बारिश तेज होने लगी. इरा तय नहीं कर पा रही थी कि क्या करे. उस ने जोर से आवाज लगा कर्मेश को पास बुलाने की कोशिश की. पर कुछ तो बारिश का शोर और कुछ कर्मेश की मस्ती, उस ने इरा की आवाज नहीं सुनी. बहुत पुकारने के बाद भी कर्मेश का ध्यान इरा की ओर नहीं गया. अब इरा को ही कर्मेश के पास जाना पड़ा. फिर कुछ खाने का और उस के साथ खेलने का लालच दे वह उसे अपने साथ ले, घर की ओर चल पड़ी. कर्मेश इरा से बातें किए जा रहा था. कभी अपने दोस्तों के बारे में उसे बताता तो कभी घर में पड़ने वाली डांट और मार के बारे में. इरा का मन न होते हुए भी उसे कर्मेश की बातों में दिलचस्पी लेनी पड़ रही थी. कर्मेश को बहुत अच्छा लग रहा था कोई इतने अपनेपन से और प्यार से उस से बातें कर रहा था, उसे इतना महत्त्व दे रहा था.

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