लेखक-रमाकांत मिश्र एवं रेखा मिश्र

‘‘क्या है यह समाज? मुझे देखिए, सुरुचि के अलावा मैं ने शायद ही किसी औरत को ढंग से देखा हो. लेकिन ज्यादातर लोग मुझे चरित्रहीन समझते हैं. मुझे चरित्रहीन का फतवा सुनाने वालों में कई ऐसे हैं, जो अपनी बेटी या बहन का रिश्ता ले कर आए थे. अगर आज मैं उन के यहां शादी को हां कर दूं तो मैं ठीक हूं, उन्हें शादी से कोई एतराज नहीं. वरना मैं चरित्रहीन हूं. और...बुरा मत मानिएगा, आप को भी लोगों ने बख्शा नहीं होगा,’’ मैं उत्तेजित हो

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