धार्मिक पूर्वाग्रह खाने के प्रति भी साफसाफ दिखते हैं. हम जिस माहौल में रहते हैं उस में सिखाया यह जाता है कि हम हर लिहाज से विदेशों से बेहतर हैं. हमारा रहनसहन, रीतिरिवाज जीवनशैली, संस्कृति और खानपान तक विदेशों से श्रेष्ठ है.

देशी खाने का बिलाशक अपना जायका और लुत्फ है लेकिन पूर्वाग्रहों के चलते विदेशी खाने को हेय मानना उस के जायके और लुत्फ से वंचित करना है. खाने में भी भेदभाव एक संकीर्ण सोच है. इस से न तो धर्म और संस्कृति को कोई नुकसान होता और न ही कोई भ्रष्ट होता.

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