दुनिया वालों को पापपुण्य, आत्मा, मुक्ति और मोहममता से दूर कर प्रसाद बांटते गुरुदेव की महिमा अपरंपार है. पर उपदेश कुशल बहुतेरे की तर्ज पर किस्तों में दक्षिणा लेते, कामुकता से लैस और धर्म के पक्के धंधेबाज गुरुदेव की शरण में जो भी आया, धन्य हो कर या कहें लुट कर ही लौटा. आप भी सुनिए जरा गुरुकंटालजी के प्रवचन.

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