14 फरवरी, 2017 को आरएसएस मुखिया मोहन भागवत उज्जैन के वाल्मीकि धाम पहुंचे थे. इस से ज्यादा हैरत की बात यह थी कि उन्होंने यहां के मुखिया, दलित संत, उमेशनाथ के पैर छू कर आशीर्वाद लिया था. इन दोनों में लंबी चर्चा हुई. चर्चा का अंत उमेशनाथ की इस चेतावनी के साथ हुआ था कि आरक्षण खत्म नहीं होना चाहिए, दूधमलाई वालों को नहीं, बल्कि सफाई करने वालों को मिलना चाहिए. उमेशनाथ की दलित समुदाय में वैसी ही पूछपरख है जैसी सवर्णों में शंकराचार्यों और ब्रैंडेड धर्मगुरुओं श्रीश्री रविशंकर और अवधेशानंद जैसों की है. यह दीगर बात है कि वे रहते बेहद साधारण ढंग से हैं. क्षिप्रा नदी के किनारे बसे वाल्मीकि धाम में विलासिता का कोई साधन नहीं है और यह आश्रम लगभग कच्चा बना हुआ है.

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