Budget 2025 : 1 फरवरी को पेश किए गए मोदी सरकार के बजट में आयकर की जो छूट दी गई है वह असल में बढ़ती महंगाई के दंश को कम करने वाली ज्यादा है, जनता के हाथों में ज्यादा पैसा छोड़ने की नीयत कम है. 1 लाख रुपए मासिक तक की आय देश में कम ही लोगों की है और उन को आयकर में छूट देना या न देना जनता को राहत देने का कोई बड़ा काम नहीं है.
सरकार जनता के हितों के काम कर रही है, यह देखना ज्यादा जरूरी है. फिलहाल तो यह लगता है कि केवल बहुत गरीबों को वोटों की खातिर राहत देने के अलावा सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन और नौकरियों के मामलों में कुछ खास नहीं कर रही है और 2024-25 के लेखाजोखों और 2025-26 के वायदों में ऐसा कुछ नहीं है कि जनता संसद के सामने अपने धन्यवाद जुलूस निकालने को बेचैन हो.

सरकार का बजट अब एक नौन इवैंट, निरर्थक सा हो चला है क्योंकि सरकार पूरे साल कर कम करती या बढ़ाती रहती है और आयकरों के साथ जीएसटी की मार लगातार जनता पर पड़ती ही रहती है. जो छूट मिली है वह सरकार का काम कम करेगी क्योंकि इतनी ज्यादा रिटर्न्स निल अमाउंट की होगी.सरकारों के कानून पेचीदा होते हैं और कहां क्या बदलाव किया है और 2-4 महीनों के बाद उस का कैसा असर पड़ेगा यह अनुमान लगाना अब संभव नहीं रहा है.

मोटेतौर पर यही कहा जा सकता है कि बजट अगर सरकार का 2025 का आर्थिक संकल्प है तो इस पर ज्यादा टिप्पणी करने लायक कुछ नहीं है चाहे अखबारों और टीवी चैनलों ने इस पर खूब शब्द लिखे हैं. बजट से सरकार की जनता के प्रति सहानुभूति या कर्तव्यनिष्ठा कहीं नहीं टपकती. बजट से यह भी महसूस नहीं होता कि छोटा हो या बड़ा व्यापारी या उद्योगपति इस बजट संकल्प के बाद कुछ राहत महसूस करेगा, कुछ नए काम करेगा.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

25% की बचत

डिजिटल

USD99 USD49 /Year
सब्सक्राइब करें
फायदे ▼
  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
Best Value - 26% की बचत

24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल

USD200 USD149 /Year
सब्सक्राइब करें
फायदे ▼
  • 24 प्रिंट मैगजीन + डिजिटल एक्सेस + ऐप
  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...