मोबाइल और कंप्यूटर के युग में शराब का सेवन भी एक फैशन बन गया है. अगर किसी पार्टी में शराब न हो तो वह पार्टी अधूरी मानी जाती है. फिर चाहे वह पार्टी नवयुवकों के बीच हो या बड़ी उम्र अथवा वृद्धों के बीच. लेकिन इसी शराब की बदौलत एक बचपन चिंता की आग में जलता नजर आता है और अपने पिता से ही गुहार लगाता है कि पापा प्लीज शराब पी कर मम्मी से झगड़ा न करो… मम्मी को न मारो… हमें दुखी न करो… आज की युवा पीढ़ी ही नहीं छोटे बच्चे भी शराब के कारण होने वाले घरेलू झगड़ों की आग में झुलस रहे हैं. ऐसे ही कुछ बच्चों से की गई बातचीत के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि वे अपने मातापिता के आपसी झगड़ों से कितने आहत हैं. मातापिता के झगड़ों ने उन का बचपन तो छीना ही, उन की जवानी भी इन के कारण दांव पर लगी है.

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