Nana Patekar Life Story: नाना पाटेकर को समझना आसान नहीं है. वे ऐसे अभिनेता थे जिन की आंखों में एकसाथ गुस्सा, दर्द, बेचैनी और करुणा दिखाई देती थी. वेव परदे पर आते थे तो कई बार लगता था कि सामने कोई कलाकार नहीं, बल्कि जिंदगी से लड़ता हुआ एक असली आदमी खड़ा है. उन के संवादों में नाटकीयता जरूर होती थी लेकिन उन की आवाज के भीतर ऐसा आक्रोश भी सुनाई देता था जिसे दर्शक अपनी जिंदगी से जोड़ लेते थे.

भारतीय सिनेमा में ढेर सारे कलाकारों ने गुस्सैल किरदार निभाए. ढेर सारे कलाकारों ने पुलिस अफसर, अपराधी, ईमानदार अफसर, नेता और आम आदमी का किरदार परदे पर साकार किया. लेकिन नाना पाटेकर की खासीयत यह थी कि वे सिनेमाई परदे पर इन किरदारों को केवल अपने अभिनय से निभाते नहीं थे, बल्कि उन की पूरी शारीरिक भाषा, बोलने के ढंग, चेहरे की मांसपेशियों और आंखों के इस्तेमाल से उन्हें एक अलग पहचान दे देते थे. उन की आवाज में एक खुरदरापन था. उन के चेहरे पर पारंपरिक फिल्मी नायक या यों कहें कि चौकलेटी हीरो वाली चमक नहीं थी, फिर भी सिनेमा के परदे पर उन के सामने हर दिग्गज कलाकार बौना नजर आता था.

नाना पाटेकर की अभिनय यात्रा का एक सिरा मुंबई की गलियों, गरीबी और संघर्ष से जुड़ा रहा,  तो दूसरा सिरा मराठी रंगमंच की गंभीर परंपरा से. नाना पाटेकर का एक सिरा उन के सामाजिक काम अर्थात उन के ‘नाम फाउंडेशन’, किसानों के सवालों और राजनीतिक टिप्पणियों तक जाता है.

उन की जिंदगी में विरोधाभास भी कम नहीं थे. एक तरफ वे किसानों की मदद के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा देने की बात करते थे, दूसरी तरफ उन की सार्वजनिक टिप्पणियों को ले कर कई बार विवाद होता था. कभी वे बालासाहेब बाल ठाकरे के काफी करीबी माने जाते रहे. मीडिया रिपोर्टस की मानें तो महाराष्ट् में कांग्रेसी व भाजपाई दोनों सरकारों के भ्रष्टाचार पर मिट्टी डालने का काम करते रहे. पिछले कुछ वर्षों से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति उन के रुख को ले कर भी बहस होती रही. पर नाना पाटेकर हमेशा दावा करते रहे कि उन का किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नही. जबकि, 2024 के चुनाव के दौरान नाना पाटेकर ने खुलेआम नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने का ऐलान किया था.

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