लेखिका- डा.मेघना पासी

"लाइफ डजंट कम विद मैनुअल, इट कम्स विथ मदर”, हम सभी ने यह कहावत कई बार सुनी होगी. एक मां अपने बच्चों पर अपना सारा प्यार और दुलार न्योछावर करती है और यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करती है कि उन की सभी ज़रूरतें पूरी हों. हालांकि, जब हम बड़े और स्वतंत्र हो जाते हैं, तब कई बार हम यह ध्यान भी नहीं दे पाते हैं कि हमारी मां उम्रदराज हो रही हैं.

क्या हम ने कभी सोचा है कि वे पूरे दिन क्या खाती हैं? हमें पौष्टिक भोजन देने की कोशिश करते हुए क्या वे अपनी जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं?

हालांकि, उम्र सिर्फ एक संख्या है, लेकिन फिर भी यह हमारे शरीर में कई शारीरिक, पाचन संबंधी और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन लाती है, जैसे-

शारीरिक गतिविधि में कमी, पाचन और हाजमा खराब होना और प्रतिरक्षा में कमी.

ये भी पढ़ें-नींद न आना बीमारी का खजाना

बुजुर्गों में मोटापा उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगों और कैंसर जैसे स्थाई गंभीर रोगों की ओर ले जाता है.

गर्भावस्था, प्रसव और बाद के दिनों में रजोनिवृत्ति के कारण महिलाओं की हड्डियों का घनत्व घट जाता है, जिस के परिणामस्वरूप हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. एस्ट्रोजन हार्मोन (अस्थि घनत्व को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार) का तेजी से घटना काफी हद तक औस्टियोपोरोसिस के जोखिम का कारण बनता है.

मांसपेशियों का आकार कम हो जाता है और इस से थकान, कमजोरी महसूस होती है और व्यायाम करने की क्षमता कम हो जाती है.

क्या यह आप को अतीत में आप की मां द्वारा की गई किसी शिकायत की याद दिलाता है? अवलोकन संबंधी अध्ययन इस बात का प्रमाण देते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली  जैसे कि शारीरिक व्यायाम के साथ पौष्टिक आहार को अपनाने से जटिल बीमारियों के चलते समय से पहले मौत का जोखिम कम हो जाता है.

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
Tags:
COMMENT