क्या अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए डैमोक्रेटिक पार्टी का उम्मीदवार बनने के लिए कमला हैरिस की कोशिश भारतीय जनता पार्टी को आर्थिक नुकसान पहुंचाएगी? शायद हां. भारतीय मूल की तमिल मां और जमैकन पिता की अमेरिकी संतान कमला हैरिस को अपनी दावेदारी घोषित करते ही पैसा मिलना शुरू हो गया है. इस में से बहुत पैसा वे भारतीय देंगे जिन्होंने 2014 से पहले भारतीय जनता पार्टी को दिया था.

अमेरिका के चुनावों में रेस और रिलीजन काफी हावी रहते हैं. वहां भी लोग नीतियों से ज्यादा नेताओं के व्यक्तित्व को वोट देने के चक्कर में गलत राजनीतिबाजों को चुनते रहते हैं. अमेरिका में सिविल वार में यूनियन और कौन्फैड्रेट की लड़ाई के बाद गुलामी तो बंद हो गई पर कालों के प्रति घृणा कम नहीं हुई और कालों के साथ भारत के दलितों का सा व्यवहार होता है.

ऊंचे, अमीर, योग्य गोरों की तरह भारतीय मूल के अमेरिका में नागरिक बने पैसे वाले अपनेआप को आम कालों, हिस्पैनिकों और यहां तक कि चीनियों से भी बेहतर समझते हैं. वे अपने सवर्ण होने का गौरव व दंभ अपने साथ भारत से बांध कर ले गए थे और चूंकि कमला हैरिस में ब्राह्मण खून है, इसलिए भारतीय मूल के सफल सवर्ण अपना जो पैसा नरेंद्र मोदी पर लगा रहे थे, शायद, अब कमला हैरिस पर लगाएंगे. कमला हैरिस को राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए डैमोक्रेटिक टिकट लेने के लिए लाखों डौलर जमा करने होंगे और ये सिर्फ गोरे अमेरिकी देंगे, इस में शक है. उन्हें भारतीय मूल के लोगों पर भी बहुत निर्भर रहना होगा.

यह कोई जरूरी नहीं कि कमला हैरिस पहली बाधा भी पार कर पाएं पर उन का चुनाव में उतरना ही भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए काफी है. ये लोग भारत में नरेंद्र मोदी को समर्थन इसीलिए कर रहे थे कि वे उन की ऊंची जातियों के दंभ पर मोहर लगा रहे थे ताकि अमेरिका में वे कह सकें कि वे दूसरे भारतीयों से अलग हैं. अब वे कमला हैरिस पर दांव लगा रहे हैं.

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