है. यह समझते हुए भी गुजरात के कुछ कारोबारी बदमाशों के चंगुल  में फंस कर ‘जादुई चश्मा’ और नेपाल की महारानी के ‘हीरों का हार’ लेने के लिए बदमाशों के चंगुल में फंस जाते थे. बदमाशों ने अपना जाल गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे 3 प्रदेशों में फैला रखा था.

गुजरात से शिकार को फंसा कर लखनऊ बुलाया जाता था, फिर उन्हें लखनऊ में रखा जाता था. लाखों की फिरौती देने के बाद भी कारोबारी बदमाशों की पकड़ से आजाद नहीं हो पाता था. बदमाश फिरौती लेने के लिए अमानवीय व्यवहार करते थे. लखनऊ पुलिस ने इन लोगों को पकड़ कर 3 राज्यों में फैले इस ठगी के कारोबार का परदाफाश कर दिया.

‘‘मोटा भाई, यह बात केवल खास लोगों को ही बताता हूं. आप मेरे लिए बहुत खास हो और यह जादुई चश्मा आप के लिए बहुत खास है. आप जैसे लोगों के लिए ही इसे बनाया गया है.’’ भानु ने गुजरात के जूनागढ़ में रहने वाले कारोबारी सुरेशभाई से कहा.

‘‘तुम्हारी बात सही है भाया, पर यह तो बताओ कि तुम्हारे इस खास जादुई चश्मे का राज क्या है? क्याक्या दिखता है इस से?’’ सुरेश ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘मोटा भाई, यह पूछो क्या नहीं दिखता. समुद्र के अंदर कहां तेल और यूरेनियम हो सकता है, किसी पुरानी हवेली में कहां खजाना हो सकता है, हीरे की खदानें कहां हैं, यह सब इस जादुई चश्मे से दिख जाता है.’’ भानु ने जादुई चश्मे की खासियत बताते हुए कहा.

‘‘बहुत करामाती चश्मा है यह तो.’’ जादुई चश्मे के गुण सुन कर सुरेश चकित रह गया.

‘‘और नहीं तो क्या मोटा भाई. सालों की मेहनत का नतीजा है. सरकार इसे बाजार में बेचना थोड़े ही चाहती है. इसलिए नजर बचा कर बेचना पड़ रहा है.’’ जादुई चश्मा के बारे में भानु ने ज्यादा जानकारी देते हुए कहा.

‘‘कितनी गहराई तक देख लेता है?’’ सुरेशभाई की उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही थी.

‘‘मोटा भाई, 7 फीट गहराई में तो यह साफ देख लेता है. अगर उस से गहरा कुछ है तो यह सिगनल भेज देता है.’’ भानु ने उस की दूसरी खासियत भी बताई.

‘‘तब तो यह कपड़ों के आरपार भी देख लेता होगा?’’ सुरेशभाई का लालच बढ़ गया था.

‘‘मोटा भाई, एक रुपए में 6 चवन्नी करना चाहते हो तो जादुई चश्मा ले लो फिर देखना क्याक्या दिखता है.’’ सुरेश की उत्सुकता को देख कर भानु ने कहा.

‘‘इस की कीमत तो बताई नहीं?’’

‘‘इस की कीमत तो माटी के भाव जैसी है. केवल एक करोड़ रुपए.’’

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‘‘यह तो बहुत ज्यादा है.’’

‘‘ज्यादा नहीं है. एक बार भी इसे लगा कर वह दिख गया जो सब को नहीं दिखता तो कीमत से कई गुना मिल जाएगा.’’

‘‘कुछ भी हो पर एक करोड़ होता तो ज्यादा ही है. कैसे देखने को मिलेगा?’’

‘‘मोटा भाई, ज्यादा लग रहा है तो 2 लोग मिल कर ले लो. आप दोनों को लखनऊ आने का हवाई टिकट करा देता हूं. यहां होटल में रुको, चश्मा देखो और फिर पैसे दे कर ले जाओ.’’ भानु ने मछली फंसती देखी और उसे यकीन हो गया कि अब सौदा हो जाएगा.

‘‘ठीक है भाया, हम और साथी केतनभाई लखनऊ आएंगे, तुम जादुई चश्मा तैयार रखना.’’

भानुप्रताप सिंह बहराइच के केवलपुर का रहने वाला था. सूरत से कपड़े ले जा कर वह नेपाल में बेचने का धंधा करता था. गुजरात में 3 साल पहले काम शुरू करने वाले भानुप्रताप ने सोचा था कि कपड़े बेच कर वह बड़ा कारोबारी बन जाएगा. पर उस की यह धारणा जल्द ही गलत साबित हुई थी.

गुजरात में कारोबार करने गए भानुप्रताप सिंह को खुद ठगी का शिकार होना पड़ा था. ठगी करने वाले बदमाशों ने उसे बंधक बना कर 21 लाख रुपए ऐंठ लिए. इतना पैसा देने से उस का पूरा कारोबार डूब गया. यह पैसा उसे कई लोगों से कर्ज ले कर देना पड़ा था.

इस घटना से भानुप्रताप को पता चल गया कि ईमानदारी से कारोबार करना बहुत मुश्किल है. ऐसे में उस ने अब पैसा कमाने के लिए ठगी का धंधा शुरू कर दिया. जिस तरह से वह फंसा था, वैसे ही उस ने भी दूसरों को फंसाना शुरू किया.

भानुप्रताप ने बहराइच के रहने वाले जितेंद्र सोनी को अपने साथ लिया और वापस गुजरात पहुंच गया. यहां उस ने कई बेरोजगारों को अपने साथ मिलाया. ये युवक बिना किसी मेहनत के लाखों रुपया कमाना चाहते थे. इन का काम गुजरात में रहने वालों से संपर्क कर उन्हें जादुई चश्मा बेचने का था.

गांधीनगर के रहने वाले कैमिकल कारोबारी भूपेंद्र पटेल को भी इन लोगों ने संपर्क कर जादुई चश्मा खरीदने के लिए कहा. इस के लिए 6 जनवरी को उन्हें लखनऊ बुलाया और बंधक बना कर रख लिया. इस के बाद फिरौती के 15 लाख रुपए वसूल किए. बंधक बना कर भूपेंद्र को कई तरह से यातनाएं दी गईं. बेल्ट से पिटाई और नाखून उखाड़ने तक की यातना दी गई. वह जान बख्श देने की दुहाई देते रहे.

भूपेंद्र घर वालों के संपर्क में थे. किसी तरह से 14 जनवरी को बंधकों के चंगुल से आजाद हो कर अपने घर पहुंचे. लगातार मिली प्रताड़ना से उन का जिस्म बुखार से तप रहा था. अगले ही दिन उन की मौत हो गई. घर वालों को पहले लगा कि बुखार की वजह से मौत हुई है. जब उन का अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही था तो घर वालों ने देखा कि उन के नाखून गायब थे. शरीर पर डंडे की पिटाई के निशान दिख रहे थे.

भूपेंद्र का मोबाइल खंगालने के बाद पता चला कि वह एक सप्ताह लखनऊ में थे. उन के बैंक खातों से लाखों रुपए निकाले गए थे. पुलिस की छानबीन से पता चला कि जादुई चश्मा लेने के लिए भूपेंद्र ने कई लोगों से ले कर पैसे दिए थे. भानु का गैंग जादुई चश्मा बेचने में लगा हुआ था.

भानु ने खुद को कारोबारी बता कर जानकीपुरम कालोनी में रहने वाले आफाक अहमद से उन के साढ़ू नियाज अहमद का मकान किराए पर लिया, जो सऊदी में रहते हैं. इस के बाद बदमाशों ने जूनागढ़ के दवा कारोबारी सुरेश भाई और सूरत के मयंक भाई और केतन जरीवाला को जादुई चश्मे का झांसा दे कर बुलाया.

ये लोग 21 फरवरी को हवाईजहाज से लखनऊ आ गए. पहले उन्हें रेलवे स्टेशन के पास चारबाग इलाके में होटल में ठहराया गया. यहां पर होटल सस्ते मिल जाते हैं.

यहां से इन्हें बंधक बना कर अड्डे पर ले गए. वहां इन लोगों को प्रताडि़त कर के पैसे वसूल करने शुरू किए. बदमाशों ने तीनों से 20 लाख रुपए वसूले. 28 फरवरी को जब इन्हें दूसरे ठिकाने पर ले जाया जा रहा था तो तीनों व्यापारी औटो से कूद कर भाग निकले. सुरेश ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया. केतनभाई की लखनऊ के मैडिकल कालेज में 9 मार्च को मौत हो गई.

जादुई चश्मा लेने के झांसे में फंसने के बाद व्यापारी को बंधक बना लिया जाता था. इस के बाद रिहाई के लिए उस के रिश्तेदारों से फिरौती मांगी जाती थी. पैसे देने के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया जाता था. जब मुंहमांगी रकम नहीं मिलती थी तो बदमाश कहते थे कि अगर पैसा नहीं मिला तो 20 से 50 लाख रुपए में उन के गुर्दे का सौदा हो रहा है.

इस से घबरा कर कारोबारी खुद पैसे का इंतजाम करने लगता था. फिरौती की रकम हवाला के जरिए वसूल होती थी. ये लोग खुद को व्यापारी बता कर किराए पर पूरा मकान लेते थे. लोगों को वहीं पर बंधक बना कर रखा जाता था. एक माह में 4 से 6 कारोबारियों से वसूली करने के बाद ये लोग मकान छोड़ देते थे.

लखनऊ के जानकीपुरम में गुजरात के 6-7 कारोबारियों को लूटने के बाद इन लोगों ने राजस्थान के राजसमंद जिले में अपना ठिकाना बनाया था. वहां भी 3 लोगों से 15 लाख रुपए वसूल चुके थे. धमकी और यातना से परेशान कारोबारी पैसा दे देते थे.

लखनऊ पुलिस ने इन बदमाशों की तलाश शुरू कर दी थी. एसपी (ट्रांसगोमती) हरेंद्र कुमार की अगुवाई में यह टीम काम कर रही थी.

इस टीम को बदमाशों तक पहुंचना आसान काम नहीं था. सब से अहम भूमिका सर्विलांस सेल की थी. कई नंबरों को सामने रख कर छानबीन शुरू हुई. सर्विलांस और स्वाट टीम के एसआई अजय प्रकाश त्रिपाठी, कांस्टेबल विद्यासागर, रामनरेश कनौजिया, मोहम्मद आजम खां और सुधीर सिंह ने लोकेशन ट्रेस करने का काम शुरू किया.

जानकीपुरम थाने के एसआई दयाशंकर सिंह, कांस्टेबल जितेंद्र प्रताप सिंह को राजसमंद के काकरौली थाने की पुलिस को साथ ले कर उदयपुर जाना पड़ा. वहां इन के ठिकाने पर दबिश दी गई. राजस्थान पुलिस को अपनी नाक के नीचे हो रहे अपराध का पता तक नहीं था. जैसे ही लखनऊ पुलिस ने इन्हें पकड़ा, वहां पुलिस ने खुद के गुडवर्क की खबर फैला दी.

वहां दबिश देने पर पुलिस को गुजरात के भावनगर के रहने वाले रामजीभाई, आरिफ, राजकोट के भावेश, दिलीपभाई और बहराइच के भानुप्रताप सिंह को पकड़ा गया. इन लोगों ने गुजरात के कच्छ निवासी इरफान, विनोद, सरफराज को पकड़ रखा था.

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ये लोग कमरे में रस्सी से जकड़े पड़े थे. इन तीनों को बेरहमी से पीटा गया था. ये लोग बंधकों से 16 लाख रुपए वसूल कर चुके थे. पिटाई से तीनों की चमड़ी उधेड़ी गई थी. इन तीनों ने राजस्थान के राजसमंद जिले के काकरौली थाने में मुकदमा लिखाया.

बदमाशों ने सरफराज को गैराज का मालिक समझ कर उठा लिया था. लेकिन वह मैकेनिक निकला. सरफराज को बताया कि उन के पास नेपाल की महारानी का चुराया हुआ हीरों का हार है, जबकि इरफान और विनोद को जादुई चश्मे के झांसे में बुलाया गया था.

इस गिरोह की सफलता पर बात करते हुए पुलिस ने बताया कि पकड़े गए 5 बदमाशों को काकरौली थाने की पुलिस ने मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

जानकीपुरम थाने में दर्ज एफआईआर की विवेचना कर रहे एसएसआई दयाशंकर सिंह ने पांचों बदमाशों को अपनी कस्टडी में लेने के लिए रिमांड की अरजी दी, लेकिन उन्हें लखनऊ लाने की अनुमति नहीं दी गई. अब बदमाशों को वारंट बी बना कर लखनऊ लाया जाएगा, जिस से आगे की पूछताछ की जा सके.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कामुक स्त्री का बेबस पति

सन 2011 में निर्मला जब 30 वर्षीय संजय रजक की पत्नी बन कर घर आई थी तो वह खुशी से फूला नहीं समाया था. क्योंकि उस की पत्नी बला की खूबसूरत थी. पेशे से मजदूर संजय के सपने बड़े नहीं थे. वह तो बस एक सुकूनभरी जिंदगी जीना चाहता था, जिस में पत्नी हो, बच्चे हों और छोटे से घर में हमेशा खुशियां बनी रहें.

संजय भले ही कम पढ़ालिखा था लेकिन था मेहनती. ज्यादा पैसे कमाने के लिए उस ने एक औफिस और एक स्कूल में माली का काम भी ले लिया था.

आम नौजवानों की तरह सुहागरात को ले कर संजय के मन में भी रोमांच और बहुत उत्सुकताओं के साथ थोड़ी सी घबराहट भी थी. पहली रात को यादगार बनाने की अपनी हसरत को पूरा करने के लिए उस ने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी. पहले कमरा सजाया फिर इत्र से महकाया और पत्नी निर्मला के लिए अपनी हैसियत के मुताबिक तोहफा भी लिया.

दोस्तों के मुंह से उस ने सुन रखा था कि सुहागरात के दिन जिस पति ने पत्नी को जीत लिया, वह जिंदगी भर उस की मुरीद रहती है. इस जीत लिया का मतलब संजय खूब समझता था कि सिर्फ शारीरिक तौर पर ही पत्नी को हासिल या संतुष्ट कर देना नहीं होता, बल्कि आने वाली जिंदगी को ले कर बहुत से सपने भी साथ बुनने पड़ते हैं और पत्नी की इच्छाएं भी समझनी पड़ती हैं. उस ने अब तक फिल्मों में सुहागरात देखी थी और कुछ शादीशुदा दोस्तों से उन के तजुरबे जाने थे.

इस रात को हसीन बनाने के मकसद से जब वह कमरे में पलंग पर बैठी निर्मला के पास पहुंचा तो उस की खूबसूरती देख कर दंग रह गया. लाल सुर्ख जोड़े में निर्मला वाकई गजब ढा रही थी. अपनी किस्मत पर उसे गर्व हो रहा था.

निर्मला के नजदीक बैठ कर उस ने बातचीत शुरू की और जैसे ही उसे छुआ तो निर्मला को मानो करंट सा लग गया. उस ने पहल करते हुए पति को अपनी बांहों में ले कर उसे ताबड़तोड़ तरीके से प्यार करना शुरू कर दिया.

निर्मला पति से बहुत जल्दी खुल गई थी. लड़कियां पहली रात खूब शरमाती हैं, तरहतरह के नखरे करती हैं, जैसी तमाम धारणाएं संजय के दिलोदिमाग से हट गईं और वह भी पत्नी की तपस भरी पहल में पिघल कर उस के शरीर में डूब गया.

थोड़ी देर बाद जब तूफान थमा तो संजय के चेहरे पर संतुष्टि थी लेकिन निर्मला का दिल नहीं भरा था. चूंकि निर्मला की झिझक दूर हो चुकी थी, लिहाजा उस ने दोबारा संजय को उकसाया तो वह भी अपने आप को रोक नहीं पाया. पहली ही रात एकदो बार नहीं बल्कि कई बार दोनों के बीच शारीरिक संबंध बनेऔर तब तक बनते रहे जब तक संजय निढाल हो कर बिस्तर पर लुढ़क नहीं गया.

फिर तो हर रात यही होने लगा. संजय जैसे ही काम से लौट कर खापी कर बिस्तर पर पहुंचता तो निर्मला उसे अपनी तरफ घसीट कर तरहतरह से प्यार करती थी. ऐसा प्यार कि संजय निहाल हो उठता था. पत्नी खूबसूरत होने के साथसाथ सैक्सी भी हो तो जिंदगी वाकई खुशगवार हो उठती है. इस मामले में संजय खुद को लकी समझने लगा था.

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कुछ दिनों बाद ही जब निर्मला दिन में भी और सुबहसुबह भी सैक्स चाहने लगी तो संजय को अजीब लगा. अजीब इसलिए कि वह चाहे कितना भी सैक्स कर लेता, लेकिन निर्मला का जी नहीं भरता था. शादी के बाद आमतौर पर पति नईनवेली पत्नी के आगेपीछे मंडराते हैं और मनचाहे सैक्स के बाबत पत्नियों के नाजनखरे उठाते हैं. लेकिन यहां तसवीर उलट थी. संजय को पत्नी से कुछ कहना ही नहीं पड़ता था बल्कि जो लगातार करना पड़ रहा था, उस से उसे खीझ होने लगी थी.

खीझती तो निर्मला भी थी पर उस वक्त जब संजय उस की इच्छा या मांग पूरी करने में आनाकानी करता था या फिर बहाना बनाने की कोशिश करता था. ऐसी स्थिति में वह कभीकभार पति को ताने भी मारने लगी थी.

संजय को सैक्स से कोई परहेज नहीं था लेकिन वक्तबेवक्त पत्नी की सैक्स इच्छा उस की समझ के बाहर थी. फिर भी जितना उस से बन पड़ता था, वह पत्नी को खुश रखने की कोशिश करता था. उस का सोचना था कि वक्त रहते सब ठीक हो जाएगा.

पर उस का यह खयाल गलत साबित हुआ. शादी के बाद जब निर्मला गर्भवती हुई तो संजय को दोहरी खुशी हुई. पहली खुशी उस ने दोस्तों और रिश्तेदारों से साझा भी की कि वह भी बाप बनने वाला है लेकिन दूसरी उस ने अपने मन में ही रखी कि अब एकाध साल निर्मला मनमानी नहीं कर पाएगी. क्योंकि लेडी डाक्टर ने चैकअप के वक्त सैक्स को ले कर कुछ हिदायतें दी थीं, जिन में यह बात भी शामिल थी कि कोई बंदिश तो नहीं पर इस दौरान सैक्स से दूर रहने की कोशिश करनी चाहिए.

डाक्टर के समझाने का निर्मला पर कोई असर नहीं पड़ा था. मन मार कर और ऐहतियात बरतते हुए संजय को निर्मला की इच्छा पूरी करनी पड़ती थी. अब वह यह उम्मीद लगाने लगा था कि शायद बच्चा हो जाने के बाद निर्मला में कुछ सुधार आ जाए.

वक्त रहते निर्मला ने सुंदर बेटे को जन्म दिया तो अपनी इस नई जिम्मेदारी के प्रति संजय गंभीर हो चला था कि अब खर्चे बढ़ेंगे, कल को बेटा स्कूल भी जाएगा इसलिए ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने और बचाने की कोशिश की जाए. उस ने बेटे का नाम समीर रखा.

मां बनने के बाद भी निर्मला में कोई सुधार नहीं हुआ बल्कि उस की फरमाइश पहले से और ज्यादा बढ़ गई थी. इधर संजय में पहले सी ताकत और जोश नहीं रहा था, इसलिए वह कभीकभार साफ मना कर देता था. इस पर निर्मला उसे मारनेनोचने लगती थी और पागलों जैसी हरकतें करने लगती थी.

संजय को इतना तो समझ आ रहा था कि निर्मला को इतनी तीव्र इच्छा कोई स्वाभाविक बात नहीं बल्कि एक असामान्यता या कोई बीमारी है पर महमंद जैसे छोटे से गांव में जहां कोई फिजिशियन भी नहीं था, वहां किसी मनोचिकित्सक के होने की कोई संभावना तक नहीं थी, जिस से संजय पत्नी की इस अजीब सी बीमारी का इलाज करा पाता.

पति काफी कुछ बरदाश्त कर लेता है पर पत्नी शादी के 4 साल बाद उस की मर्दानगी को ले कर ताने मारे तो उस का सब्र जवाब दे जाता है. यही संजय के साथ हो रहा था जो बेटे समीर का मुंह देख कर बेइज्जती के कड़वे घूंट पी जाता था. अब उस की हर मुमकिन कोशिश निर्मला से दूर रहने की होती थी, पर यह नामुमकिन काम था.

एक दिन निर्मला ने फिर से जिद की तो उस ने मन मार कर साफ कह दिया कि उस में अब इतनी ताकत नहीं है कि दिनरात यही सब करता रहे. इस बार निर्मला ने उस से नोचने या कोई पागलपन जाहिर करने के बजाय उसे सैक्स पावर बढ़ाने की दवाएं लेने की सलाह दी तो वह चौंक उठा.

निर्मला की सलाह पर वह कोई प्रतिक्रिया दे पाता, इस के पहले ही उस ने पागलों जैसी जिद पकड़ ली कि मर्दानगी और ताकत बढ़ाने वाली दवा खाओ, इस में हर्ज क्या है. हर बार की तरह इस बार भी संजय को पत्नी की जिद के आगे हथियार डालने पड़े और वह झेंपता, सकुचाता शहर से सैक्स पावर बढ़ाने वाली दवा ला कर खाने लगा.

इस उपाय से कुछ दिन ही ठीकठाक गुजरे यानी निर्मला संतुष्ट रही, लेकिन कुछ दिन बाद फिर ढीले पड़ते संजय के साथ वह पहले की तरह व्यवहार करने लगी. जिस से संजय को घर नर्क और जिंदगी बेकार लगने लगी थी. अपनी अजीबोगरीब परेशानी वह किसी से साझा भी नहीं कर सकता था. क्योंकि बात शर्म वाली होने के साथसाथ इज्जत का कचरा कराने वाली भी थी.

सैक्स के साथसाथ अब जिंदगी की गाड़ी भी हिचकोले खाते चलने लगी थी. निर्मला अपनी बीमारी के हाथों मजबूर थी, इसलिए उस ने मोहल्ले के कम उम्र के लड़कों से दोस्ती गांठनी शुरू कर दी थी. वह उन से शारीरिक संबंध बनाने लगी थी. यह भनक जब संजय को लगी तो वह तिलमिला उठा, लेकिन खामोश रहा. क्योंकि बिना सबूत पत्नी पर इलजाम लगाना कोई तुक वाली बात नहीं थी.

एक दिन निर्मला ने बड़े प्यार से संजय से कहा कि वह उस की भी नौकरी कहीं लगवा दे, जिस से घर की आमदनी बढ़े. इस पेशकश को संजय ने यह सोचते हुए मान लिया कि निर्मला काम करेगी तो व्यस्त रहेगी. इस से संभव है उस की आदतों में सुधर आए. यह सोचते हुए उस ने निर्मला की नौकरी उसी स्कूल में लगवा दी, जहां वह माली का काम करता था.

स्कूल में काम करने की निर्मला की असली मंशा भी जल्द उजागर हो गई. उस ने वहां के नौजवान चपरासियों से ले कर बस कंडक्टर और ड्राइवरों तक से शारीरिक संबंध बना लिए. ऐसी बातें छिपी नहीं रहतीं. इस से संजय की ही बदनामी हो रही थी, पर वह बेबस था.

एक दिन तो उस वक्त हद हो गई जब उस ने अपने ही घर में निर्मला को एक लड़के के साथ रंगरेलियां मनाते हुए देख लिया. इस पर दोनों में खूब झगड़ा हुआ और निर्मला ने उलटे थाने में जा कर पति के खिलाफ मारपीट करने की शिकायत लिख कर दे दी. इस पर पुलिस वालों ने दोनों को समझाबुझा कर वापस भेज दिया. गुस्साई निर्मला मायके चली गई.

डेढ़ साल मायके में रह कर वह वापस आई तो बिलकुल नहीं बदली थी. संजय शायद उसे वापस नहीं लाता, पर बेटे के मोह ने उसे जकड़ रखा था. वापस आ कर निर्मला फिर से किसी न किसी को घर बुला कर सैक्स की भूख शांत करने लगी.

टोकने पर अब वह पूरी बेशरमी से संजय से कहने लगी थी कि जब तुम मेरी भूख नहीं मिटा सकते तो मेरे लिए लड़कों का इंतजाम करो और नहीं कर सकते तो आंखकान बंद किए रहो.

16 फरवरी, 2018 की शाम जब संजय सब्जी ले कर घर वापस आया तो यह देख शर्म से पानीपानी हो उठा कि निर्मला एक कम उम्र बच्चे के साथ सैक्स कर रही थी. गुस्साए संजय ने उसे डांटा तो वह पूरी बेशरमी से बोली कि जब तुम से कुछ नहीं होता तो चुप रहो, मेरा जब जहां जिस से मन करेगा, करूंगी.

इस जवाब पर संजय की हालत सहज समझी जा सकती थी, जो रोजरोज पत्नी की बेजा हरकतों के चलते तिलतिल कर मर रहा था और अब तो बदनामी भी होने लगी थी. किसी भी पति के लिए यह डूब मरने वाली बात थी.

इसी रात संजय जब सोने के लिए बिस्तर पर गया तो निर्मला उस के पास आ कर उसे सैक्स के लिए उकसाने लगी. मना करने का नतीजा और निर्मला के जहर बुझे जवाब संजय को मालूम थे, इसलिए उस ने यह सोचते हुए पूरी तरह आपा खो दिया कि इस मर्दखोर औरत की वासना तो कभी शांत होने वाली नहीं है. लिहाजा क्यों न इसे ही हमेशा के लिए शांत कर दिया जाए.

संजय ने कमरे में पड़ा लोहे का डंबल उठा कर निर्मला के सिर पर दे मारा. 2-3 प्रहार में ही उस की मौत हो गई. पत्नी की लाश के पास बैठ कर उस ने न जाने क्याक्या सोचा और फिर घबरा गया. फांसी का फंदा संजय को अपनी गरदन पर लटकता हुआ दिख रहा था.

कुछ देर और सोचने के बाद उस ने भाग जाने का फैसला ले लिया और रसोई में जा कर निर्मला की कब्र खोदनी शुरू कर दी. एक घंटे में 2 फीट गहरा गड्ढा खुद गया तो उस ने लाश उस में डाल कर ऊपर से ईंटें बिछा दीं.

घर के बाहर सूरज की रोशनी देख संजय को तब एक झटका और लगा जब उस ने गहरी नींद में सोए बेटे को देखा. अब उस का क्या होगा, इस खयाल से ही उस का दिल दहल गया कि इस मासूम का क्या कुसूर जो वह मांबाप के किए की सजा भुगते.

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यह सोचते ही उस ने थाने जा कर आत्मसमर्पण करने का फैसला ले लिया और वह बेटे को गोद में उठा कर नजदीकी तोरबा थाने की तरफ चल पड़ा. अब तक निर्मला की हत्या की खबर गांव वालों को भी लग चुकी थी, इसलिए कई लोग उस के पीछेपीछे थाने की तरफ चल दिए.

हालांकि उस के किए की खबर पहले से ही थाने पहुंच चुकी थी. हुआ यूं था कि स्कूल के एक शिक्षक आकाश उपाध्याय ने संजय को फोन कर के निर्मला को काम पर जल्द भेजने के लिए कहा था.

संजय ने बेहद सर्द आवाज में आकाश उपाध्याय को बता दिया था कि उस ने निर्मला की हत्या कर दी है और वह आत्मसमर्पण करने थाने जा रहा है. इस पर आकश ने थानाप्रभारी परिवेश तिवारी को यह खबर दे दी थी. पुलिस टीम अभी संजय को गिरफ्तार करने जा ही रही थी कि संजय थाने जा पहुंचा. बेटा समीर उस की गोद में था.

पुलिस पूछताछ में संजय की कहानी सामने आई तो उसे बहुत ज्यादा गलत न मानने वालों की भी कमी नहीं थी, पर गुनाह तो उस ने किया था, जिस की सजा मिलना भी तय था.

पुलिस टीम के साथ घर आ कर उस ने निर्मला की लाश और हत्या में प्रयुक्त डंबल बरामद करवा दिया और फिर खामोशी से हवालात में समीर को अपने सीने से चिपका कर बैठ गया. जिस ने भी सुना, वह अवाक  रह गया कि ऐसा भी होता है.

जब निर्मला के मांबाप समीर को ले जाने के लिए आए तो उस ने साफ इनकार कर दिया. उस का कहना था कि निर्मला के मांबाप को सब कुछ मालूम था, इस के बाद भी वे बेटी की तरफदारी करते थे. लिहाजा अदालत के आदेश पर पुलिस ने समीर को बालगृह भेज दिया.

संजय और क्या करता इस सवाल का सटीक जवाब किसी के पास नहीं था. वह पत्नी को छोड़ता तो भी बदनामी होती और निर्मला अपनी बीमारी छिपाए रखने के लिए झूठी रिपोर्ट पुलिस में लिखाती रहती.

तलाक के लिए अदालत जाता तो भी परेशान रहता, क्योंकि इस बीमारी को अदालत में साबित कर पाना आसान काम नहीं था. वजह जिन के साथ निर्मला ने संबंध बनाए थे, वे तो गवाही देने अदालत आते नहीं. दूसरे हर हालत में उसे पत्नी को गुजारा भत्ता तो देना ही पड़ता. वह जहां भी रहती, वहीं किसी न किसी मर्द से संबंध बनाने से नहीं चूकती.

ऐसे परेशान पतियों की मदद कोई नहीं करता. हालांकि खुद संजय ने भी इस मुसीबत से छुटकारा पाने की कोई खास कोशिश नहीं की और इसी बेबसी ने उसे मजबूर कर दिया कि वह अपनी कामुक पत्नी की हत्या कर दे.

थाने में पुलिस वालों की बातचीत से उसे पता चला कि निर्मला वाकई एक ऐसी सैक्सी बीमारी निंफोमेनिया की मरीज थी, जिस में औरत को सैक्स संतुष्टि नहीं मिलती. यह बीमारी एक लाख महिलाओं में से किसी एक को होती है, जिस का इलाज मुमकिन है बशर्ते कोई विशेषज्ञ डाक्टर की देखरेख में हो.

जाहिर है, यह संजय के वश की बात नहीं थी और जो थी उसे उस ने अंजाम दे डाला. इस बाबत कोई शर्मिंदगी या पछतावा भी उसे नहीं था. उस की एकलौती चिंता समीर और उस का भविष्य है.

केंद्रीय कर्मचारियों को पैंशन के लिए आधार जरूरी नहीं

केंद्र सरकार के कई पूर्व कर्मचारियों की अकसर यह शिकायत रहती है कि आधारकार्ड नहीं होने के कारण उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पैंशन नहीं मिल रही है.

केंद्र सरकार के कई पूर्व कर्मचारियों की अकसर यह शिकायत रहती है कि आधारकार्ड नहीं होने के कारण उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पैंशन नहीं मिल रही है. कई कर्मचारियों ने भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या प्राधिकरण से आधारकार्ड नहीं बनवाया. इस की वजह है कि वे सरकारी कर्मचारी सेवाकाल में अपने पहचानपत्र के सब जगह चलने के कारण आधारकार्ड को महत्त्व नहीं देते.

आधारकार्ड एक विशिष्ट पहचानपत्र है इसलिए यह हर व्यक्ति के पास होना चाहिए. यह पासपोर्ट या चुनाव मतदाता पहचानपत्र से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह बायोमैट्रिक आधार पर तैयार किया जाता है. ऐसा है तो फिर कोई भी व्यवस्था से ऊपर नहीं होना चाहिए, लेकिन देश की सब से बड़ी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी केंद्रीय कर्मचारी होते हैं और शासनप्रशासन में उन्हीं की चलती है. अपनी सुविधा के लिए वे जो चाहते हैं, करते हैं. सरकार उन की बात मानने के लिए एक तरह से बाध्य होती है. उन्हें लगता है कि यदि वे आम आदमी की तरह आधारकार्ड बनावाएंगे तो उन की विशिष्टता को ठेस पहुंचेगी. इसी अहंकार के चलते आईएएस लौबी ने सरकार पर दबाव बनाया और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र प्रसाद से कहलाया कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पैंशन पाने के लिए आधारकार्ड जरूरी नहीं है.

केंद्र सरकार के पूर्व सामान्य कर्मचारियों को भी इस घोषणा का लाभ मिलेगा, यह संतोष की बात है. केंद्र सरकार के 48.41 लाख कर्मचारी हैं और 61.4 लाख कर्मचारी पैंशनभोगी हैं. इन कर्मचारियों के लिए अब आधार पहचान के वास्ते आवश्यक नहीं है, लेकिन उस का इस्तेमाल जीवन प्रमाणपत्र के लिए ये कर्मचारी कर सकेंगे. इस व्यवस्था का विरोध नहीं है, लेकिन देश के हर नागरिक की पहचान का माध्यम एक होने पर किसी के विशेष होने का अहंकार सेवानिवृत्ति के बाद खत्म तो होना ही चाहिए.

आधार कार्ड की जकड़न

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. क्या आधार नंबर को टैलीफोन, बैंक अकाउंट, परिचयपत्र, आयकर, पैनकार्ड से जोड़ना अनिवार्य होना चाहिए. दुनियाभर में निजता एक गंभीर मामला बनता जा रहा है. जहां चीन और रूस में सरकारें जानकारी को नागरिकों के अधिकारों को कुचलने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं लोकतांत्रिक देशों में इस का उपयोग हर नागरिक के बारे में और जानने व उस को अपना माल बेचने को उकसाने के लिए किया जा रहा है. आधार जैसे तरीके से एकत्र की गई जानकारी की जम कर खरीदफरोख्त हो रही है. फेसबुक, व्हाट्सऐप, गूगल भी जबरन आम नागरिक की जानकारी जमा कर लेते हैं. यही जानकारी फिर नागरिकों को बहलानेफुसलाने में इस्तेमाल करते हैं.

अब आप के मैडिकल रिकौर्ड भी जमा हो रहे हैं. आप किसी भी अस्पताल में चले जाइए, आप का आधारकार्ड भी मांग लिया जाएगा और आधार से जुड़ी आप के खून की बूंदबूंद की जानकारी एक जगह इकट्ठी होती रहेगी. आप का मैडिकल रिकौर्ड अब सरकारी होता जा रहा है. आप का मैडिकल इतिहास गोपनीय होना चाहिए पर हर बड़े अस्पताल में यह बीसियों कंप्यूटरों में पड़ा है. आप का ईसीजी, स्कैन रिपोर्ट, लैब रिपोर्ट, कब किस डाक्टर ने आप को देखा सब कंप्यूटर पर है. जल्द ही आप ने कौन सी दवा कितनी खाई, यह जानकारी भी आधार से जुड़ी फार्मेसी से एक जगह जमा हो जाएगी. आप किसी से कोई बात छिपा नहीं सकेंगे. आप के हर पल पर सरकार का नियंत्रण होगा.

सरकारें चाहेंगी कि आप तंदुरुस्त गुलाम रहें, इसलिए चीन की तरह अंक देना शुरू कर देंगी, जैसे क्रैडिट कार्ड या हवाईजहाज वाले आप को पौइंट्स देते हैं. चीन तो सड़क पर चलते हुए अपने लाखों कैमरों से नागरिकों को देख रहा है और हरदम नागरिकों को अनुशासित कर रहा है. भारत में भी आधार को यदि सरकार की मनचाही छूट मिली तो यही होगा.

यदि मैडिकल डाटा उपलब्ध होगा तो नौकरियां मिलने में जांचा जाएगा. इंश्योरैंस कंपनी प्रीमियम बढ़ा देगी, एयरलाइंस कंपनी टिकट का दाम बढ़ा देगी, मकानमालिक किराया ज्यादा वसूलेगा, स्कूल बच्चों को मातापिता के मैडिकल रिकौर्ड के अनुसार दाखिला देगा. सरकारी या निजी क्षेत्र में पदोन्नति में मैडिकल रिकौर्ड देखा जाएगा. विवाहों में भी इसे इस्तेमाल किया जाएगा. हर नागरिक असल में जल्द ही कंप्यूटर की जंजीरों का गुलाम बनने जा रहा है और कोई कुछ नहीं कर सकता. ये जंजीरें हम ने खुद को पहनाई हैं.

कास्टिंग काउच : कालिख या काम की गारंटी

आज देश में जो माहौल है, उस में यकीनी तौर पर कहा जा सकता है कि औरतें कहीं भी महफूज नहीं हैं. नवजात बच्ची से ले कर बूढ़ी औरतें तक रेप का शिकार हो रही हैं. अखबार, खबरिया चैनल की खबरों और सोशल मीडिया पर औरतों व लड़कियों को सताए जाने के वायरल होते वीडियो दहशत पैदा करते हैं. कठुआ, उन्नाव, सासाराम और न जाने कौनकौन से रेप कांड हैं जो रोजाना सुर्खियां बन कर सिर भन्ना देते हैं. जब भी कोई रेप कांड होता है तो उस की खिलाफत में फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी खूब कमर कसते हैं, जबकि वहां से भी कास्टिंग काउच के चलते महिला कलाकारों के शोषण की खबरें सरेआम आती रहती हैं.

हौलीवुड की फिल्म इंडस्ट्री में हाल ही में ‘मी टू’ नाम से एक कैंपेन चलाया गया था, जिस में कई हीरोइनों ने कास्टिंग काउच को ले कर आपबीती सुनाई थी. बहुतों ने अपने जख्म हरे किए तो कुछ ने कहा कि अगर उन्होंने इस बुराई के खिलाफ कुछ बोला तो उन का कैरियर खत्म हो जाएगा. इस का असर भारत में भी पड़ा. यहां पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की एक फिल्म ‘मिस लवली’ का वह हसीन याद आता है जिस में नवाजुद्दीन अपने एक फिल्म मैनेजर दोस्त के केबिन में बैठा होता है. नाटे कद और भद्दी शक्ल का वह फिल्म मैनेजर अभी उस से कुछ बात कर ही रहा होता है कि एक गदराए बदन की अधेड़ उम्र की औरत वहां आ कर उस मैनेजर से फिल्म में रोल मांगती है.

वह औरत छोटा सा रोल पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखती है, जिस का फायदा वह ठिगना केबिन में ही उठाता है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी वहीं बैठा रहता है, लेकिन मुंह फेर लेता है. अब उस औरत को अपनी देह के जरीए आगे किसी फिल्म में रोल मिला या नहीं, पता नहीं, लेकिन उस मैनेजर की असलियत सामने आ गई थी जो वहीं केबिन में दारू का इंतजाम भी रखता है.

इसी तरह फिल्म ‘दिल्ली 6’ में फिल्मों में काम करने का सपना देखने वाली सोनम कपूर भी लोकल फोटोग्राफर के चंगुल में फंस ही चुकी होती है. लेकिन चूंकि वहां फिल्म का प्लौट दूसरा था, इसलिए वह उस धूर्त की दरिंदगी का शिकार नहीं बन पाती है. कहने का मतलब है कि ग्लैमर वर्ल्ड में जितनी चुंधिया देने वाली रोशनी दिखाई देती है, वह खुद में कास्टिंग काउच का कालापन समेटे होती है.

डेजी का खुलासा डेजी ईरानी ने अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव में एक सनसनीखेज खुलासा किया. उन्होंने बताया कि जब वे 6 साल की थीं तब उन के साथ किसी ने गलत काम किया था. उन्होंने यह भी कहा कि आज की लड़कियां इस बारे में बात नहीं कर सकतीं. अगर वे बोलती हैं और रेप की चीखें सुनाती हैं तो कोई उन्हें काम नहीं देगा.

कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं जिन को इस के लिए मजबूर किया गया हो या जिन्होंने अपनी मरजी से ऐसा किया हो, पर अगर वे नाम जाहिर करती हैं तो फिल्म इंडस्ट्री उन से किनारा कर लेगी. डेजी ईरानी ने फिल्मों में साल 1950 में बतौर बाल कलाकार काम करना शुरू किया था. घुंघराले बालों वाली मासूम चेहरे की इस बच्ची ने तब अपनी शानदार अदाकारी से जल्दी ही फिल्म दीवानों का दिल जीत लिया था. वे फिल्मों में कभी लड़की बनती थीं तो कभी लड़का. लोगों को अंदाजा भी नहीं हो पाता था कि बड़ीबड़ी आंखों वाली चपरचपर करती यह लड़की है या लड़का.

उसी बेबी डेजी ने अपनी उम्र के 67वें पड़ाव पर बताया कि जब वे 6 साल की थीं तब उन का रेप किया गया था. उस वक्त वे मद्रास (अब चेन्नई) में फिल्म ‘हम पंछी एक डाल के’ की शूटिंग कर रही थीं.

डेजी ईरानी के मुताबिक, रेप करने वाला वह शख्स उन की जानपहचान का था. वह उन्हें एक होटल में ले गया था और बैल्ट से मारा था. यही नहीं, उस शख्स ने उन्हें धमकाया था कि अगर यह बात किसी को बताई तो वह उन्हें जान से मार देगा. डेजी ईरानी ने दिल दहलाने वाली इस सचाई से परदा हटाते हुए कहा, ‘‘उस वक्त मैं काफी छोटी थी, लेकिन वह दर्द आज भी मुझे याद है कि किस तरह उस ने मुझे बैल्ट से मारा था. उस आरोपी की मौत हो चुकी है. उस का नाम नजर था. वह मशहूर गायिका जोहराबाई अंबाले वाली का रिश्तेदार था और फिल्म इंडस्ट्री में उस की काफी जानपहचान थी. इस वजह से मैं डर गई थी.’’

इतना ही नहीं, डेजी ईरानी ने एक और किस्सा सुनाया. जब वे 15 साल की थीं तब उन की मां उन्हें एक फिल्मकार मालिकचंद कोचर के यहां छोड़ कर आई थीं. मां चाहती थीं कि उन की बेटी रातोंरात स्टार बन जाए और उस फिल्मकार की फिल्म ‘मेरे हुजूर’ में काम मिल जाए. इस के लिए मां ने उन्हें साड़ी पहना कर भेजा था. डेजी ईरानी ने बताया, ‘‘मैं जब उस फिल्मकार से मिलने पहुंची तो उस ने मुझे सोफे पर बिठाया और यहांवहां छूना शुरू कर दिया. मुझे पता था कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है. इस के बाद मैं किसी तरह वहां से भागी और बाहर आ गई. मैं अपना दर्द अपनी मां को भी नहीं बता पाई थी.’’

डेजी ईरानी एकलौती कलाकार नहीं हैं जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच को ले कर अपनी बात रखी है. हाल ही में स्वरा भास्कर ने बताया कि एक बार किस तरह एक डायरैक्टर उन के कमरे में घुस आया था और नशा करने के बाद उन्हें गले लगाने की जिद की थी. इतना ही नहीं, डायरैक्टर ने एक रोल के बदले में उन से जिस्मानी रिश्ता बनाने की मांग की थी. टैलीविजन पर आने वाले एक मशहूर कौमेडी सीरियल ‘भाभीजी घर पर हैं’ से मशहूर हुई शिल्पा शिंदे ने शो के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ सैक्स संबंधी छेड़छाड़ का केज दर्ज कराया था. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि संजय ने उन्हें ‘सैक्सी’ कहा था और जबरदस्ती गले लगाने की कोशिश की थी. इतना ही नहीं, उन की कमर और छाती को भी छूने की कोशिश की थी.

यहां फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ का विद्या बालन का वह डायलौग याद आता है कि फिल्म 3 चीजों से चलती है ऐंटरटेनमैंट, ऐंटरटेनमैंट और ऐंटरटेनमैंट. लेकिन क्या वही विद्या बालन या फिल्म इंडस्ट्री की कोई भी महिला कलाकार यह चाहेगी कि उसे ही ‘ऐंटरटेनमैंट’ का जरीया बना कर मजा किया जाए?

ऐसे सिखाया सबक

साल 2014 में हीरोइन प्रीति जिंटा ने अपने बौयफ्रैंड रह चुके बड़े कारोबारी नैस वाडिया के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया था. तब प्रीति ने अपनी शिकायत में कहा था कि नैस ने वानखेड़े स्टेडियम में उन से छेड़खानी की थी. कोएना मित्रा ने भी एक अनजान शख्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. वह शख्स कोएना को फोन पर बेहूदा बातें कर के वन नाइट स्टैंड का औफर दे रहा था.

कोएना मित्रा ने उस आदमी के खिलाफ आईपीसी की धारा 509 के तहत मामला दर्ज कराया था. इसी तरह हीरोइन राधिका आप्टे ने बताया था कि दक्षिण भारत के एक मशहूर ऐक्टर ने सैट पर आ कर उन के साथ बदतमीजी की थी. वह उन के पैर सहलाने लगा था. राधिका को उस की यह हरकत पसंद नहीं आई और उन्होंने उसे तमाचा जड़ दिया.

इन को अनजान ने सताया

कभी सलमान खान की प्रेमिका रह चुकी सोमी अली ने बताया कि जब वे महज 5 साल की छोटी बच्ची थीं तब घर में काम करने वाले एक नौकर ने उन के साथ यौन हिंसा की थी. इसी तरह अनिल कपूर की बेटी और खूबसूरत हीरोइन सोनम कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘‘जब मैं 13-14 साल की थी तब फिल्म देखने जाते समय एक शख्स ने मुझे पीछे से आ कर दबोच लिया था. तब मैं बहुत डर गई थी. 2-3 साल तक तो मैं ने इस बारे में किसी को बताया भी नहीं था.’’

अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने टीवीएफ के सीईओ अरुणम कुमार पर सैक्सुअल हैरासमैंट का आरोप लगाया था. ट्विंकल ने तब बताया था कि उन्हें जब फोन पर एक गंदा संदेश भेजा गया तो वे अपनी गाड़ी में फूटफूट कर रोने लगी थीं. इस तरह की फेहरिस्त बड़ी लंबी है जब सुनहरे परदे या टैलीविजन की महिला कलाकारों को अपने ही साथी कलाकारों या अनजानों से बेइज्जत होना पड़ा. कई चुप्पी साध गईं तो कुछ ने अपनी भड़ास निकाली.

सरोज के अलग सुर

कास्टिंग काउच पर हीरोइनें या दूसरी महिला कलाकार जितना भी खुल कर बोल रही हैं, उस के उलट इसी इंडस्ट्री से जुड़ी मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान ने दूसरी ही नई बात छेड़ कर मामले को अलग ही एंगल दे दिया है.

अपने हालिया बयान में सरोज खान ने फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच और रेप के मुद्दे पर कहा कि अगर फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच होता है तो रोटी भी मिलती है. जिस के साथ गलत हुआ है उसे छोड़ नहीं दिया जाता, बल्कि उसे काम दिया जाता है. जब इस बयान पर विवाद उठता दिखा तो सरोज खान ने कहा, ‘‘अब मैं ने क्या गलत कह दिया है. जो सच है वही कहा है. मेरी बात को लोग गलत ले रहे हैं तो क्या कर सकते हैं. मैं रेप जैसे अपराधों को सही नहीं कह रही हूं. मेरा कहना है कि लोग फिल्म इंडस्ट्री पर ही उंगली क्यों उठाते हैं? क्या यह सब फिल्म इंडस्ट्री के बाहर दूसरी जगहों पर नहीं होता है?’’

सरोज खान ने आगे कहा, ‘‘हर लड़की के ऊपर कोई न कोई हाथ साफ करने की कोशिश करता है. सरकार के लोग भी करते हैं, फिर लोग फिल्म जगत के पीछे क्यों पड़े हैं? फिल्म जगत कम से कम रोटी तो देता है, रेप कर के छोड़ तो नहीं देता. यह लड़की के ऊपर है कि वह क्या चाहती है. अगर वह चाहती है कि किसी के हाथ न आना तो न आए.’’ सरोज खान के बयान से सवाल उठता है कि क्या कास्टिंग काउच वाकई जबरदस्ती होता है या यह एक तश्तरी में परोसा गया वह गिफ्ट होता है कि आप हमारी तमन्नाएं पूरी कीजिए, हम आप को सिल्वर स्क्रीन का चमकता सितारा बना देंगे? जब सुविधा होती है तब तो बहुत सी हीरोइनें इस गिफ्ट को स्वीकार कर लेती हैं. उन्हें काम भी मिलता है और सरोज खान के मुताबिक उन का पेट भी पलता है.

मंगनी की अंगूठी (अंतिम भाग) : मोहित ने किसे अपना हमसफर बनाया

पूर्वकथा :

मोहित की पहली मुलाकात जहां कौल सैंटर वाली सुमिता से होती है वहीं दूसरी बार वह स्विट्जरलैंड भ्रमण के दौरान व्योमबाला सुमिता से मिलता है. अब मोहित की तीसरी मुलाकात एक विज्ञापन कंपनी की डायरैक्टर सुमिता से होती है. आखिर इन तीनों सुमिता में से उस ने किस को अपना हमसफर बनाया.

आगे पढ़िए…

एकदूसरे की तारीफ के बाद जैसे ही ड्रिंक्स का दौर शुरू हुआ, तभी हौल में कौल सैंटर वाली सुमिता ने कदम रखा. वह भी आज खासतौर से ब्यूटीपार्लर से सजधज कर आई थी.

उस ने नए फैशन की काली सलवारकमीज डाली हुई थी. बिना दुपट्टे के वह गले में नए डिजाइन का नैकलेस डाले हुए थी. आज वह मोहित से शादी के बारे में बात करना चाहती थी. तनहा कोने वाली पसंदीदा मेज अभी तक खाली थी. ‘शायद मोहित अभी तक नहीं आया था,’ यह सोचते हुए वह धीरधीरे चलती हुई मेज के पास पहुंची. साथ वाली मेज पर एक जोड़ा चहकताहंसता बातें कर रहा था. पुरुष की पीठ उस की तरफ थी. चेहरा पीछे से कुछ जानापहचाना सा लग रहा था. मगर मोहित तो हमेशा जींस, टीशर्ट या फिर कैजुअल वियर पहनता था. यह तो कोई हाई सोसाइटी का कोई सूटेडबूटेड नौजवान है.

कुर्सी पर बैठ कर वह उस जोड़े को देखने लगी. आवाज मोहित की ही थी. उसे अपनी तरफ देखते हुए व्योमबाला ने मोहित से कहा, ‘‘आप के पीछे की मेज पर बैठी लड़की आप को देख रही है.’’ इस पर मोहित चौंका, व्योमबाला से बातों में मग्न हो कर वह सुमिता के साथ अपने फिक्स्ड प्रोग्राम को तो भूल ही गया था. वह फुरती से उठा और मुड़ कर सुमिता के समीप पहुंचा.

‘‘हैलो डियर, हाऊ आर यू?’’ मोहित के इस बदले रूप को देख कर सुमिता चौंकी. साथ में एक खूबसूरत लड़की भी थी. ऐसी स्थिति की उस ने कल्पना भी नहीं की थी.

मोहित ने उस की बांह थामी और प्यार से खींचता हुआ उसे व्योमबाला के समीप ले आया. ‘‘इन से मिलिए, ये आप की हमनाम हैं, इन का नाम सुमिता वालिया है और ये एयरहोस्टेस हैं.’’

उन दोनों ने एकदूसरे से हाथ मिलाया. व्योमाबाला के स्पर्श में गर्मजोशी थी क्योंकि उस को मोहित ने कौल सैंटर वाली सुमिता के बारे में बता रखा था. वहां कौल सैंटर वाली सुमिता का स्पर्श ठंडा था. वह बड़े असमंजस में थी. ‘‘पिछले महीने जब मैं स्विट्जरलैंड भ्रमण पर गया था तब इन से मुलाकात हुई थी. मैं ने आप के बारे में तो इन्हें बता दिया था लेकिन इन के बारे में आप को बताना भूल गया था.’’

सुमिता के माथे पर बना तनाव का घेरा थोड़ा ढीला पड़ा. ठंडे और हलके ड्रिंक्स का दौर फिर से शुरू हुआ. तभी डांस फ्लोर पर डांस का पहला दौर शुरू हुआ.

‘‘लैट अस हैव ए राउंड,’’ व्योमबाला ने मोहित की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा. मोहित उठा और उस के साथ डांस फ्लोर की तरफ बढ़ गया. एयरहोस्टेस दुनियाभर में घूमती थी. अनेक देशों में ठहरने के दौरान एंटरटेनमैंट के लिए डांस करना, ऐंजौय करना, उस के लिए सहज था.

वह रिदम मिला कर दक्षता से डांस कर रही थी. सुमिता के साथ मोहित भी अनेक बार डांस फ्लोर पर थिरक चुका था. मगर एयरहोस्टेस सुमिता के साथ बात कुछ और ही थी. पहला दौर समाप्त हुआ. रैस्ट करने और हलके ड्रिंक्स के बाद नया दौर शुरू हुआ. इस बार कौल सैंटर वाली सुमिता का साथ था.

आज वह विशेष तौर पर सजधज कर नए उत्साह के साथ प्रपोजल ले कर आई थी. मगर खीर में मक्खी पड़ जाने के समान एयरहोस्टेस आ टपकी थी. वह उसी के समान सुंदर थी और उस से कहीं ज्यादा ऐक्टिव थी. मोहित हमेशा कैजुअल वियर में ही आता था, लेकिन आज वह बनठन कर सुमिता को अपनी बांहों में ले कर उस के वक्षस्थल को भींच लेता था. सुमिता भी उस का मजा लेती थी.

मगर आज दोनों में वह बेबाकी नहीं थी. दोनों आज किसी प्रोफैशनल डांसर जोड़े की तरह नाच रहे थे, जिन का मकसद किसी तरह इस राउंड को पूरा करना था, न कि अपना और अपने साथी का मनोरंजन करना. डांस के बाद खाना खाया गया. वे

दोनों अपनीअपनी शिकायतों के साथ मोहित को विश करतीं ऊपर से मुसकराती हुई विदा हुईं.

इस बात का मोहित को भी पछतावा हुआ कि क्यों उस ने उन दोनों को एकसाथ यहां बुलाया. उसे दोनों में से किसी एक को टाल देना चाहिए था, या फिर दोनों को ही टाल देना चाहिए था. मगर अब जो होना था हो चुका था. अगले कई दिन तक उन दोनों में से किसी का भी फोन नहीं आया. मोहित फिर से अपने चित्रों, ग्राफिक्स व डिजाइनों में डूब गया.

एक शाम उसे किसी विज्ञापन कंपनी से फोन आया. कंपनी की डायरैक्टर उस से एक सौंदर्य प्रसाधन कंपनी के लिए नए डिजाइनों पर आधारित विज्ञापन शृंखला के लिए विचारविमर्श करना चाहती थी. मोहित नियत समय पर कंपनी औफिस पहुंचा. विज्ञापन कंपनी की डायरैक्टर के औफिस के बाहर नेमप्लेट थी ‘सुमिता मुदगल’ विज्ञापन डायरैक्टर.

मोहित मुसकराया. 2-2 सुमिताओं के बाद तीसरी सुमिता मिल रही थी. उस का कार्ड देखने के बाद बाहर बैठा औफिस बौय उस को तुरंत अंदर ले गया. औफिस काफी भव्य और सुरुचिपूर्ण था. कीमती लकड़ी की मेज के साथ रिवौल्विंग चेयर पर दमकते चेहरे वाली बौबकट युवती टौप और पैंट पहने बैठी थी.

उस ने उठ कर गर्मजोशी से हाथ मिलाया. ‘‘प्लीज बैठिए, मिस्टर मोहित, आप का सरनेम क्या है?’’

‘‘मेहता, माई नेम इज मोहित मेहता.’’ ‘‘आप के बनाए डिजाइन काफी आकर्षक और लीक से हट कर होते हैं.’’

‘‘तारीफ के लिए शुक्रिया.’’ ‘‘हमारे पास एक मल्टीनैशनल कंपनी का बड़ा और्डर आया है, आप से इसी सिलसिले में बात करनी है.’’

इस के बाद लंबी बातचीत हुई. अपनी नोटबुक में जरूरी निर्देश नोट कर मोहित चला आया. इस के बाद डिजाइन दिखाने, डिसकस करने का सिलसिला चल पड़ा. कई बार सुमिता मुदगल उस के कार्यस्थल पर भी आई. मोहित पहले की तरह ही बेतरतीब ढंग से कपड़े पहनता, कभी तो कईकई दिन तक शेव नहीं करता. उस का यही खिलंदड़ापन अब तीसरी सुमिता को भी भा गया. वह भी अब बारबार आने लगी. मोहित भी शाम को उस के साथ घूमने लगा.

इस दौरान पहले वाली सुमिता और व्योमबाला का फोन भी नहीं आया. दोनों उस से नाराज हो गई थीं. मगर दोनों की नाराजगी ज्यादा दिन नहीं रही. दोनों का गुस्सा धीरेधीरे कम हुआ और दोनों यह सोचने लगीं कि क्या मोहित धोखेबाज था? नहीं ऐसा नहीं था. यह तो एक संयोग ही था कि 2-2 हमनाम लड़कियां उस से टकरा गई थीं या उसे मिल गई थीं. एक ही दिन, एक ही स्थान पर मुलाकात होना संयोग था.

अगर मोहित धोखेबाज होता तो उन्हें एक ही स्थान पर नहीं बुलाता. पहले कौल सैंटर वाली सुमिता का फोन आया. पहले तो मोहित चौंका, फिर मुसकराया और खिल उठा.

‘‘अरे, इतने दिन बाद आप ने कैसे याद किया?’’ ‘‘आप ने भी तो फोन नहीं किया.’’

‘‘मैं ने सोचा आप नाराज हैं.’’ ‘‘किस बात से?’’

अब मोहित क्या कहता. उस के बिना कहे भी सुमिता सब समझ गई. ‘‘आज शाम का क्या प्रोग्राम है?’’

‘‘जो आप चाहें.’’ ‘‘किसी और के साथ कुछ फिक्स्ड तो नहीं है?’’

इस पर मोहित खिलखिला कर हंस पड़ा. ‘‘उस दिन तो संयोग मात्र ही था.’’

‘‘ओके, फिर सेम जगह और सेम टाइम.’’ अभी फोन रखा ही था कि व्योमबाला का फोन आ गया.

‘‘अरे, स्वीटहार्ट, आज आप ने कैसे याद किया.’’ ‘‘आप ने मुझे स्वीटहार्ट कहा, मैं तो सोचती थी कि आप की स्वीटहार्ट तो वह है,’’ व्योमबाला चहकी.

‘‘वह तो है ही, आप भी तो हो.’’ ‘‘एकसाथ 2-2 स्वीट्स होने से आप को शुगर की प्रौब्लम हो सकती है.’’

व्योमबाला के इस शिष्ट मजाक पर मोहित खिलखिला कर हंस पड़ा. ‘‘आज का क्या प्रोग्राम है?’’

‘‘पहले से ही फिक्स्ड है.’’ ‘‘अरे, मैं तो सोचती थी शायद आज आप की शाम खाली होगी.’’

‘‘उस ने भी उस दिन के बाद आज ही फोन किया है.’’ ‘‘क्या बात है, क्या उस से झगड़ा हो गया था?’’

‘‘नहीं वह उस दिन से ही नाराज हो गई और आज उस का गुस्सा कम हुआ तो उस ने फोन किया. आज उसी जगह मिलना है.’’ ‘‘ओह, तब तो आप की शामें इतने दिन तक बेरौनक रही होंगी,’’ व्योमबाला के स्वर में तलखी भरी थी.

मोहित खिलखिला कर हंस पड़ा. वह बताने लगा कि इस दौरान तीसरी सुमिता से उस की दोस्ती हो गई थी और कोई शाम बेरौनक नहीं रही. ‘‘ओके, आज शाम पहली नंबर की रही मैं फिर फोन करूंगी.’’

रैस्टोरैंट में तनहा कोने वाली मेज पर मोमबत्ती स्टैंड पर लगी मोमबत्तियों

का प्रकाश माहौल को बेहद रोमानी बना रहा था.

सुमिता सफेद झालरों और हलके सितारे टंगे सफेद सूट में बहुत दिलकश लग रही थी. मोहित भी मैच करती टीशर्ट और ट्राउजर में था. उस के गले में सोने की मोटी चेन थी. आज वह बेहद स्मार्ट लग रहा था. आज डांस फ्लोर पर दोनों काफी करीब थे. दोनों चाहेअनचाहे कहीं भी किसी के शरीर को स्पर्श हो जाने पर दूरी बनाए रखने की कोई सावधानी नहीं थी. सुमिता इस बात से निश्चिंत थी कि आज मोहित उस का था और उस की नजरें किसी व्योमबाला या किसी और के लिए नहीं भटक रही थीं.

डांस के बाद हलका ड्रिंक और फिर लजीज खाने का दौर शुरू हुआ. फिर शहर के एक तरफ स्थित पार्क में घूम कर दोनों राजीखुशी विदा हुए. 2-3 दिन बीत गए. मोहित काम में व्यस्त था. तभी मोबाइल की घंटी बजी. स्क्रीन पर नजर डाली तो फोन विज्ञापन कंपनी वाली सुमिता का था.

‘‘अरे, सुमिताजी नमस्ते.’’ ‘‘बहुत बिजी रहते हैं आप. जब भी फोन करो स्विच औफ मिलता है. कम से कम शाम को तो फोन औन रखा करो?’’ सुमिता मुदगल के स्वभाव में प्यार भरी शिकायत थी.

अब मोहित क्या कहता. शाम को तो वह बिना काम के ही बिजी रहता है. आखिर 2-2 उस के लिए लालायित थीं, लेकिन अब तो तीसरी भी आ गई थी. ‘‘क्या हुआ? क्या सो गए आप?’’

‘‘नहींनहीं, जरा काम में लगा था.’’ ‘‘आज शाम आउटिंग के लिए आ सकते हैं?’’

‘‘नहीं, आज बिजी हूं.’’ ‘‘कल?’’

‘‘देखेंगे.’’ आज की शाम तो व्योमबाला के साथ थी. व्योमबाला हलके मैरून कलर की साड़ीब्लाउज में अपने गौरवर्ण के कारण बला की हसीन लग रही थी. मोहित भी क्रीम कलर के सफारी सूट में जंच रहा था.

व्योमबाला के साथ डांस अलग अंदाज और हलका जोशीला था. कौल सैंटर वाली सुमिता अगर खिला गुलाब थी, तो व्योमबाला महकता हुआ जूही का फूल थी. मोमबत्तियों के रोमांटिक प्रकाश में खानापीना हुआ, फिर बोट क्लब पर बोटिंग. दोनों विदा हुए. इस दौरान पहली सुमिता का कोई जिक्र नहीं हुआ. उस के साथ बीती शाम अच्छी थी. यह शाम भी अच्छी रही. तीसरी सुमिता का जिक्र मोहित ने जानबूझ कर नहीं किया.

3 दिन बाद तीसरी सुमिता के साथ डेट थी. संयोग से उसे भी वही रैस्टोरैंट पसंद था. आज मोहित फिर से कैजुअल वियर में था. उस को आभास हो चला था कि तीसरी सुमिता भी पहली सुमिता की तरह उसे बेतरतीब और कैजुअल पहनावे में पसंद करती थी. उसे वह एक चित्रकार, एक कलाकार या दार्शनिक दिखने वाले रूप में ज्यादा पसंद था. ‘‘आप बैठो, मैं जरा टौयलेट हो आऊं.’’

टौयलेट से बाहर आते ही उस के कानों में 2 व्यक्तियों की बातचीत के अंश पड़े. ‘‘यह लड़का तगड़ा चक्करबाज है, 3-3 हसीनाओं से एकसाथ चक्कर चलाता है.’’

यह जुमला सुन कर मोहित पर जैसे घड़ों पानी पड़ गया. उस ने तब तक कभी इस पहलू पर सोचा भी न था कि उस के बारे में देखने वाले खासकर उस से परिचित या उस को पहचानने वाले क्या सोचते थे. ‘‘आप को क्या हुआ? आप का चेहरा एकदम उतर गया है?’’ उस के चेहरे पर छाई गंभीरता को देख कर सुमिता ने पूछा.

‘‘कुछ नहीं, मैं अकस्मात किसी ग्राफिक्स के बारे में विचार कर रहा था.’’ ‘‘अरे, छोड़ो न. हर समय प्रोफैशन के बारे में नहीं सोचना चाहिए. शाम को ऐंजौय करो.’’

वह शाम भी अच्छी गुजरी. मगर अगले दिन मोहित गंभीर था. अब से उस ने कभी अपने कार्यस्थल पर काम करने वाले स्टाफ के चेहरे के भावों पर गौर नहीं किया था. मगर अब उसे महसूस हो रहा था कि उस की छवि उन की नजरों में पहले जैसी नहीं रही जब से 3-3 सुंदरियों के साथ शाम बिताने का सिलसिला चला था.

अगले 3 दिन में तीनों सुमिताओं का फोन आया. मगर उस ने मोबाइल की स्क्रीन पर नजर डाल कर फोन अटैंड नहीं किया. सभी कौलें मिस्ड कौल्स में दर्ज हो गईं. एक सप्ताह तक मिस्ड कौल्स का सिलसिला चलता रहा लेकिन वह अपने काम में व्यस्त रहा. आखिर कौल सैंटर वाली सुमिता से रहा न गया और वह उस के औफिस आ गई.

‘‘क्या बात है, फोन अटैंड क्यों नहीं करते?’’ ‘‘कुछ काम कर रहा हूं.’’

‘‘आज शाम खाली हो?’’ ‘‘नहीं.’’

‘‘कल?’’ ‘‘देखेंगे.’’

उस के स्वर में तटस्थता और उत्साहहीनता को महसूस कर सुमिता चुपचाप चली गई. इस के बाद बारीबारी से व्योमबाला और विज्ञापन कंपनी की डायरैक्टर का आना भी हुआ. मगर मोहित ने उन को भी टाल दिया. उस के ऐसा करने से तीनों देवियों की उत्कंठा और बढ़ी. पहले तो सभी उस के मर्यादित संयमित व्यवहार से प्रभावित थीं अब शाम की डेट टालने से उन की बेकरारी और बढ़ी.

दोनों सुमिताओं ने समझा कि वह उसे नहीं दूसरी को ज्यादा पसंद करता है. मगर तीसरी को पहली दोनों देवियों का पता नहीं था. इसलिए वह असमंजस में थी. मोहित अब सोच में पड़ गया था किसी चक्करबाज या रसिक के समान 3-3 सुंदरियों के साथ घूमनाफिरना, खानापीना उस के व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं था. उसे किसी एक को पसंद कर के उस से विवाह कर लेना चाहिए. वह इस पर विचार करने लगा किसे चुने.

तीनों ही सुंदर थीं, वैल सैटल्ड थीं. अच्छे परिवार से थीं. जातपांत का आजकल कोई मतलब नहीं था. उस के साथ तीनों जंचती थीं. तीनों का स्वभाव भी उस के अनुरूप था.

उधर वे तीनों उस से स्पष्ट बात कर विवाह संबंधी फैसला करना चाहती थीं. पहली 2 इस पसोपेश में थीं कि मोहित की पहली पसंद कौन थी? इतने दिन तक डेट के लिए मना करने से उन को गलतफहमी होनी ही थी. दोनों चुपचाप बीचबीच में रैस्टोरैंट का चक्कर भी लगा आईं कि शायद मोहित पहली या दूसरी सुमिता के साथ आया हो. मगर वह नहीं दिखा.

कौल सैंटर वाली सुमिता के ‘वेटर’ ने भी पुष्टि की कि वह नहीं आया था. अब उन का विचार यही बना कि वह काम में ज्यादा व्यस्त था. मोहित को भी स्पष्ट आभास था कि तीनों उस से विवाह करना चाहती हैं मगर वे तीनों ही उस से इस संबंध में पहल करने की अपेक्षा कर रही थीं.

अब उस ने तीनों में से किसी एक को चुनना था और उसे प्रपोज करना था. इस के लिए क्या करे? कैसे किसी एक का चुनाव करे. तीनों ही सुंदर थीं. अच्छे परिवारों से थी. चरित्रवान थीं. किसी के भी व्यवहार में हलकापन नहीं था. ‘‘मिस्टर मोहित, मैं सुमिता मुदगल बोल रही हूं. आज शाम का क्या प्रोग्राम है?’’ विज्ञापन डायरैक्टर का फोन था.

‘‘आज शाम खाली हैं आप. बोट क्लब आ जाएं?’’ काफी दिन से बाहर नहीं निकला. इसलिए मोहित भी शाम को ऐंजौय करना चाहता था. ‘‘बोट क्लब क्यों? रैस्टोरैंट क्यों नहीं?’’

‘‘आज खानेपीने से ज्यादा घूमने की इच्छा है.’’ ‘‘ओके.’’

पैडल औपरेटेड बोट झील में हलकेहलके शांत पानी में धीमेधीमे चल रही थी. झील के बीचोंबीच बोट रोक कर दोनों ने एकदूसरे की आंखों में झांका. ‘‘मैं आप से कुछ बात करना चाहती हूं.’’

‘‘किस बारे में,’’ अनजान बनते हुए मोहित बोला. ‘‘आप का विवाह के बारे में क्या खयाल है?

‘‘आप मुझ से विवाह करना चाहती हैं?’’ ‘‘जी हां,’’ सुमिता मुदगल ने स्पष्ट कहा.

‘‘अभी हमें मुलाकात किए मात्र 2 महीने हुए हैं इतनी जल्दी फैसला करना ठीक नहीं है.’’ ‘‘आप कितना समय चाहते हैं, फैसला करने के लिए?’’

‘‘कुछ कह नहीं सकता.’’ ‘‘आप चाहें तो फैसला लेने से पहले एकदूसरे को समझने के लिए ‘लिव इन’ के तौर पर साथसाथ रह सकते हैं. वैसे भी आजकल इसी का चलन है.’’ विज्ञापन डायरैक्टर ने गहरी नजरों से उस की तरफ देखते हुए कहा.

मोहित भी गहरी नजरों से उस की तरफ देखने लगा. विज्ञापन डायरैक्टर अच्छी समझदार थी. उस का सुझाव आजकल के नए दौर के हिसाब से था. ‘‘मैं सोचूंगा इस बारे में. अब हम थोड़ी देर बोटिंग कर के खाना खाने चलते हैं.’’

सही फैसले तक पहुंचने के लिए मोहित को एक सूत्र मिल गया था. वह यही था कि विवाह के संबंध में तीनों क्या विचार रखती थीं. अगले रोज उस ने शाम से पहले कौल सैंटर फोन किया.

‘‘अरे, आप ने आज कैसे याद किया,’’ सुमिता ने तनिक हैरानी से कहा. ‘‘इतने दिन व्यस्त रहा. आज काम की थकान शाम को सैर कर के दूर करने का इरादा है.’’

‘‘ओके, फिर सेम प्लेस एट सेम टाइम.’’ ‘‘नोनो, रैस्टोरैंट नहीं नैशनल पार्क.’’

‘‘ओके.’’ नैशनल पार्क काफी एरिया में

फैला हुआ था. एक आइसक्रीम पार्लर से आइसक्रीम के 2 कप ले दोनों टहलतेटहलते आगे निकल गए. जहांतहां झाडि़यों व पेड़ों के पीछे नौजवान जोड़े रोमांस कर रहे थे. कई बरसात का मौसम न होने पर भी रंगबिरंगे छाते लाए थे और उन को फैला कर उन की ओट में एकदूसरे से लिपटे हुए थे.

इस रोमानी माहौल को देख कर हम दोनों ही सकपका गए. तन्हाई्र पाने के इरादे से दोनों जल्दीजल्दी आगे बढ़ गए. एक तरफ कृत्रिम पहाड़ी बनाई गई थी. दोनों उस पर चढ़ गए. एक बड़े पत्थर पर बैठ कर दोनों ने एकदूसरे की तरफ देखा. ‘‘मैं आप से कुछ बात करना चाहता था.’’

‘‘किस बारे में?’’ ‘‘आप का शादी के बारे में क्या विचार है?’’

मोहित के इस सीधे सपाट सवाल पर सुमिता चौंक पड़ी और फिर मुसकराई. ‘‘विवाह जीवन का जरूरी कदम है. एक जरूरी संस्कार है.’’

‘‘और लिव इन रिलेशनशिप?’’ ‘‘इस का आजकल फैशन है. यह पश्चिम से आया रिवाज है. वहां इस के दुष्परिणामों के कारण इस का चलन अब घट रहा है.’’

‘‘आप विवाह को अच्छा समझती हैं या लिव इन को?’’ ‘‘मेरा तो लिव इन में बिलकुल भी विश्वास नहीं है.’’

‘‘और अगर विवाह सफल न रहे तो?’’ ‘‘ऐसा तो लिव इन में भी हो सकता है.’’

‘‘मगर लिव इन में संबंध विच्छेद आसान होता है.’’ ‘‘अगर संबंध विच्छेद का विचार पहले से ही मन में हो तो विवाह नहीं करना चाहिए और न ही लिव इन में रहना चाहिए.’’

सुमिता के इस सुलझे विचार से मोहित उस का कायल हो गया और प्रशंसात्मक नजरों से उस की तरफ देखने लगा. वह शाम भी काफी अच्छी बीती. 2 दिन बाद मोहित ने व्योमबाला को फोन किया. उस के साथ रैस्टोरैंट में मुलाकात तय हुई. व्योमबाला बिंदास और शोख अंदाज में नए फैशन के सलवारसूट में आई.

हलके ड्रिंक और डांस के 2-2 दौर चले. खाने का दौर शुरू हुआ. ‘‘मिस वालिया, आप का विवाह के बारे में क्या विचार है,’’ मोहित ने सीधे सवाल दागा.

‘‘मैरिज लाइफ के लिए जरूरी है. सोशल तौर पर भी और फिजिकली भी.’’ ‘‘और लिव इन…’’

‘‘वह भी ठीक है. बात तो आपस में निभाने की है. निभ जाए तो विवाह भी ठीक है लिव इन भी ठीक है. न निभे तो दोनों ही व्यर्थ हैं.’’ ‘‘आप किस को ठीक समझती हैं?’’

‘‘मैं तो लाइफ को ऐंजौय करना अच्छा समझती हूं. निभ जाए तो ठीक नहीं तो और सही. मगर घुटघुट कर जीना भी क्या जीना,’’ व्योमबाला दुनियाभर में घूमती थी. रोजाना सैकड़ों लोगों से उस की मुलाकात होती थी. उस का नजरिया काफी खुला और बिंदास था. वह शाम भी काफी शोख और खुशगवार रही. तीनों सुमिताओं की प्रकृति और सोच मोहित के सामने थी. पहली का लिव इन में विश्वास नहीं था.

दूसरी बिंदास थी, शोख थी, लाइफ ऐंजौय करना उस का मुख्य विचार था. ऐसी औरत या युवती बेहतर जीवनसाथी या बेहतर लिव इन साथी मिलने पर पुराने साथी को छोड़ सकती थी. तीसरी विज्ञापन डायरैक्टर काफी व्यावहारिक थी. उस का नजरिया विवाह के बारे में भी व्यावसायिक था. पहले लिव इन सफल रहा तो फिर विवाह. नहीं तो आप अपने रास्ते मैं अपने रास्ते.

मोहित एक चित्रकार था. कलाकार था. दार्शनिक विचारधारा वाला था. उस को अपना सही जीवन साथी समझ आ गया था. उस ने कौल सैंटर फोन किया.

‘‘अरे, अभी परसों ही तो मिले थे.’’ ‘‘आज मैं ने आप से एक खास बात करनी है.’’

वह तैयार हुआ. कैजुअल वियर की जगह वह शानदार ईवनिंग सूट में था. एक मित्र ज्वैलर्स के यहां से कीमती हीरे की अंगूठी खरीदी और रैस्टोरैंट की पसंदीदा मेज पर बैठ कर अपनी भावी जीवनसंगिनी का इंतजार करने लगा.

ये हैं दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज, जिनकी बौलिंग से डरते थे बल्लेबाज

क्रिकेट के इतिहास को देखा जाए तो ये पता चलता है कि इस खेल में हमेशा से बल्लेबाजों का बोल बोला रहा है. लेकिन इस बीच कई तेज गेंदबाज भी आए, जिन्होंने इस खेल में अपनी धारदार गेंदबाजी से सभी बल्लेबाजों को दहशत में डाला. आइए जानते हैं उन गेंदबाजों के बारे में.

शोएब अख्तर (161.3 किलोमीटर प्रति घंटा)

विश्व क्रिकेट इतिहास में सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकौर्ड पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर के नाम है. विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 2003 में न्यूजीलैंड में हुए मैच में शोएब अख्तर ने ये गेंद फेंकी थी, जिसे दुनिया की सबसे तेज गेंद माना जाता है. उनके सामने बल्लेबाज थे निक नाइट.

इसी के साथ शोएब अख्तर आईसीसी के अंतर्राष्ट्रीय मैच में पहले गेंदबाज बन गए जिसने 100 मील प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी की. इंटरनेशन वनडे में शोएब अख्तर ने 163 मैचों में कुल 247 विकेट लिए थे.

ब्रेट ली (161.1 किलोमीटर प्रति घंटा)

औस्ट्रेलिया गेंदबाज ब्रेट ली ने साल 2005 में नेपियर में हुए मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ ये गेंद फेंकी. इस गेंद के साथ ही शोएब अख्तर के बाद वो ऐसे दूसरे गेंदबाज बन गए, जिसने आईसीसी के मैच में 100 मील प्रति घंटा के रफ्तार से गेंदबाजी की. अपने करियर के दौरान ब्रेट ली ने 221 अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में कुल 380 विकेट लिए.

शौन टेट (161.1 किलोमीटर प्रति घंटा)

औस्ट्रेलिया के शौन टेट ने साल 2010 में लौर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में इंग्लैंड के खिलाफ ये गेंद फेंकी थी. इससे पहले टेट पाकिस्तान के खिलाफ 160.7 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंद फेंक चुके थे. शौन टेट अपने देश के लिए ज्यादा नहीं खेल सके. उन्होंने केवल 35 अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैचों खेले और 62 विकेट लिए.

जेफरी थौम्पसन (160.6 किलोमीटर प्रति घंटा)

जेफरी थौम्पसन को दुनिया के सर्वकालिक सबसे तेज गेंदबाजों में शुमार किया जाता है. जेफरी के क्रिकेट करियर के दौरान गेंदबाजों की स्पीड मापने की आधुनिक मशीनें नहीं थी. इसिलए उनके रिकौर्ड को लेकर अक्सर विवाद रहता है. 1976 में गेंदबाजी की रफ्तार से जुड़े एक अध्ययन के दौरान नेट पर गेंदबाजी करते हुए जेफरी ने 160.6 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से गेंद फेंकी थी.

जेफरी के कुछ समकालीन दावा करते हैं कि उनकी गेंदें शोएब अख्तर या ब्रेट ली से तेज होती थीं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि शायद ही कभी हो सके. जेफरी थौम्पसन ने 51 टेस्ट मैचों में कुल 200 विकेट लिए. वहीं 50 वनडे मैचों में उन्होंने 55 विकेट लिए.

एंडी रौबर्ट्स (159.5 किलोमीटर प्रति घंटा)

वेस्टइंडीज के विश्व विख्यात तेज गेंदबाजों में शामिल एंडी रौबर्ट्स ने 1975 में डब्ल्यूएसीए में हुए मैच में औस्ट्रेलिया के खिलाफ ये गेंद फेंकी थी. एंडी रौबर्ट्स ने उस जमाने में गेंदबाज की जब टेस्ट क्रिकेट को बोलबाला था. उन्होंने 47 टेस्ट मैचों में 202 विकेट लिए. वहीं 56 वनडे मैचों में 87 विकेट. रौबर्ट्स को क्रिकेट इतिहास के सबसे मारक और श्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शुमार किया जाता है.

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