खाप पंचायतें कैसे अपने फैसले थोपती हैं--जो कह दिया मान लो वरना बिरादरी से बाहर. अगर गांव के मुखिया, पंडित, मौलवी ने सहीगलत सोच पर किसी को पीटने, किसी को जुर्माना भरने, किसी का धंधा बदलवाने का चौपाल पर बैठ कर फैसला कर लिया तो कर लिया. जिस ने रोना है, रोए. कोई कुछ नहीं कर सकता.

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