साधुसंतों पर व्यभिचार के आरोपों की बात कोई नई नहीं है. धर्म और राजनीतिक पहुंच के चलते अगर कोई संत मठाधीश बन जाए तो सब से पहले वह अपने लिए सुख वैभव के साधन तैयार करता है, फिर उसे देह सुख भी सामान्य लगने लगता है. स्वामी चिन्मयानंद के साथ भी ऐसा ही कुछ था, जिस की वजह से...

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