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कभी कैरेबियाई गेंदबाजों से खौफ खाते थे विराट कोहली!

अपनी बेहतरीन और बेखौफ बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों की नींद उड़ाने वाले विराट कोहली अपने करियर की शुरुआत में वेस्टइंडीज के एक तेज गेंदबाज से बेहद खौफ खाने लग गए थे और उन्हें यहां तक लगने लग गया था कि उनका टेस्ट करियर शुरू में ही खत्म हो जाएगा.

विराट ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत वेस्टइंडीज में की थी और तीन टेस्ट मैचों में वह केवल 76 रन बना पाए थे. अपनी पहली चार टेस्ट पारियों में से तीन में फिडेल एडवर्ड्स ने उन्हें पविलियन की राह दिखाई थी. विराट कोहली ने अपने करीबी लोगों के सामने माना था कि उन्हें एडवर्ड्स की गेंद को ‘पिक’ करने में दिक्कत हो रही है.

शुरुआत में थे शरारती

भारतीय टीम की कमान संभालने के बाद अपने व्यवहार में बदलाव करने वाले विराट अपने करियर की शुरुआत में बेहद शरारती थे. एक बार उन्होंने दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में अपने नए मोबाइल के एक ‘एप’ की मदद से टीवी का ‘वौल्यूम’ कम और ज्यादा करके वहां मौजूद लोगों और होटेल स्टाफ को परेशानी में डाल दिया था. यह बताया है खेल पत्रकार शिवेंद्र कुमार ने अपनी किताब ‘क्रिकेट के अनसुने किस्से’ में.

सचिन ने दी थी धमकी

सचिन तेंडुलकर से भी जुड़े कई किस्सों का इस किताब में जिक्र है. एक बार वेस्टइंडीज दौरे में तेंडुलकर को ‘वौटर स्पोर्ट्स’ खेलने की इच्छा नहीं थी, लेकिन जब उनकी पत्नी अंजलि जिद करने लगी तो उन्होंने गुस्से में उन्हें कुछ इस तरह से क्रिकेटिया धमकी दे डाली थी, ‘अब अगर उन्होंने एक भी बार वौटर स्पोर्ट्स के लिए जाने को कहा तो वो उन्हें एलेन डोनाल्ड के सामने बगैर पैड पहने बल्लेबाजी करने के लिए भेंज देंगे.’

बैंक या पोस्ट औफिस : जानिए कहां है आपका पैसा ज्यादा सुरक्षित

आपको पैसा जमा करना है तो आप दो ही जगहों पर जाएंगे, बैंक या पोस्ट औफिस. इन जगहों पर लोगों का पैसा सुरक्षित रहता है और लोग भी चिंता मुक्त रहते हैं. अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने बैंक में जमा पैसे से जुड़े एक सवाल पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. न्यायालय ने केंद्र से पूछा कि अगर कोई बैंक विफल हो जाता है तो ऐसी स्थिति में उन ग्राहकों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय हैं. लोग अक्सर इस बात का जवाब तलाशते हैं कि उनका पैसा कहां ज्यादा सुरक्षित है, बैंक में या पोस्ट औफिस में? हम आपके इस सवाल का जवाब.

पोस्ट औफिस में कितना सुरक्षित है आपका पैसा

गांवों में पैसों को जमा करने के लिए लोग बैंक से ज्यादा भरोसा पोस्ट औफिस पर करते हैं. एक तरह से देखें तो गांव में लोग पोस्ट औफिस को पैसा जमा करने का एक पारंपरिक जरिया मानते हैं. कारण है उसकी पहुंच और इतने सालों से उसपर लोगों का भरोसा. आपने बैंको के दिवालियापन के बारे में हजारों कहानियां पढ़ी होंगी पर ये कभी नहीं सुना होगा कि किसी पोस्ट औफिस ने खुद को दिवालिया घोषित किया है. दरअसल पोस्ट औफिस में जमा एक एक पैसे की गारंटी सरकार लेती है. इसे सौवरेन गारंटी भी कहते हैं. इसका मतलब ये है कि अगर पोस्ट औफिस किसी ग्राहक का पैसा चुका पाने में असमर्थ है तो सरकार उस पैसों की गारंटी लेती है. यही कारण है कि पोस्ट औफिस में आपका पैसा हमेशा सुरक्षित रहता है.

बैंको में कितना सुरक्षित है आपका पैसा

बैंको में जमा एक लाख रूपये की गारंटी सरकार लेती है. इसके बाद के पैसों पर पर सरकार किसी भी तरह की सुरक्षा नहीं देती. डिपौजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कौरपोरेशन (DICGC) बैंक में जमा पैसों पर सिर्फ एक लाख रुपये की गारंटी देता है और यही नियम सभी बैंको के लिए लागू होता है. इस राशि में मूल धन और ब्याज भी शामिल है. इसका मतलब ये है कि अगर आपके खाते में 10 लाख रूपये हैं तो उसमें सिर्फ 1 लाख रूपये पर सरकारी सुरक्षा मिलती है. बाकि राशि पर कोई सुरक्षा नहीं है. ऐसे में अगर बैंक डिफाल्टर घोषित होता है तो आपके 9 लाख रूपये का कोई माई बाप नहीं है.

अगर आपका एक बैंक की कई ब्रांच में अकाउंट हैं और उनमें भी अलग अलग रकम जमा है तो भी आपका केवल एक लाख रुपये सुरक्षित माना जाएगा. वहीं अगर अलग अलग बैंकों में अकाउंट है तो हर बैंक में आपका एक लाख रुपये सुरक्षित होगा.

क्यों नहीं लेती सरकार बैंक में जमा पूरे पैसों की गारंटी

आप यह सोच रहे होंगे की बैंक में सिर्फ एक लाख की गारंटी और पोस्ट औफिस के पूरे पैसे की गारंटी क्यों है? असल में सरकार पोस्ट औफिस में जमा पैसों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के लिए भी करती है. इसलिए इन पैसे पर गारंटी सरकार देती है. वहीं बैंकों में जमा पैसा सरकार इस्तेमाल नहीं करती. इस पैसे को बैंक अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए प्रयोग करते हैं. इन्हीं पैसों से आम लोगों या कौरपोरेट को लोन दिया जाता है.

गूगल प्ले-स्टोर पर आया वायरस, ऐसे पहचानें

हम सभी इस बात से भली भाती वाकिफ हैं कि एंड्रायड फोन में सिक्योरिटी को लेकर हमेशा ही खतरा बना रहता है. शोधकर्ताओं ने एक नए तरीके के एंड्रायड टार्जन (वायरस) का पता लगाया है जिसमें कई सारे फीचर्स हैं और उसका नाम ‘GPlayed’ है. इस वायरस वाले ऐप में कुछ ऐसे फीचर्स हैं जो हैकर्स के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं. इस ऐप को लेकर लोग धोखे में हैं, क्योंकि इसका आईकन गूगल प्ले-स्टोर जैसा ही है और यह गूगल प्ले मार्केटप्लेस में है. Cisco Talo के शोधकर्ताओं का कहना है यह बहुत ही शक्तिशाली वायरस है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि GPlayed नाम का यह वायरस बैंकिग वायरस जैसा ही है. ऐसे में यह वायरस आपके बैंक से जुड़ी जानकारियों पर सबसे पहले अटैक करता है और पिन व पासवर्ड हैकर्स तक पहुंचाता है. यह आपके स्मार्टफोन की लोकेशन को भी ट्रैक करता है. गौर करने वाली बात यह है कि यह वायरस डेस्कटाप से आपके फोन में आसानी से आ सकता है. इस वायरस को .NET में लिखा गया है. इस वायरस के जरिए हैकर्स आपके फोन में रिमोट कंट्रोल के जरिए अन्य ऐप्स और प्लगइन इंस्टाल कर सकते हैं. ऐसे में सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में इस ऐप को सर्च करें और कोई भी ऐप डाउनलोड करते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसके साथ कोई अन्य भी तो डाउनलोड नहीं हो रहा है, क्योंकि इस ऐप का आईकन गूगल प्ले-स्टोर जैसा ही जिससे आप धोखा खा सकते हैं.

सावधान : पेट्रोल पंप पर चोरी हो रही है डेबिट कार्ड की डीटेल

पहले भी कईबार एटीएम सेंटरों से डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के डीटेल चोरी होने के कई मामले सामने आते रहे हैं. लेकिन इसबार पेट्रोल पंपों पर भी ग्राहकों के कार्ड की डीटेल चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मुंबई क्राइम ब्रांच के प्रोपर्टी सेल ने दो दिन पहले इस केस में देश के अलग-अलग शहरों से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें से कोलावोले हकीम उर्फ आदीगुन नामक एक नाइजीरियन भी है.

सीनियर इंस्पेक्टर सुनील बाजारे और लक्ष्मीकांत सालुंके की टीम ने इन आरोपियों के पास से 10 मोबाइल, 97 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, एक स्कीमर मशीन, एक मिनी डेटा कलेक्टर मशीन के अलावा चार लैपटौप भी जब्त किए हैं. इन लैपटौप में हजार से ज्यादा डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड की डीटेल के साथ उनके पिन नंबर भी लिखे हुए थे. ये पिन नंबर और कार्ड्स की अन्य जानकारी उन्हें महाराष्ट्र के कुछ अलग-अलग पेट्रोल पंपों के कुछ कर्मचारियों से मिली थी.

क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, पेट्रोल या डीजल भरवाने के बाद कई लोग कार्ड्स से पेमेंट करते हैं. अक्सर कार मालिक कार में बैठे-बैठे अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड पेट्रोल/ डीजल भरने वाले को दे देता है. ठगी के इस रैकेट से जुड़े पेट्रोल पंप कर्मचारी के पास दो स्वाइप मशीनें होती हैं. एक मशीन किसी बैंक की होती है, जबकि दूसरी बहुत छोटी मशीन होती है. इसी छोटी मशीन में पेट्रोल पंप कर्मचारी थोड़ा पीछे जाकर कार्ड क्लोन कर लेता है. फिर वह मूल मशीन में दोबारा कार्ड स्वाइप करता है और फिर कार मालिक के पास स्वाइप मशीन लेकर उससे पिन नंबर टाइप करने को कहता है.

ऐसे होती है पिन नंबर की चोरी

जिस वक्त गाड़ी मालिक द्वारा अपने कार्ड का पिन नंबर टाइप किया जाता है, पेट्रोल पंप पर इस रैकेट से जुड़े लोग संबंधित गाड़ी के ठीक पीछे किसी न किसी बहाने घूमते रहते हैं. वे लोग कार्ड का पिन नंबर देख लेते हैं और फिर उसे किसी को व्हाट्सऐप या एसएमएस करने के बहाने अपने मोबाइल पर टाइप कर लेते हैं. इस बीच क्लोन मशीन से भी संबंधित ग्राहक के मूल कार्ड का डेटा एक खास साफ्टवेयर से ड्यूप्लिकेट कार्ड्स में ट्रांसफर कर दिया जाता है. पिन नंबर और डुप्लिकेट कार्ड्स को आदीगुन नामक नाइजीरियन अपने रैकेट से जुड़े लोगों को दे देता है. इन कार्ड्स से कभी किसी एटीएम सेंटर से रकम निकाली जाती है, तो कभी किसी दुकानदार को 40 प्रतिशत तक मोटा कमिशन देकर उसकी स्वाइप मशीन से ट्रांजैक्शन होता है. क्राइम ब्रांच ने चिपलून के एक ऐसे ही दुकानदार कस्तूराराम सोलंकी को भी गिरफ्तार किया है, जिसने नागपाड़ा के एक युवक के कार्ड से वहां खरीदारी दिखाई थी. क्राइम ब्रांच इस केस में कई पेट्रोल पंप कर्मचारियों से पूछताछ करने वाली है.

#MeToo : ‘घटना के कुछ समय बाद लगाया यौन शोषण का आरोप अमान्य’

देशभर में सुर्खियों में चल रहे मीटू अभियान के बीच दिल्ली की एक अदालत ने छेड़खानी के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है.

अदालत ने कहा कि अगर महिला के साथ कोई अपराध होता है तो यह जरूरी नहीं है कि उसके साथ छेड़खानी या बदसलूकी के आरोप जोड़ दिए जाएं. खासतौर पर तब जब पीड़िता मौके पर ही अपने साथ यौन शोषण या छेड़छाड़ का आरोप न लगाए. अदालत ने कहा कि घटना के कुछ समय बाद लगाया गया यौन शोषण का आरोप अमान्य है.

यह है मामला

एक महिला ने अपने रिश्तेदार के खिलाफ 22 सितंबर 2018 को मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी. महिला की 23 सितंबर को मेडिकल जांच कराई गई. चश्मदीद गवाह के तौर पर पीड़िता की मां और भांजे के बयान भी दर्ज किए गए, लेकिन पीड़िता ने घटना के तुरंत बाद छेड़खानी की बात नहीं कही. यहां तक कि एमएलसी कराते समय भी पीड़िता ने डॉक्टर के सामने उसके साथ छेड़खानी की घटना का जिक्र नहीं किया.

घटना के कई दिन बाद छेड़छाड़ का आरोप लगाया

पीड़िता ने घटना के कई दिन बाद अचानक आरोपी रिश्तेदार पर शारीरिक तौर पर छेड़खानी का आरोप लगा दिया. इसके बाद यह मामला अदालत में पहुंचा.

रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र कुमार मिश्रा की अदालत ने इस मामले में पीड़िता द्वारा घटना के कई दिन बाद आरोपी पर छेड़खानी के आरोप लगाने को सही नहीं माना. अदालत ने इस रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सोच-समझ कर छेड़खानी का आरोप लगाना कानूनी रूप से बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. अगर वास्तविकता में पीड़िता के साथ छेड़खानी हुई है तो उसे मौके पर ही बयान क्यों नहीं किया गया.

आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

अदालत ने यह भी कहा कि यह एक प्रवृति सी बन गई है कि अगर महिला और पुरुष के बीच कहासुनी या मारपीट जैसी घटना हो जाती है तो उसमें छेड़खानी की धारा को जोड़ दिया जाता है, जो न्यायसंगत नहीं है. यह टिप्पणी करते हुए अदालत ने इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है.

विश्व खाद्य दिवस : हर दिन सड़ रहा है 43 हजार लोगों के हिस्से का अनाज

सरकारी लापरवाही से पिछले 10 वर्षों में सरकारी गोदामों में रखा 7.80 लाख कुंतल अनाज सड़ गया. देश में प्रति व्यक्ति अनाज की खपत हर दिन करीब 500 ग्राम है. इस लिहाज से रोजाना औसतन करीब 43 हजार लोगों के हिस्से का अनाज बर्बाद हो रहा है. हालांकि मनमोहन सरकार के मुकाबले मोदी सरकार में 1.04 लाख कुंतल अनाज सड़ने से बचा लिया गया. फिर भी आंकड़े डराने वाले हैं. यह खुलासा एक निजी अखबार को आरटीआई से मिले जवाब में हुआ है.

आंकड़ों के अनुसार, मनमोहन सरकार के पांच साल में 4.42 लाख कुंतल अनाज खराब हुआ. जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में 3.38 लाख कुंतल अनाज सड़ गया. खाद्य विशेषज्ञों का कहना हैकि अनाज के सड़ने की एक मात्र वजह इसका बारिश में भीगना है.

एक तस्वीर यह भी

देश में हर दिन करीब 20 करोड़ लोग भूखे रह जाते हैं या अल्प भोजन पर निर्भर हैं. इतना ही नहीं, 821 बच्चे प्रतिदिन पर्याप्त खाना नहीं मिलने के कारण दम तोड़ देते हैं.

खाद्य एवं उपभोक्ता रामविलास पासवान के अनुसार चार साल में खाद्यान्न खराब होने के मामलों में कमी आई है. कई ठोस कदम उठाए गए हैं. कोशिश है कि अनाज का एक भी दाना खराब न हो.

व्हाट्सएप पर भेजे गए मैसेज को डिलीट करने की समयसीमा बदलेगी

व्हाट्सएप पर गलती से भेजे गए मैसेज को हटाना अब आसान नहीं होगा. कंपनी ने इसकी समय सीमा को अपडेट किया है. इसके मुताबिक अगर आप किसी को भेजा गया मैसेज डिलीट करते हैं, लेकिन उपयोगकर्ता को आपके डिलीट किए मैसेज की नोटिफिकेशन 13 घंटे 8 मिनट और 16 सेकंड में नहीं मिलती है, तो यह मैसेज डिलीट नहीं होगा.

मैसेज नहीं मिलने के कई कारण हो सकते हैं. मसलन आपने जिस को मैसेज किया हो, उसका फोन बंद हो या मोबाइल डाटा ऑन न हो. व्हाट्सएप के फीचर्स पर नजर रखने वाले‘डब्ल्यूएबेटालन्फो’ ने इसकी जानकारी ट्वीट के जरिए दी. इसके मुताबिक कंपनी ने ये कदम उन उपयोगकर्ताओं के कारण उठाया है, जो इस फीचर का गलत फायदा उठाकर हफ्तों, महीने और सालों पहले भेजे गए मैसेज को डिलीट करते हैं. हालांकि आप अभी भी 1 घंटे, 8 मिनट 16 सेकंड पहले भेजे गए मैसेज को डिलीट कर सकते हैं.

गौरतलब है कि जल्द ही व्हाट्सएप पर विज्ञापन भी आने वाले हैं. व्हाट्सएप के एंड्रॉयड वर्जन पर विज्ञापन नजर आएंगे. हालांकि विज्ञापन आने से आपका चैटिंग अनुभव खराब हो सकता है. रिपोर्ट्स की मानें तो व्हाट्सएप का विज्ञापन यूजर्स के स्टेटस स्टोरी में नजर आएगा, जैसा की इंस्टाग्राम में होता है. इसके अतिरिक्त भी व्हाट्सएप पर कई नए फीचर जुड़ने वाले हैं.

मुलायम परिवार में हुआ बिखराव, अपर्णा भी चली चाचा के साथ

राजनीति में विरोधी को मात देने के लिये शतरंज की तरह चाल चलनी पड़ती है. इसमें हमेशा विरोधी से 2 घर आगे रहना पड़ता है. समाजवादी पार्टी के कुनबे में बिखराव अब रिश्तों पर भारी पड़ रहा है.

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव भले ही बेटे अखिलेश के साथ हों पर मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव चाचा शिवपाल यादव के समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा के साथ खडी हो गई हैं. समाजवादी पार्टी के मुलायम परिवार में बिखराव की सबसे अहम कड़ी प्रतीक यादव ही हैं.

प्रतीक यादव मुलायम की दूसरी पत्नी साधना के बेटे हैं. प्रतीक यादव की शादी अपर्णा सिंह बिष्ट से हुई. अपर्णा के पिता अरबिंद सिंह बिष्ट पत्राकार और मां अंबीं बिष्ट सरकारी कर्मचारी रही हैं.

aparna yadav join secular morcha up election updates

अपर्णा का परिवार उत्तर प्रदेश से अलग हुये उत्तराखंड का रहने वाला है. उत्तराखंड ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मूल घर है. योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अपर्णा उनसे मिलने गई थीं. उस समय यह कयास लगाये जा रहे थे कि अपर्णा हो सकता है भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जायें.

यह बात कयास ही रह गई. जब चाचा शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी से अलग होकर समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा बनाया तो अपर्णा भी अपने जेठ अखिलेश यादव का साथ छोड़कर चाचा शिवपाल यादव के साथ खड़ी हो गयीं. अपर्णा और शिवपाल यादव दोनों ही इस बात का दावा करते हैं कि परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव उनके साथ हैं. असल बात यह है कि मुलायम सिंह यादव राजनीतिक रूप से अपने बड़े बेटे अखिलेश यादव के ही साथ हैं.

वरिष्ठ पत्राकार शिवसरन सिंह गहरवार कहते हैं ‘2017 के विधानसभा चुनाव में मुलायम परिवार में झगड़े का प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ा था. 1992 के 24 साल के बाद भाजपा बहुमत से सत्ता में आई. भाजपा का मुकाबला करने के लिये जब कांग्रेस ने बिहार जैसा महागठबंधन उत्तर प्रदेश में बनाने का प्रयास किया. सपा-बसपा करीब आये तो भाजपा को लगा कि अब चुनाव जीतना मुश्किल होगा ऐसे में एक बार फिर से मुलायम परिवार में कलह सपा-बसपा गठबंधन मे सपा को जूनियर खिलाड़ी बना देगा. अखिलेश के कमजोर पड़ने से उनके मायावती की बातें माननी होंगी.

यह भी संभव है कि सपा-बसपा का गठबंधन भी बिखर जाये. इसका फायदा भाजपा को मिलेगा. शिवपाल यादव का मोर्चा भले ही लोकसभा चुनाव में अपनी सीटें न निकाल पाये पर समाजवादी पार्टी के वोट में सेंधमारी करने मे सफल होंगे. जिस तरह से अपर्णा यादव चाचा के साथ आईं हैं जिलों में तमाम अखिलेश से नाराज समाजवादी नेता वोट काटने का काम करेंगे. सपा में बिखराव से पिछड़ी जातियों के लोग एक बार फिर से भाजपा के साथ हो सकते हैं.’

मुझे ‘बेचारा एक्टर’ नहीं बनना है : गजराज राव

थिएटर से अभिनय करियर शुरू करने वाले गजराज राव ने 1994 में प्रदर्शित फिल्म ‘‘बैंडिट क्वीन’’से लेकर ‘‘तलवार’’ आदि बहुत चुनिंदा फिल्में ही की हैं. वास्तव में बौलीवुड में एक कलाकार के संघर्ष को देखकर उन्होंने कई वर्ष पहले ही तय कर लिया था कि वह अपने कला के शौक के लिए अपने परिवार को रूलाने की बजाय कला के साथ साथ कुछ रचनात्मक काम करते हुए धन कमाएंगे. इसी विचार के साथ उन्होंने अपनी कंपनी ‘‘ग्रेड फिल्मस’’ के तहत विज्ञापन फिल्में बनानी शुरू की. एक तरफ वह विज्ञापन फिल्में बनाते रहे तो दूसरी तरफ वह ‘‘नो स्मोकिंग’’, ‘‘आमिर’’,  ‘‘तलवार’’ सहित कुछ चुनिंदा फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे. अब वह 18 अक्टूबर को प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘‘बधाई हो’’ में नजर आने वाले हैं.

बतौर अभिनेता अपने संघर्ष को किस तरह से देखते हैं?

मैं मूलतः राजस्थान से हूं. पर लंबे समय तक दिल्ली में थिएटर से जुड़ा रहा. मेरे संघर्ष की दास्तान यह है कि मैंने अपने जीवन में बहुत से अलग अलग काम किए हैं. संघर्ष करते हुए भी मैं गार्मेंट्स एक्सपोर्ट कंपनी में 4-8 माह काम कर चुका हूं. तकरीबन डेढ़ दो साल तक दिल्ली में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करते हुए कई नामचीन अखबारों के लिए लेखन किया. थिएटर करते हुए ही ‘टीवी 18’ के कुछ कार्यक्रमों के एंकरों के लिए स्क्रिप्ट लिखकर देता था. इसी के साथ साथ फिल्मों में अभिनय करने का संघर्ष जारी रहा. मुझे कोई अच्छा प्रोजेक्ट मिल जाए, तो अभिनय कर लेता. पर एक्टिंग करने के लिए तो उस रूल को मैं अभी भी फौलो कर रहा हूं कि मुझे बहुत उम्दा अच्छे स्तर की स्क्रिप्ट पर काम करना है. बहुत अच्छे उम्दा निर्देशक के साथ काम करना है. बहुत ही अच्छी टीम के साथ काम करना है. मुझे कहीं पर भी फिट नही होना है.

इसीलिए आप कम फिल्मों में नजर आते हैं?

जी हां! जब कोई किरदार या किसी फिल्म की पटकथा मुझे प्रेरित करती है, तभी मैं फिल्म के साथ जुड़ता हूं. अन्यथा मैंने जीवन में बहुत पहले ही यह तय कर लिया था कि मुझे ‘बेचारा एक्टर’नहीं बनना है. मुझे अच्छे किरदार निभाने के लिए संघर्ष करना है. पर परिवार चलाने के लिए संघर्ष नहीं करना है. मैं अपने शौक या अपनी रचनात्मकता के लिए, अपने परिवार को दुःख नहीं पहुंचा सकता. माता पिता को दुख नही पहुंचा सकता. मेरी सोच शुरू से ही यही रही है कि ठीक से जीवन यापन चलना चाहिए. घर के खर्चे चलने चाहिए. यही वजह है कि मैंने ‘बैंडिट क्वीन’’ से लेकर अब तक ‘ब्लैक फ्रायडे’, ‘आमिर’, ‘तलवार’, ‘ब्लैकमेल’जैसी गिनी चुनी फिल्में की हैं. अब फिल्म ‘‘बधाई हो’’ में टिकट चेकर कौशिक के किरदार में नजर आउंगा.

फिल्म ‘‘बधाई हो’’ को आप सामाजिक संदेश देने वाली फिल्म मानते हैं या..?

फिल्म के ट्रेलर से फिल्म की विषयवस्तु स्पष्ट हो चुकी है. फिल्म ‘बधाई हो’में सामाजिक इश्यू को लेकर बात की गयी है, पर मनोरंजन के साथ. वर्तमान समय में बदले हुए समाज में युवा पीढ़ी अपने बड़ी उम्र के माता पिता के रोमांस को पाप समझने लगी है. इसी पर यह फिल्म मजाकिया अंदाज में बात करती है. अमूमन भारतीय संस्कृति में मध्यम वर्गीय परिवारों में एक उम्र के बाद माता पिता अपनी जिंदगी भुलाकर अपने बच्चों के बारे में ही सोचना शुरू करते हैं और युवा पीढ़ी मान लेती है कि उनके माता पिता का रोमांस ढल गया. मगर इसके यह मायने नही हैं कि हमारी फिल्म  ‘बधाई हो’ में चालिस या पचास साल की उम्र के बाद माता पिता बनने की वकालत की गयी हो. फिल्म कहती है कि इसमें शर्मिंदगी वाली कोई बात नही है. मां या पिता बनना हर महिला व पुरुष का निजी मसला है. इस पर पति पत्नी को आपसी सहमति से ही निर्णय लेने का अधिकार है.

फिल्म ‘‘बधाई हो’’ में टिकट चेकर कौशिक की जिंदगी में उस वक्त भूचाल आ जाता है, जब पता चलता है कि उसकी पत्नी पुनः गर्भ धारण कर चुकी है. पर वह अपनी पत्नी का साथ देता है.

यानी कि मिस्टर कौशिक को अपनी पत्नी के गर्भवती होने पर एतराज नहीं है?

मैंने पहले ही कहा कि वह अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता है और वह हमेशा अपनी पत्नी की चाहत में उसके साथ खड़ा रहता है. वह पत्नी का साथ निभाने के लिए हमेशा आतुर रहता है. उसे भी समाज और इधर उधर से कटाक्ष, तानें, व्यंग्य सुनने को मिल रहे हैं, लेकिन इससे उसे फर्क नहीं पड़ता है. शुरुआत में वह थोड़ा झिझकता जरूर है, पर वह शर्मिंदा नहीं होता. मुझे लगता है कि कौशिक को लगता है कि ठीक है. जो है, वह है. क्या किया जा सकता है.

इसके बाद क्या कर रहे हैं?

एक अच्छी पटकथा वाली फिल्म का इंतजार कर रहा हूं. एक फिल्म की पटकथा लिखी है, जिस पर फिल्म निर्देशित करने का विचार है.

सचिन तेंदुलकर की बात याद कर फूट-फूट कर रोये श्रीसंथ

भारतीय टीम के क्रिकेटर एस. श्रीसंथ को एक रिएलिटी शो में फूट फूट कर रोने लगे इसकी वजह थी ‘क्रिकेट के भगवान’ माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर की वह बात जो अचानक से उन्हें याद आ गई. बिग बता दें कि बौस 12 में हिस्सा ले रहे श्रीसंथ ने कैमरे के सामने महान तेंदुलकर की उस बात का जिक्र किया और फिर टी-शर्ट के अंदर अपना मुंह छुपाकर रोने लगे.

श्रीसंथ ने कैमरे के सामने 2011 विश्व कप के बाद की उस घटना का जिक्र किया, जब मीडिया के सामने किसी ने उनका नाम तक नहीं लिया था. तब मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर ने तेज गेंदबाज का नाम लेते हुए कहा कि श्री ने भी उस मैच में बहुत शानदार प्रदर्शन किया था.

श्रीसंथ ने एक बार फिर राष्ट्रीय टीम की तरफ से खेलने की इच्छा भी जाहिर की. इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर जनता को लगता है कि वो गलत थे और उन्होंने सही काम नहीं किया तो उसके लिए वो दिल से माफी मांगते हैं. यहीं नहीं उन्होंने यह भी कहा, ‘अगर भगवान ने चाहा तो वह फिर से खेलेंगे, लेकिन बस तब तक मेरे पैर….’ यह शब्द बोलने के बाद वह चुप हो गए. उन्होंने टी-शर्ट से अपना चेहरा ढका और फूट-फूटकर रोने लगे. बता दें कि श्रीसंथ जब इस घटना का जिक्र कर रहे थे तब सीक्रेट रूम में उनके साथ अनूप जलोटा मौजूद थे.

जलोटा ने श्रीसंथ को चुप कराने की कोशिश की और साथ ही कहा, ‘रो नहीं बाहर तुम्हारें बहुत समर्थक मौजूद हैं.’ श्रीसंथ ने फिर कहा कि शायद खेल के समय उन्होंने कई दुश्मन बनाए क्योंकि उन्हें महसूस होता था कि यह आक्रामकता अच्छी है.

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