40  वर्षीय दीपकमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के देवरिया खास (नगर) मोहल्ले का रहने वाला था. देवरिया खास में उस की अपनी आलीशान कोठी है. फिर भी वह भटनी में किराए का कमरा ले कर अकेला रहता था. उस के परिवार में बड़ी बहन डा. शालिनी शुक्ला के अलावा कोई नहीं है. दीपक ने शादी नहीं की थी.

सालों पहले दीपक के पिता मंगलेश्वरमणि त्रिपाठी का उस समय रहस्यमय तरीके से कत्ल कर दिया गया था, जब वह घर में अकेले सो रहे थे. अपनी जांच के बाद पुलिस ने दीपक को पिता की हत्या का आरोपी बनाया था. पिता की हत्या के आरोप में वह कई साल तक जेल में रहा. इन दिनों वह जमानत पर जेल से बाहर था. कहा जाता है कि दीपक को दांवपेंच खेल कर एक गहरी साजिश के तहत पिता की हत्या के आरोप फंसाया गया था.

शादीशुदा डा. शालिनी की ससुराल छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में है. वह अपनी ससुराल में परिवार के साथ रहती हैं. उन्हें दीपक की चिंता रहती है. वैसे भी बहन के अलावा दीपक का कोई और सहारा नहीं था. इसलिए कोई भी बात होती थी तो वह बहन और बहनोई को बता देता था.

20 मार्च, 2018 को मुकदमे की तारीख थी. दीपक को तारीख पर पेश होना था. उधर उस की एमएसटी टिकट की तारीख भी बढ़वानी थी. उस ने सोचा एमएसटी की डेट बढ़वा कर कचहरी चला जाएगा. इसलिए सुबह उठ कर वह सभी कामों से फारिग हो कर करीब 10 बजे एमएसटी की तारीख बढ़वाने भटनी स्टेशन चला गया.

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