रेटिंग: दो स्टार

निर्माताः चारू सुमित गर्ग और अमित अग्रवाल

निर्देशकः अमित अग्रवाल

कलाकारः  अर्पित चैधरी, कश्मिा शर्मा, नचिकेत नार्वेकर, अमिताभ श्रीवास्तव, राजेश जैस, वी एम वडोला, नीता मोहिंद्रा, शारीब हाशमी, तरनजीत कौर, आशु शर्मा व अन्य.

हास्य प्रधान फिल्म में एक परंपरागत परिवार का बेटा लंदन से आयी लड़की के प्रेम जाल में फंसकर उसके साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा है. आधुनिकता के रंग रंगा बेटा अपने माता पिता से सच नहीं बोलता. धीरे धीरे वह अपने इस झूठ में फंसता चला जाता है. पहली बार निर्देशक बने अमित अग्रवाल ने आधुनिकता की अंधी दौड़ में भाग रहे युवा पीढ़ी से जुड़े एक बेहतरीन विषय को उठाया, मगर वह विषयवस्तु के साथ न्याय कर पाने में बुरी तरह से असफल रहे हैं.

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कहानीः

फिल्म की कहानी आकाश (अप्रित चैधरी) और उसके परिवार के इर्द गिर्द घूमती है. दिवाली के दिन आकाश का पूरा परिवार उसका इंतजार कर रहा है कि आकाश आए और पूजा शुरू हो. पर उस वक्त आकाश अपनी दोस्त अनीशा (करिश्मा शर्मा), जिसके साथ बिना परिवार वालों को बताए वह ‘लिव इन रिलेशनशिप’ में रह रहा है, इसके साथ रंग रेलियां मना रहा होता है. इधर पारिवारिक पंडित(वी एम वडोला) आकाश की कुंडली देखकर कह देते हैं कि आकाश की शादी दो माह के अंदर होनी अनिवार्य है. इधर आकाश के माता पिता चाहते हैं कि आकाश जल्दी से जल्दी शादी कर ले. पर आकाश तो अनीशा के साथ जिंदगी के मजे ले रहा है. उसने अनीशा का साथ पाने के लिए अनीशा से झूठा बोला है कि वह अनाथ है. दोनों खुश हैं. किसी का किसी के साथ कोई कमिटमेंट नहीं है. परिवार की तरफ से दबाव बढ़ने पर आकाश सोचता है कि किसी अंजान लड़की से शादी करके जिंदगी बिताना मुश्किल हो सकता है. कम से कम अनीशा को जानता हूं, तो अनीशा से शादी कर लेता हूं. पर अनीशा तो एकदम मौर्डन लड़की है.वह स्वतंत्र जिंदगी जीना चाहती है.लेकिन वह चरित्रहीन नही है. जब आकाश उसके सामने षादी का प्रस्ताव रखता है, पर अनीशा शादी करने की बजाय जैसी स्वछंद जिंदगी चल रही है, उसी में खुश रहना चाहती है. इससे आकाश परेशान हो जाता है.

Arpit-Chaudhary

तभी कहानी में जबरदस्त मोड़ आता है. अनीषा किराए का मकान खोजते हुए आकाश को अपना पति बताकर आकाश के माता पिता के ही घर में किराएदार बन जाती है. अब आकाशा लंदन में रह रहे अपने दोस्त देव (नचिकेत नार्वेकर) से मदद मांगता है. देव गाजियाबाद आता है और अनीशा का पति आकाश और उसका दोस्त बनकर आकाश के माता पिता से मिलता है. उसके बाद एक नया ड्रामा खड़ा हो जाता है. कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततः अनीशा व आकाश की शादी हो जाती है.

लेखन व निर्देशनः

साफ सुथरी पारिवारिक हास्य फिल्म होते हुए भी कमजोर पटकथा व निर्देान के चलते फिल्म पूरे समय तक बांधकर नहीं रह पाती. मगर फिल्म बीच बीच में दर्शकों का मनोरंजन करती है. यानी कि यह फिल्म सीरियल की तरह है, जिसके कुछ एपीसोड/दृश्य अच्छे बन पड़े हैं. फिल्म का क्लायमेक्स फिल्म का बंटाधार कर देता है. क्लायमेक्स पर मेहनत करने की जरुरत थी. फिल्मकार ने ‘लिव इन रिलेषनशिप’ का मुद्दा उठाया, पर बहुत ही सतही रहा.

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अभिनयः

अर्पित चैधरी ,करिश्मा शर्मा और मशहूर निर्देशक एन चंद्रा के बेटे नचिकेत नार्वेकर अपने अभिनय से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं जगाते हैं. शारीब हाशमी की प्रतिभा को जाया किया गया है.

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