दिल्ली के दंगों से किसी को कोई हैरानी हुई हो, ऐसी बात नहीं. ये दंगे तो होने ही थे. यह 2019 से दीवारों पर साफ लिखा था. गुजरात व हरियाणा में जरा सा बचने, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड की हारों के बाद दंगे कराना ही एक अकेला उपाय बचा था जिस से कि हिंदू राष्ट्र, जिसे पौराणिक राज कहना ज्यादा सही होगा, की ओर बढ़ा जा सकता था. यह काम धारा 370 को तकरीबन खत्म करने के बाद नहीं हुआ, राममंदिर के फैसले से नहीं हुआ और नागरिकता कानून में निरर्थक संशोधन के बाद भी नहीं हुआ तो भगवा गैंग को हैरानी तो होनी ही थी.

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