देश की किसी सड़क को देख लीजिए. आज सड़क बनेगी. कल से तरहतरह के सरकारी लोग आ कर उस में गड्ढे करने लगेंगे. लोगों के वाहन टेढ़ेमेढ़े चलेंगे. गड्ढों में पानी भरेगा, मिट्टीधूल उड़ेगी. एकदो उत्साही इलाके के पार्षद से मिलेंगे तो जेई साहब आ कर मुआयना करेंगे और मजदूर आ कर उन गड्ढों में ईंटरोड़े भर जाएंगे. कुछ दिन राहत होगी.

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