Politics and Common People: जीवन में राजनीति इतनी जरूरी नहीं है जितना प्लेटभर खाना. जीवन में धर्म इतना जरूरी नहीं है जितना जीवनसाथी का प्यार. जीवन में सीमाओं की रक्षा इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं है जितनी सिर पर छत. जीवन में पड़ोस के घर में आशांति का महत्त्व नहीं है अगर अपने घर में प्यार और सुरक्षा न हो. अफसोस यह है कि आज भी हम सदियों से पढ़ाए जा रहे उस पाठ को पढ़े जा रहे हैं जिस में देवता, धर्म, गुरु, राजा, लड़ाइयों में राजा की हारजीत का फुजूल का जिक्र है.
जीवन का सूत्र न जाने कैसे उन लोगों ने अपने हाथों में ले लिया जिन्होंने आम जनता को हांका पर कुछ दिया तो सिर्फ खोखले नारे. देवता को खुश करो, तुम्हें सब मिलेगा. राजा को उपहार व टैक्स दो, तुम्हें भरपूर मिलेगा. राजा के लिए लड़ों, कटो, मरो, मारो, तुम्हें याद रखा जाएगा. धर्म के नियमों का पालन करो, दान दो, गुरुओं की सेवा करो, तुम्हारे सारे दुख वह ईश्वर दूर करेगा जो उन देवताओं के इशारों पर चलता है.
यह नैरेटिव आज 21वीं सदी में भी इतना मजबूत है कि दुनिया के तकरीबन सभी देशों के अधिकतर लोग कमाई का बड़ा हिस्सा रक्षा के नाम पर मंदिर, चर्च, मसजिद आदि पर खर्च करते हैं. कमाई खर्च ही नहीं करते बल्कि वे बेचैन होने के साथ डरते भी रहते हैं कि उन के देवता या राजा या कि देश पर किस की दुष्ट निगाहें लगी हैं, वे उसे मारने, सबक सिखाने के लिए अपने सुख, प्रेम, घर की रोटी, धन को भूल जाते हैं.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन




