Government Portal Scam: असल में हुआ कुछ और ही है. औनलाइन के चक्कर में सरकार ने टैक कंपनियों को मुंहमांगे पैसे दे कर पोर्टल बनाने के लिए और्डर देने शुरू किए हैं. कुकुरमुत्तों की तरह सौफ्टवेयर कंपनियां बन रही हैं जो तरहतरह के सरकारी प्रोग्राम बना रही हैं. यह भ्रष्टाचारमुक्त बिलकुल नहीं है क्योंकि जब नागरिक इन का इस्तेमाल करता है तो हर 5-7 कदम बाद पोर्टल रौंग एंट्री कह कर बंद हो जाता है और यह भी नहीं बताता कि गलती क्या थी. जब विभाग से पता करो तो पता चलता है कि ‘पैसा दो और एंट्री करवाओ’ का सिस्टम कंप्यूटरों की मारफत जोरों से हो रहा है.
औनलाइन सिस्टम सख्त नहीं होते. इंडिया पोस्ट, जिस ने जनता की सेवा करना बंद कर दिया है और लगभग सारी डाकसेवाएं प्राइवेट कूरियरों के हवाले जाने दी है, 5,000 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है. पासपोर्ट कार्यालयों ने 1,000 करोड़ रुपए कंप्यूटरों पर खर्च किए हैं. इंकम टैक्स के पोर्टल पर 2019 में 4,242 करोड़ रुपए खर्च हुए थे.
सभी सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटर चलाने के लिए ठेके दिए जा रहे हैं जो 1 से 3 साल तक के लिए होते हैं. इन ठेकों को कौन लेता है, कौन देता है, यह लगभग छिपा रहता है. हर ठेके में भारी भ्रष्टाचार है. ठेकेदार के टैंपरेरी रखे कर्मचारी नागरिकों से जब चाहे जो मरजी वसूली कर सकते हैं क्योंकि वे पोर्टल पर बने फोल्ड्स में मनमरजी हेराफेरी कर सकते हैं. उन के पास तब तक ओटीपी के बहाने नागरिक का नंबर भी पहुंच चुका होता है और नागरिक से संपर्क करना उन के लिए कतई मुश्किल नहीं है.
आप का ड्राइविंग लाइसैंस एप्लीकेशन पोर्टल पर आगे नहीं बढ़ रही है, तो समझ लें कि आप को दलाल की जरूरत है. रिश्वत दो, कंप्यूटर मान जाएगा. सरकार पूरी तरह साफ है, वाराणसी के गंगाजल की तरह.
औनलाइन धंधा असल में राममंदिर की तरह का है जिस पर सरकार और जनता दोनों द्वारा चढ़ावा चढ़ाया जा रहा है और कोई पूछताछ नहीं है. आईटी सैक्टर के बड़े प्राइवेट मंदिरों में टाटा कंस्लटैंसी, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल, टैक महिंद्रा, सीएमसी सिलवर टच में हैं जो अरबोंखरबों रुपए की इंकम पा रहे हैं. इन सब कंप्यूटर प्रोग्राम बनाने वाले मंदिरों की बैलेंसशीटें उपलब्ध हैं, राम मंदिर की बैलेंसशीट की तरह छिपी नहीं हैं. लेकिन यह पता करना असंभव है कि कितना पैसा केंद्र, राज्य या स्थानीय निकायों और पब्लिक सैक्टर कंपनियों में आ रहा है.
सरकार का औनलाइन को बढ़ावा देने का उद्देश्य लोगों को कंप्यूटर तीर्थों में जबरन धकेलना है. ड्राइविंग लाइसैंस में या आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) में यदि कभी कोई दिक्कत आ रही हो तो सीधे दलाल को पकड़ें जैसे बड़े मंदिरों में पकड़ते हैं. आप का काम पैसा दे कर हो जाएगा. आप जय श्रीराम की जगह जय कंप्यूटर राम बोल सकते हैं. Government Portal Scam





