देश भर की छोटी बड़ी तमाम अदालतें इन दिनी झल्लाई हुईं हैं तो इसकी बड़ी वजह फालतू के वे मुकदमे ज्यादा हैं जो शौक और शौहरत  के लिए ज्यादा और इंसाफ नाम की चिड़िया के लिए कम लड़े जाते हैं. बेशुमार मुकदमों और उनकी फाइलों के बोझ तले दबी अदालतें अभी गर्मियों की छुट्टियों में अतरिक्त घंटे काम करने मन बना ही रहीं थीं कि नया बखेड़ा फिर दिल्ली से उठ खड़ा हुआ, जिस पर अगली पेशी पर जज साहिबान और झल्लाते यह भी कह सकते हैं कि आप लोग यानि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और महा मशहूर हो चले वकील साहब राम जेठमलानी पहले तय कर लें कि वकील की फीस कौन देगा. आम आदमी पार्टी, दिल्ली की जनता, सरकार या खुद प्रतिवादी अरविंद केजरीवाल, इस के बाद ही अदालत में पांव रखें.

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