विकास की राह पर अग्रसर हो रहे मुल्क के ज्यादातर हिस्से अतिक्रमण के कैंसर से जूझ रहे हैं. रेलवे लाइन, बाजार, गलीनुक्कड़ से ले कर राजमार्गों तक फैले इस अतिक्रमणरूपी कैंसर की पूरी कहानी पढि़ए भारत भूषण श्रीवास्तव के इस लेख में.

भोपाल रेलवे स्टेशन से ट्रेन जब चलती है तब उस की रफ्तार महज 30 किलोमीटर प्रति घंटा होती है जबकि 3-4 साल पहले तक यह गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा हुआ करती थी. रफ्तार धीमी होने की वजह रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ नाजायज तरीके से बनी हजारों झुग्गियां और कच्चे मकान हैं. वे कब, कैसे और क्यों उग आए, इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं, अगर है भी तो सिर्फ सूचनात्मक कि यह अतिक्रमण है. इस अतिक्रमण से यात्रियों की सुरक्षा को खतरा है. इतना ही नहीं, इन नाजायज कब्जों से रेलवे ट्रैक कमजोर भी हो रहा है.

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