पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा पुंछ क्षेत्र में घुस कर 5 भारतीय सैनिकों को मार डालना बेहद गुस्सा दिलाने वाली दुखदायक घटना है जो सवाल खड़ा करती है कि पाकिस्तान की नई चुनी सरकार भरोसे लायक है या नहीं. नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री बनने के बाद कई बार भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने की बात कही है पर 2014 के चुनावों के मद्देनजर भारत सरकार की प्रतिक्रिया फीकी रही है. लेकिन भारत सरकार ने इस घटना को खासा तूल दिया है.

यह हमला घुसपैठियों का था या सैनिकों का, कहना मुश्किल है. 5 जवानों को मार कर पाकिस्तान कुछ साबित नहीं कर सकता. पाकिस्तान की अंदरूनी स्थिति ऐसी नहीं है कि वह भारत से एक और युद्ध झेल सके. पाकिस्तान को तो फिलहाल खुद से लड़ना पड़ रहा है और वहां सरकार लड़खड़ाती चल रही है. अगर अमेरिकी सहायता और विदेशों में बसे पाकिस्तानियों का पैसा न होता तो पाकिस्तान कब का दिवालिया हो चुका होता. लड़ने की क्षमता तो भारत की भी कम हो गई है. 5 साल पहले जो जोश देश में था वह काफूर हो गया है. रुपए का गिरता मूल्य, महंगाई और ऊपर से बढ़ती लूट, रिश्वतखोरी, अव्यवस्था व विघटनी ताकतों की जीत ने भारतीयों के मन में डर बैठा दिया है. नरेंद्र मोदी जैसे कट्टर, अंधविश्वासी नेता का मुख्य विरोधी दल को हथिया लेने से वह स्थिति बनने लगी है जो देश में असमंजस का माहौल पैदा कर दे और ऐसे में पाकिस्तान से दोदो हाथ करने की शक्ति देश में नहीं है. जबरन युद्ध थोपा गया तो लड़ना पड़ेगा ही पर यह देश के लिए बेहद महंगा साबित होगा.

इस घुसपैठी घटना को नजरअंदाज किए बिना, पर गुस्से से नहीं, कूटनीति से मामला सुलझे तो ही बात बनेगी. हम यह भी नहीं दिखा सकते कि कभी पाकिस्तान, कभी चीन तो कभी म्यांमार भारत में जब चाहे सैर करने आ जाएं. सीमाओं पर आनाजाना लगा रहता है पर यदि दूसरे की नीयत खराब हो तो चिंता होना स्वाभाविक है.

 

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