रेटिंग: साढ़े तीन स्टार

निर्देशक : राजीव चिलाका

 

छोटा भीम और छुटकी, राजू, कालिया आदि के रोमांचक कारनामों को देखने की चाह रखने वालों के लिए राजीव चिलाका एक बार फिर उसकी अगली कड़ी एनीमेशन फिल्म ‘‘छोटा भीम कुंगफू धमाका’’ लेकर आ गए हैं. पहली बार इसे ‘टू डी’ की बजाय ‘थ्री डी’ में बनाने का सफल प्रयास किया है.

भारत में ढोलकपुर निवासी छोटा भीम और उसके छुटकी, राजू, जग्गू, कालिया व अन्य दोस्तों की यह कहानी इस बार चाइना पहुंच गयी है. भीम अपने सभी दोस्तों के साथ चाइनीज दोस्त मिक के निमंत्रण पर चाइना के कुंगफू टुर्नामेंट में हिस्सा लेने पहुंचता है. इसका आयोजन चाइना के महाराजा ने अपनी बेटी और प्रिंसेस किआ के जन्मदिन के अवसर पर रखा है. यहीं पर पता चलता है कि चीन के पूर्वज ड्रैगन किंग की कृपा है और ड्रैगन किंग ने किआ के पहले जन्मदिन पर आकर किआ के हाथ पर एक सुरक्षा कवच का चिन्ह अंकित किया था. यह भी पता चलता है कि मिक, प्रिंसेस का मंगेतर है. प्रतियोगिता शुरू होती है, इस प्रतियोगिता के पहले दौर में अलग अलग प्रतिस्पर्धियों के साथ राजू, छुटकी आदि लड़ते हैं. सबसे अंत में महाबली आता है. यह कई वर्षों से लगातार चैंम्पियन ट्रौफी लेकर जाता आ रहा है. इससे लड़ने के लिए कोई तैयार नहीं होता, तब भीम आगे बढ़ता है. पहले दो राउंड में तो भीम हार जाता है. पर फिर भीम को याद आता है कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती. इस बार भीम दोगुने जोश व नई उर्जा के साथ लड़ता है और उसे दो के मुकाबले तीन अंक से हरा देता है. अंततः भीम को उस दिन विजयी घोषित किया जाता है. पर टुर्नामेंट अभी खत्म नहीं हुआ है. अभी दूसरे दिन दूसरे दौर की प्रतियोगिता होनी है ,जिसमें पहले दौर के विजेता का मुकाबला अन्य कुंगफू में माहिर प्रतिस्पर्धियों से होना है. उससे पहले मिक शाम को भीम व उनके साथियों को लेकर राज महल जाता है. जहां प्रिंसेस किआ इनसे बातें करती है और भीम के सभी साथियों के साथ प्रिंसेस किआ की दोस्ती हो जाती है. दूसरे दिन प्रतियोगिता शुरू होती है, पर तभी वहां पर महाराज का भतीजा और प्रिंसेस का चचेरा भाई जुहू पहुंच जाता है और वह प्रिंसेस किआ को अपने साथ लेकर गायब हो जाता है. पता चलता है कि कुछ साल पहले जुहू को चीन के महाराजा ने देश निकाला दे दिया था, इसलिए अब ताकत व कुछ जादुई/तिलस्मी शक्तियां हासिल करने बाद वह बदला लेने आया है. उसका मकसद पूरे चीन को खत्म करना है. इसीलिए वह किआ के माध्यम से ड्रैगन किंग को बुलाकर उनसे ज्वालांश हासिल करना चाहता है. जुहु को पता है कि इस विश्व में ज्वालांश सिर्फ एक ही इंसान के पास हो सकती है, जिसके पास ज्वालांश होगी, वही अपराजित होगा.

ये भी पढ़े- कोशिश ही कामयाबी की पहली सीढ़ी है : राजीव चिलाका

महाराज अपनी बेटी किआ को वापस लाने वाले को देश की आधी संपत्ति इनाम में देने की घोणणा करते हैं. कुछ वीर योद्धा जुहू के पीछे भागते हैं. भीम व उसके साथियों को लगता है कि उनकी दोस्त प्रिंसेस किआ मुसीबत में है, तो उसकी मदद की जानी चाहिए. इसलिए भीम व उनके साथी भी जुहु के ठिकाने की तरफ बढ़ते हैं. पर जुहु के किले के अंदर प्रवेश करना नामुमकीन है, तभी एक सर्कस टीम को महल की तरफ जाने से रोककर भीम सभी को मौत देकर वह और उसके साथी सर्कस वालों की वेशभूषा पहनकर किले के अंदर किआ तक पहुंच जाते हैं. जहां जुहु से युद्ध होता है. जुहु अपनी जादुई शक्ति के बल पर भीम व उनके साथियों को अधमरा कर नदी में फेंक देता है. जुहु को लगता है कि यह सभी नदी में डूबकर मर जाएंगे. भीम को भी अहसास हो जाता है कि जुहु से लड़ना बहुत मुश्किल है, क्योंकि उसके पास तो जादुई शक्तियां है. किसी तरह यह सभी नदी में डूबने से बच जाते हैं. एक बाबा इन सभी को अपने आश्रम लाकर इनका इलाज करता है, उसके पोते को भी जुहु ने बंदी बना रखा है. यह बाबा ही भीम व उसके साथियों को मार्शल आर्ट व कुंगफू के नए दांव तथा भीम को खास तरह की ट्रेनिंग व शिक्षा देता है.

उधर प्रिंसेस किआ के जन्मदिन पर एक आयोजन जुहु करता है. जहां प्रिंसेस किया ड्रैगन किंग को बुलाकर रोते हुए उनसे ज्वालांश लेकर जुहु को देती है, पर तभी भीम अपने साथियों के साथ पहुंच जाता है. कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततः भीम, किआ को छुड़ाकर चाइना के राजा को सौंपता है. और कुंगफू टुर्नामेंट की ट्रौफी भी हासिल करता है.

पटकथा लेखक ने कहानी को बहुत ही सरल अंदाज में बयां करने का प्रयास किया है. बहुत कुछ तयषुदा पद्धति से ही आगे बढ़ता है. कहानी व पटकथा दर्शकों को एक सकारात्मक सीख देती है. एनीमेटेड किरदारों के साथ लोग रिलेट करते हैं. एनीमेशन क्रिएटर ने रंगो का चयन भी बहुत ही बेहतरीन किया है.

कुंगफू की तकनिक की बारीकियों पर बहुत ज्यादा जोर न दिए जाने के बावजूद तमाम दृष्य बहुत अच्छे ढंग से डिजाइन किए गए हैं. हर फ्रेम रंगीन और आकर्षक है. जिन कलाकारों ने डबिंग की है, उनकी आवाज चरित्रों के एक्षन के साथ एकदम मेल खाती है. एनीमेशन के साथ थ्री डी का प्रभाव अति उत्तम है.

सबसे बड़ा सच यह है कि हौलीवुड या पश्चिमी देशों की एनीमेशन फिल्मों के प्रशंसक भी ‘‘छोटा भीम कुंगफू धमाका’’के एनीमेशन को कमतर नही आक सकते. इस फिल्म का एनीमेशन हौलीवुड फिल्मों के स्तर का ही है. किंतु ‘छोटा भीम’ की पिछली फिल्मों के मुकाबले इस बार रोमांच के तत्व कुछ कम हैं. इसके अलावा फिल्म कुछ लंबी हो गयी है. इंटरवल के बाद फिल्म पर से निर्देशक व लेखक की पकड़ कमजोर नजर आती है.

ये भी पढ़े: जल्द ही वापसी करेंगी दया बेन

मगर कुछ कमियों के बावजूद फिल्म भावनामक स्तर पर बांधकर रखती है.फिल्म के दो संदेश बच्चों को याद रह जाते हैं. पहला प्यार व दोस्ती बिना शर्त और निःस्वार्थ भाव की बुनियाद पर होनी चाहिए. हमेशा दोस्त के साथ खड़े रहना चाहिए. दूसरा संदेश कि कोशिश ही सफलता का पहला कदम है.

फिल्म के पाष्र्व संगीत की भी तारीफ की जानी चाहिए. फिल्म के अंत में बौलीवुड स्टाइल के गाने को लेकर एक नया प्रेयोग जरुर किया गया है, मगर यह अनावश्यक लगता है.

एक घंटे 43 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘छोटा भीम:कुंग फू धमाका’’ के लेखक, निर्माता, निर्देशक और क्रिएटर राजीव चिलाका हैं.

Tags:
COMMENT