35-40 साल पहले उत्तर प्रदेश के गांवों में आंचलिक कहानियों का खूब बोलबाला था. घर के कामकाज से निपट कर घर की बड़ीबूढ़ी महिलाएं किशोरावस्था की ओर छलांग लगाते बच्चों को कहानियां सुनाया करती थीं, जो बड़ी खट्टीमीठी होती थीं.

मसलन शैतान बच्चों को थोड़ी खट्टी कड़वी यानी भूतप्रेत, चुड़ैल और राक्षसों की कहानियां और अच्छे बच्चों को राजारानी, जंगली जानवरों, आदूगर और परियों की कहानियां. बच्चे सबसे ज्यादा परियों की कहानियां पसंद करते थे. इन्हीं कहानियों में एक कहानी 7 परियों की भी थी, जो आपस में सहेलियां थीं.

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