किसी भी इंसान के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म में उस इंसान के व्यक्तित्व को सही अंदाज में पेश करना एक फिल्मकार की सबसे बड़ी कसौटी होती है. इस कसौटी पर अपने समय के मशहूर, सच को अपनी लेखनी के जरिए पेश करने वाले निडर विवादास्पद उर्दू भाषी लेखक सआदत हसन मंटो पर बायोपिक फिल्म का निर्माण करने वाली फिल्मकार नंदिता दास खरी नहीं उतरती हैं.

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