British India: 19वीं सदी में बना मैरी वानामेकर गर्ल्स स्कूल आज भी प्रयागराज की पहचान है. शुरुआत में अमेरिकी प्रेस्बिटेरियन मिशन द्वारा संचालित यह स्कूल भारतीय लड़कियों की शिक्षा में मील का पत्थर साबित हुआ. इस से 20वीं सदी में हजारों महिलाएं शिक्षित हुईं जो सामाजिक सुधारों की नायिका बनीं.
19वीं सैंचुरी के ब्रिटिश इंडिया में प्रयागराज का मैरी वानामेकर गर्ल्स स्कूल अमेरिकी प्रेस्बिटेरियन मिशन का हिस्सा था. 1910 में अमेरिकी व्यापारी जौन वानामेकर ने अपनी पत्नी मेरी एरिंगर ब्राउन वानामेकर की याद में 50 हजार रुपए की लागत से इस स्कूल का निर्माण करवाया.
ब्रिटिश काल में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने में सिर्फ ब्रिटिशर्स का ही नहीं, अमेरिकी और जरमन संस्थाओं का भी बहुत बड़ा रोल था. ब्रिटिश सरकार ने 1854 के वुड्स डिस्पैच नीति के तहत भारतीय लड़कियों की शिक्षा के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे. नए कालेज और स्कूल बनाए गए जहां लड़कियों के पढ़ाने का सिलसिला शुरू हुआ.
इस स्कूल का उद्देश्य था भारतीय लड़कियों को शिक्षा देना, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या आर्थिक स्थिति की हों. उस समय भारत में लड़कियों की शिक्षा लगभग न के बराबर थी. लड़कियां जल्दी ब्याह दी जाती थीं और उन्हें पूजापाठ के अलावा सिर्फ घरेलू काम सिखाए जाते थे. इस स्कूल ने हजारों लड़कियों को पढ़ाया जिन में से कई उच्च पदों पर पहुंचीं. कई शिक्षिका बनीं और समाज में बदलाव लाईं. आज यह पुराना स्कूल मैरी वानामेकर गर्ल्स इंटरमीडिएट कालेज के नाम से जाना जाता है. British India





