भारतीय मनोरंजन चाहे वह सिनेमा का हो या टीवी का या फिर वीडियो स्ट्रीमिंग का, दिलचस्प दौर में पहुंचता जा रहा है. एक समय ऐसा था जब बौलीवुड या हिंदी सिनेमा और टीवी के कार्यक्रमों को राष्ट्रीय मनोरंजन माना जाता है. मगर अब सारी क्षेत्रीय भाषाओं का इंद्रधनुष अपने सारे रंगों के साथ आसमान पर छा रहा है. पहली बार क्षेत्रीय भाषाओं का मनोरंजन अपनी भौगोलिक सीमाओं को तोड़ कर राष्ट्रीय पहचान बना रहा है. यह सुखद आश्चर्य की बात है कि वैश्वीकरण के दौर में लोग अपने क्षेत्र से बहुत दूर दुनियाभर में बसते हैं मगर वहां भी वे अपनी जड़ों से जुड़ने को लालायित रहते हैं.

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