Crime Reduction Methods : बढ़ती अपराध दरों और कम सजा दरों के साथ, गुमनाम रिपोर्टिंग और वास्तविक समय अलर्ट के साथ नागरिकों को सशक्त बनाना सुरक्षा को बढ़ा सकता है. समाज हमेशा अपराध के खिलाफ लड़ने की इच्छा दिखाते हैं अगर उन्हें अवसर और प्रेरणा दी जाए तो.
भारत में अपराधों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय रही है. राष्ट्रीय अपराध रिकौर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट (2023) के अनुसार, प्रतिदिन 17,100 गंभीर अपराध दर्ज किए गए, जिन में महिलाओं के खिलाफ 1,227 और बच्चों के खिलाफ 485 अपराध शामिल हैं. दूसरी ओर, केवल 54.2 फीसदी मामलों में ही सज़ा हो पाई. इस के विपरीत, ब्रिटेन में यह आंकड़ा 80 फीसदी और अमेरिका में 90 फीसदी था, जिस का मुख्य कारण वहां की जनता की भागीदारी थी.

जब अपराध होते हैं तो जांच का भार पूरी तरह से पुलिस विभाग पर आ जाता है. हालांकि, अगर जनता सहयोग करती है तो सुबूत इकट्ठा करना आसान हो जाता है, जिस से कानून व्यवस्था में सुधार होता है.
क्राइम स्टौपर्स
कई लोग अपराध के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी जानने के बावजूद पुलिस से सीधे बात करने में झिझकते हैं. उन्हें अपनी सुरक्षा का डर रहता है या उन्हें कोर्ट में गवाही देने की चिंता रहती है. वर्तमान में, किसी अपराध की रिपोर्ट करने के लिए व्यक्तियों को हैल्पलाइन नंबर 112 पर कौल करना पड़ता है.
उदाहरण के लिए, अगर कोई छात्र अपने कालेज में अवैध रूप से ड्रग्स बांटने वाले किसी व्यक्ति की पहचान करता है, तो वह तुरंत अपराध को रोकना चाहेगा. पहले, ऐसे कौल के लिए सार्वजनिक टैलीफोन बूथ उपलब्ध थे लेकिन मोबाइल फोन के साथ वह सुविधा खत्म हो गई है. अब उन्हें अपने फोन से कौल करना होगा और प्राप्तकर्ता को उन के नंबर की दृश्यता एक बड़ी बाधा बन जाती है, जिस से अकसर वे असहाय महसूस करते हैं.
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