Social Issues: यह ठीक है कि दहेज का चलन कानून के जरिए बंद नहीं किया जा सकता ठीक वैसे ही जैसा छुआछूत और जातिगत भेदभाव का नहीं किया जा सकता. ये और ऐसे कई सामाजिक रोग दरअसल में धर्म की देन है जिन्हें सामाजिक बुराई करार देते दक्षिणपंथी इन की वकालात ही करते नजर आते हैं. दहेज के बिना शादियां अगर होने लगीं तो पंडों को इस के जरिए मिलने वाला दान भी बंद हो जाएगा.
31 वर्षीय ट्विशा शर्मा के साथ जो हुआ वह सभ्य समाज के उसूलों से मेल खाता हुआ नहीं है ट्विशा के साथ जो अब उस की मौत के बाद हो रहा है उसे भी सभ्य समाज के उसूलों से मेल खाता नहीं कहा जा सकता. क्योंकि मामला कथित तौर पर दहेज हत्या का है. बाग मुगलिया एक्सटेंशन भोपाल का पौश इलाका है जिस में सभ्य शिक्षित और मुख्यधारा वाले आधुनिक लोग रहते हैं. ऐसा ही एक परिवार रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह का है जिस में उन के साथ बेटा समर्थ सिंह और बहू ट्विशा रहते हैं.
ट्विशा अब रहती थी हो गई है क्योंकि बीती 12 मई को उस ने ससुराल में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. समर्थ से उस की शादी अब से कोई 6 महीने पहले हुई थी. शादी के बाद ट्विशा नोएडा का अपना जौब छोड़ कर भोपाल आ गई थी जहां समर्थ वकालत करते हैं शादी के पहले वह साउथ की एकाध दो फिल्मों में छोटेमोटे रोल भी कर चुकी थी. शुरूआती दिन ठीकठाक कटे लेकिन घर के अंदर के हालात कतई अच्छे नहीं थे. वक्त गुजरते पतिपत्नी में खटपट आम हो चली थी लेकिन उस का अंजाम ट्विशा की मौत की शक्ल में होगा यह अंदाजा किसी को नहीं था.
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