Emotional Love Story: क्यों होता है ऐसा ? कभी-कभी दो लोग अर्थात एक लड़का और एक लड़की आपस में प्यार तो करते हैं एक-दूसरे के साथ पूरी ज़िन्दगी बिताने का सपना देखते हैं, कसमें-वादे करते हैं लेकिन निभा नहीं पाते। कभी माता-पिता रूपी दीवार बीच में आ जाती है तो कभी जात-पात। कभी भविष्य के लिए बुने गए बड़े-बड़े सपने दीवार बन जाते हैं तो कभी अमीरी-गरीबी की दीवार आड़े आ जाती है। लेकिन इन सबसे अलग एक चीज़ और भी आजकल टशन बन गई है। हमारे पूज्य बाबा जी या माता जी, जिनके आश्रम सदा भक्तों से भरे रहते हैं और उनके मुख से निकले शब्द भक्तों के लिए ईश्वर का फरमान होते हैं। सादर वन्दन ऐसे महापुरूषों एवं महादेवियों को जो इन्सान को ईश्वर से मिलाने का दावा करते हैं।

क्या कभी ऐसा होगा कि इन सब दीवारों को तोड़कर प्यार अपनी मंज़िल पा सकेगा ? क्या प्यार सुकून से जी सकेगा, चैन की सांस ले सकेगा? जैसे कि आज चन्दन और सवि का प्यार अधमरा सा पड़ा है। न तो उनका प्यार जी पा रहा है और न ही मर पाया है। क्या ऐसा प्यार कभी जी पाएगा?

ये कहानी शुरू होती है पानीपत के सेंट थामस स्कूल से। सवि छटी क्लास में और चन्दन सातवीं क्लास में हैं, इत्तेफ़ाक से दोनों की क्लास पहली मंज़िल पर आस-पास के कमरों में है जिसके कारण दोनों का सुबह स्कूल आते समय तथा स्कूल से छुट्टी के समय मेल हो जाता था। सवि की एक सहेली माही चन्दन की कालोनी में रहती थी जिसकी वजह से माही की चन्दन से हाय, हैलो हो जाती तो सवि भी साथ होती तो हाय हैलो उसकी भी हो जाता करती थी। मगर इस हाय-हैलो में ही दोनों को एक-दूसरे की आँखो में कुछ कशिश महसूस होती है जो एक-दूसरे को देखे बिना आगे कदम बढ़ाने नहीं देती, जब तक दिन‌ में एक बार एक-दूसरे को देख न लें चैन न‌ पड़ती।

हाय-हैलो से बढ़ते-बढ़ते कभी कैंटीन में साथ बैठकर कुछ खाना-पीना, कभी सवि का रिक्शा वाला न आए तो चन्दन अपने रिक्शा वाले से कहकर पहले सवि को घर छोड़ने जाता फिर खुद घर जाता। क्योंकि स्कूल दोनों के घरों से ज्यादा दूरी पर नहीं था, बस केवल विपरीत दिशा‌ में था (एक का घर स्कूल के दाईं ओर तथा दूसरे का बाईं ओर था)‌ स्कूल नज़दीक होने की वजह से उन लोगों ने स्कूल बस के बजाए प्राईवेट रिक्शा लगवाए हुए थे। इस तरह दोनों का अक्सर मिलना या कभी मिलने का बहाना‌ ढूंढना दोनों के दिलों में बेचैनियां पैदा कर रहा था।

इस तरह वक्त बीतता गया। बढ़ती हुई उम्र दिलों को धड़कन समझाने वाली हो गई थी अब तक दोनों की। दोनों के मन में प्यार के अंकुर फूटने लगे।

समय बीतते पता नहीं चला कब एक-दूसरे के दिलों में घर बना लिया ख़बर ही नहीं हुई। चन्दन 12वीं में था और सवि 11वीं में। चन्दन बाईक से स्कूल आता था और सवि एक्टिवा से। छुट्टी होने पर चन्दन अक्सर बाइक स्टेंड पर सवि का इन्तज़ार करता जब सवि आती तब ही दोनों गेट से एक साथ बाहर निकलते लेकिन पिछले एक साल से सवि कभी तो चन्दन से पहले ही निकल जाती और कभी आते ही कहती,”चाँद कल बात करते हैं आज बहुत लेट हो रहा है”

“क्यों ! कोई ज़रूरी काम है क्या? जो इतनी जल्दी में हो”

“चाँद तुम जानते हो ना आज शुक्रवार है और हर शुक्रवार मैं आश्रम जाती हूंँ। बाबा जी इन्तज़ार कर रहे होंगे, उन्हें वेट कराना भी तो सही नहीं है ना”

“क्या यार सवि…. शुक्रवार को ही तो हम आराम से बात कर सकते हैं उसके बाद तो वीकेंड की दो छुट्टियां आ जाती हैं फिर तो मंडे को ही मिल सकते हैं” कहते हुए चन्दन उदास हो जाता।

” अरे … तो मंडे को तो हम मिल रहे हैं ना, ऐसे सैड मत हो चाँद”

“सवि तुम समझती क्यों नहीं तुम्हारे बिना मैं ये तीन दिन कैसे गुज़ारूंगा?”

“बुद्धु तीन कहां दो दिन ही तो हैं ”

“तो आज भी कहां बात हो पा रही है? आज भी तो तुम भाग रही हो। एक आज का दिन भी तो गिनो, हुए न फिर तीन दिन”

“ओह माई गॉड… तुम भी न चाँद….” सवि हँसने लगी।

“अच्छा छोड़ो न कल फोन पर बात करते हैं, अभी मुझे लेट हो रहा है। बाबा जी पूछेंगे तो क्या कहूंगी कि मैं क्यों लेट हुई”

“तो बोल देना कि तुम मेरे साथ थी”

“नो… वे….पता है वो कितने गुस्से वाले हैं, डांट पड़ेगी। ना बाबा ना मैं नहीं कह सकती” ऐसा कहते हुए एक्टिवा स्टार्ट की और चली गई। चन्दन खड़ा देखता ही रह गया।

“न जाने आश्रम में ऐसा क्या है जो दो मिनट रूक कर ढंग से बात भी नहीं कर सकती। कितनी बार समझाया कि इन आश्रमों के चक्कर में मत पड़ो, लेकिन नहीं….. बात तो माननी ही नहीं ना” बड़बड़ाते हुए बाईक स्टार्ट की और चल पड़ा घर की ओर।

हर शुक्रवार यही सिलसिला रहता। सवि को आश्रम जाने की जल्दी रहती और चन्दन को सवि के साथ शुक्रवार को ही ज्यादा वक्त बिताना‌ होता क्योंकि आगे दो छुट्टियां आ जाती हैं फिर उसके बाद सीधा सोमवार को ही मेल होता है।

चन्दन ने बारहवीं पास करके इंजिनियर काॅलेज में एडमिशन लिया लेकिन सवि का अभी एक साल था काॅलेज जाने में, क्योंकि वो चन्दन की जुनियर थी। अब दोनों की मुलाकात कम होती थी अधिकतर फोन पर ही बात होती। कभी-कभी तो लम्बी चैट होती रहती। इधर चन्दन को उम्मीद थी कि सवि उसी के काॅलेज में ही एडमिशन लेगी लेकिन हुआ इससे उल्टा। सवि ने मेडिकल में एडमिशन ले लिया।

“सवि तुमने मेडिकल में एडमिशन ले लिया, और मुझे बताया तक भी नहीं ! तुम तो इंजीनियरिंग करने वाली थी न, फिर ये अचानक मेडिकल का क्या सूझा?”

“अरे यार….बस मूढ़ चेंज हो गया, अब मेडिकल करने का सोचा है”

“तो कम से कम मुझे बता तो दिया होता।”

” चन्दन इसमें इतना हाइपर होने की क्या बात है? बस बाबा जी ने मेडिकल का सुझाव दिया तो मेरा मूढ़ चेंज हो गया। अच्छा छोड़ो यार चलो आज मेरे एडमिशन की खुशी में तुम्हें ट्रीट देती हूँ। शाम को रेडी रहना अच्छी मूवी लगी है देखने चलते हैं” सवि ने बात को खत्म करने के लिए मूवी का प्रोग्राम बना लिया।

शाम को दोनों जब मूवी देख रहे होते हैं तो अचानक आधी मूवी में ही सवि को कोई काॅल आता है और सवि मूवी छोड़कर जाने की बात करती है।

“सवि ऐसी कौन सी इंपोर्टेंट बात है जो मूवी छोड़कर जा रही हो। मूवी के बाद चली जाना”

“चन्दन वो बाबा जी ने अर्जेंट बुलाया है इसलिए जाना पड़ेगा”

“मैं कहता हूंँ सवि ये आश्रम-वाश्रम की अभी तुम्हारी उम्र नहीं है। तुम अपनी पढ़ाई पर फ़ोकस करो और अब तुमने मेडिकल लिया है तो तुम्हें और ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी”

“यार उसकी टेंशन नहीं है, बाबा जी है न, सब सम्भाल लेंगे। अब देखो 90% से कम वाले स्टूडेंट्स को एडमिशन नहीं मिल रहा था ना, लेकिन मुझे 88% वाली को मिल गया वो भी बिना किसी मशक्कत के। अरे यार ये सब बाबा का कमाल है। बाबा जी कुछ भी कर सकते हैं”  सवि हर समय आश्रम वाले बाबा का गुणगान करती नहीं थकती थी।

ख़ैर चन्दन इंजीनियरिंग का एक साल बर्बाद करके मेडिकल में तो जा नहीं सकता था हांँ उसने सवि से कहा कि जब सवि का पहले इंजीनियरिंग का मन था तो वो इंजीनियरिंग में ही एडमिशन ले मगर सवि ने उसकी एक न सुनी।

दोनों की मेडिकल और इंजीनियरिंग चल रही थी, कभी दोनों की फोन पर बात होती तो कभी मिलकर। चन्दन का इंजीनियरिंग का लास्ट इयर था और उसके बाद चन्दन ने मास्टर करने के लिए आस्ट्रेलिया जाने का सोचा। इधर सवि चन्दन के आस्ट्रेलिया जाने का सुनकर उदास हो गई।

“सवि तुम उदास मत हो, मैं पढ़ाई के लिए जा रहा हूंँ कोई हमेशा वहां बसने के लिए थोड़े जा रहा हूंँ। देखो अगर तुम रोओगी तो तुम्हें रोता देखकर मेरा क्या हाल होगा कभी सोचा है तुमने, ऐसे कैसे तुम्हें रोता छोड़कर मैं जा पाऊंगा?”

“चाँद मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी और जानते हो मुझे क्या टेंशन है अगर तुमने वहां किसी आस्ट्रेलियन से शादी कर ली तो….”

“पागल है क्या…? बस इतना ही समझ सकी हो मुझे अब तक। मैं सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हूँ। ये चांँद केवल इसी चाँदनी का है” कहकर चन्दन सवि के चेहरे को दोनों हथेलियों के बीच लेकर उसके माथे को चूम लेता है

“वैसे सवि एक बात बताओ, कहीं तुम्हें तो आश्रम में कोई पसंद नहीं आएगा ना ! ऐसा न हो तुम किसी आश्रम वाले की जोगन बन जाओ और मैं मजनू की तरह पागल बनकर सड़कों पर मारा-मारा फिरता रहूंँ” कहते हुए चन्दन हँसने लगा।

“चन्दनननन …… मारूंगी…… मुझे समझ क्या रखा है तुमने ! दिल एक बार दिया जाता है। दिल कोई मिठाई नहीं कि सबको बांटते फिरो। आइंदा ऐसा बोला ना तो देख लेना फिर क्या हश्र करूंगी तुम्हारा”

सवि के इस तरह बात करने से चन्दन के दिल को करार आया, वरना अब तक तो सवि के बार-बार आश्रम जाने से चन्दन को इंस्कयोरिटी महसूस होती थी क्योंकि वो जानता है कि आजकल हर आश्रम में क्या-क्या गुल खिलाए जाते हैं।

“अच्छा बाबा कान पकड़ता हूंँ आइंदा ऐसी बात नहीं करूंगा। लेकिन सवि अब तुम अपनी पढ़ाई पर फ़ोकस करो आश्रम जाने के लिए बहुत उम्र पड़ी है”

“चन्दन मेरी पढ़ाई की टेंशन मत लो तुम, बाबा जी हैं न, मुझे कोई चिंता करने की जरूरत ही नहीं”

“वैसे ये तुम्हारे बा..बा जी करते क्या हैं! कोई मिनिस्टर-वनिस्टर हैं क्या जो इतनी चलती है कि तुम्हारा एडमिशन भी करवा दिया, अब तुम कह रही हो पढ़ाई की कोई टेंशन नहीं बाबा जी सब सम्भाल लेंगे!”

“तुम नहीं जानते बाबा जी की पावर को”

“वही तो मैं पूछ रहा हूँ। ख़ैर छोड़ो अब तुम सीधे घर जाना ऐसा न हो फिर तुम आश्रम चली जाओ”

“हूँउउउउउ”

चन्दन चला गया आस्ट्रेलिया लेकिन इधर सवि का आश्रम मोह नहीं छूटा बल्कि पहले से अधिक हो गया।  चन्दन से घण्टों चैट करती रहती लेकिन जब कभी चन्दन फोन करता तो फोन पर बात कम ही होती थी क्योंकि सवि आश्रम में होती और कहती कि “बाबा जी के सामने बात नहीं कर सकती मैसेज कर दो” चन्दन कुनमुना कर रह जाता है और मैसेज से ही उनकी बात होती थी जबकि चन्दन चाहता कि विडियो काॅल करके वो बात करें ताकि वो सवि की छवि को निहार सके।  दो साल बाद चन्दन पढ़ाई खत्म करके वापिस इंडिया आया। उसे आस्ट्रेलिया में टी. आर. अर्थात टेम्प्रेरी रेजिडेंशियल स्वीकृति मिल गई थी अब वो वहां परमानेंट होना चाहता है। उसका सपना है कि सवि के साथ शादी करके वो उसे आस्ट्रेलिया ले जाएगा और सदा के लिए वहीं बस जाएगा। चन्दन माता-पिता की इकलौती औलाद है, ईश्वर की कृपा से पापा का बिजनेस भी बहुत अच्छा है। पापा कहते हैं कि इसी बिजनेस को ज्वाइन ‌करो लेकिन चन्दन की सोच भारत में रहने के खिलाफ है वो आस्ट्रेलिया सैटल होकर माता-पिता को भी वहीं बुलाना चाहता है।

“सवि लगभग तुम्हारी पढ़ाई भी खत्म हो गई है और मेरी भी अच्छी जाॅब लग गई है तो क्यों न अब हम अपने पेरेंट्स से बात करें। मैं चाहता हूंँ कि शादी के बाद हम लोग आस्ट्रेलिया ही सैटल हो जाएं। मम्मा-पापा को भी वहीं बुला लेंगे”

“नो वे…. मेरे पेरेंट्स को पता चला न कि मैं तुमसे प्यार करती हूंँ तो मुझे तो ज़िन्दा ही दफना देंगे”

“तो इसका मतलब तुमने अपने पेरेंट्स को हमारे बारे में कुछ नहीं बताया?”

“अरे अगर बता देती तो न तो फिर कभी तुमसे मिल पाती और अगर मिलने की कोशिश करती तो शायद पढ़ाई छुड़ाकर कहीं दूसरे शहर भेज दी जाती” कहते हुए सवि खिलखिला कर हँसने लगी।

“तो फिर अब क्या ? मैंने अपने पेरेंट्स को थोड़ा सा हिंट दे दिया था ताकि वो मेरे लिए कोई लड़की न ढूंढे”

“अब क्या, क्या …! तुम अपनी कोई आस्ट्रेलिया वाली के पास और मैं अपने आश्रम वाले के पास” कह कर सवि फिर से खिलखिलाते हुए हँसने लगी।

उसकी बात सुनकर चन्दन का चेहरा उतर गया, सवि का हाथ पकड़ कर बोला,”सवि प्लीज़ कभी मज़ाक में भी ऐसा न कहना। बस मुझे अब ये बताओ कि तुम्हारे पेरेंट्स से कैसे बात की जाए। तुम कहो तो मैं अपने पेरेंट्स को भेजूं तुम्हारे घर?”

“ना..ना…ना मेरे पेरेंट्स को हमारे रिलेशन के बारे में भनक भी नहीं लगनी चाहिए‌। वैसे चन्दन एक आईडिया आया है क्यों न हम मैरिज ब्यूरो वालों के थ्रू बात करवाएं, हमारा काम भी बन जाएगा और मेरे पेरेंट्स भी नाराज़ नहीं होंगे”

“ठीक है मैं मौका देखकर अपने पेरेंट्स से बात करता हूंँ वो किसी मैरिज ब्यूरो वाले से कांटेक्ट करेंगे”

“वैसे मैं तुम्हारे साथ कहीं आउटिंग पर जाने का प्लान बनाकर आया था बहुत टाइम बाद मिले हैं तो थोड़ा वक्त तुम्हारे साथ ही गुजारना चाहता हूंँ”

“हांँ तो बोलो न कहां का प्रोग्राम है”

“मैं सोच रहा था कि क्यों न दो दिन के लिए शिमला चले, इस वक्त शायद वहां स्नोफॉल भी हो रहा होगा। क्या तुम्हारे पेरेंट्स जाने देंगे?”

“मैं कौन‌ सा सच बता कर जाऊंगी हा हा हा….. कहूंगी फ्रैंड्स के साथ जा रही हूंँ”

“झूठ बोलोगी !”

“तो क्या करूं ? ऐसे तो वो जाने नहीं देंगे। किसी लड़के से बात तक तो करने की मनाही है और शिमला जाने देंगे वो एक लड़के के साथ !”  हा हा हा हा…..

“देख लो जैसे तुम्हें ठीक लगे मैं तो अपने पेरेंट्स से कुछ नहीं छुपाता और न ही मेरे पेरेंट्स मना करेंगे”

दोनों शिमला घूमने चले जाते हैं सवि अपने घर फ्रैंड्स के साथ घूमने की बात कह कर‌ परमिशन लेती है और चन्दन अपने पेरेंट्स को बता देता है कि वो सवि के साथ जा रहा है। इत्तेफाक से वहां पर स्नोफॉल इंज्वॉय करते हुए सवि को बहुत ज्यादा ठंड लग जाती है और चन्दन उसे अपने ओवरकोट के अन्दर ले लेता है, कांपती हुई सवि चन्दन की कमर के चारों ओर बांहों का घेरा बना कर उससे लिपट जाती है। इतने में सवि बेहोश हो जाती है तो चन्दन को उसे ऐसी हालत में अकेले रूम में छोड़ना ठीक नहीं  लगा और वो उसे उठाकर अपने रूम में ले गया। दोनों की सांसें टकराने लगी, दिलों की धड़कनें तेज होने लगी, सवि चन्दन के साथ लिपटी होने के कारण थोड़ा सा होश में आने लगी, ज्ञगर उसने चन्दन को और कस के पकड़ लिया और चन्दन के गालों से अपने गाल रगड़ने लगी। इधर चन्दन भी सवि के जिस्म की आग में पिघल रहा था। दोनों को इश्क का ख़ूमार चढ़ने लगा। धीरे-धीरे दोनों और करीब आने लगे, दो जवां दिल इश्क के ख़ुमार में बहकने लगे।

दोनों ही मोहब्बत के नशे में भूल गए कि क्या मर्यादा है हमारी संस्कृति की, हमारे संस्कारों की। और वो हो गया जो न होना था। सवि और चन्दन दोनों एक-दूसरे में समा गए। गलती कर बैठे दोनों। सुबह जब आँख खुली तो एहसास हुआ कि कितनी बड़ी ग़लती कर बैठे वो। चन्दन अपने किए पर शर्मिन्दा था और सवि भी चुप सी थी मगर जहां प्रेम हो वहां बड़ी से बड़ी ग़लती भी भूला दी जाती है यही इन दोनों ने किया। एक-दूसरे का हाथ हाथों में लेकर मूक शब्दों में एक-दूसरे को तसल्ली दिलाई कि वे सदा एक-दूसरे के ही थे और रहेंगे। दोनों शिमला ट्रिप से जब वापिस आए चन्दन ने सवि के कंधों को पकड़ कर कहा,” सवि तुम चिंता मत करो शिमला में जो कुछ भी हुआ उसके लिए मैं भी बराबर का ज़िम्मेदार हूंँ तुम पर आंच नहीं आने दूंगा मैं आज ही मम्मा-पापा से कहकर कोई मैरिज ब्यूरो वाले का पता करवाता हूंँ”

दोनों अपने-अपने घर चले गए चन्दन के माता-पिता खुले विचारों के थे इसलिए चन्दन ने माता-पिता से सारी बात खुलकर कह दी और उन्हें मैरिज ब्यूरो का पता लगाने के लिए रिक्वेस्ट की।

लेकिन इधर सवि के पेरेंट्स का कहना कि जो बाबा जी कहेंगे वही होगा। उनके लिए बाबा जी बात पत्थर की लकीर है। जिस लड़के को बाबा जी अप्रूव करेंगे उसी से सवि की शादी होगी। चन्दन ने सवि से बहुत बार कहा कि आश्रम कम जाया करे और बाबाओं की बातों पर आंँखें मूंद कर यकीन नहीं करना चाहिए लेकिन सवि पर इसका कोई असर न होता। चन्दन को इंडिया आए दो महीने हो गए थे वो इस बार यहीं से पी. आर. अर्थात परमानेंट रेसिडेंशियल लेकर ही जाना चाहता है इसलिए जब तक पी. आर. नहीं मिलता तब तक वो यहीं पर है। लेकिन इन दो महीनों में सवि चार-पांच बार ही मिली चन्दन से और इस बार तो हद ही हो गई दिवाली को केवल एक सप्ताह  रह गया था चन्दन ने दिवाली साथ मनाने का आग्रह किया तो सवि बोली , ” मैं दस दिनों तक आश्रम ही रहूंगी क्योंकि दिवाली की तैयारियां करनी है और दिवाली भी मैं पेरेंट्स के साथ आश्रम में ही मनाऊंगी”

“तो क्या तुम अपने घर पर दिवाली पूजन नहीं करोगे!”  चन्दन ने हैरानी से पूछा।

“बाबा जी कह रहे थे कि मम्मा-पापा थोड़ी देर के लिए घर जाकर पूजन करके फिर अगर आना चाहे तो आश्रम आ जाएंगे, मगर मैं वहीं आश्रम में ही रूकुंगी। बाबा जी मुझे बहुत प्यार करते हैं कहते हैं तू मेरी आंखों से दूर न जाया कर” मुस्कुराते हुए सवि ने कहा लेकिन उसकी इस बात पर चन्दन के तन-बदन में आग लग गई। वो अच्छे से समझता था इन बाबाओं की फितरत को।

आखिर कार एक ब्यूरो वाले के थ्रू सवि के घरवालों के पास रिश्ता पहुंचा तो वो चन्दन की जन्म कुंडली लेकर बाबा जी के पास गए।

“बाबा जी ये सवि के लिए रिश्ता आया है, आप देख कर बताएं क्या जवाब दिया जाए?”

“मना कर दो…. नहीं करनी सवि की शादी कहीं भी” बाबा जी थोड़ा गुस्से से बोले तो सवि के माता-पिता को अचम्भा हुआ।

“बाबा जी आप ऐसे क्यूं कह रहे हैं ? सवि की शादी क्यों नहीं करनी”

तब बाबा जी को अपनी ग़लती का एहसास हुआ और बोले,”पुत्र मेरा कहने का वो मतलब नहीं  कि सवि की शादी ही नहीं करनी, मेरा कहने का अर्थ है कि इस लड़के से कदापि नहीं क्योंकि इस लड़के की कुंडली में बहुत बड़ा दोष है। देखो केवल कुंडली देखते ही मेरा माथा घूम गया” इस तरह से अपनी बात को सम्हालते हुए बाबा जी बोले।

जब चन्दन और उसके माता-पिता को पता चला तो वो भी सकते में आ गए।

“मम्मा क्या मेरी कुंडली में कोई दोष है?”

“नहीं बेटा ऐसा कुछ भी नहीं है। वैसे तो मैं इस कुंडली मिलान जैसे ढकोसले में विश्वास नहीं रखती जब दिल मिल गए तो कुंडली का क्या करना। मगर जब तुमने सवि के पेरेंट्स के विचार बताए तो मुझे लगा कि पहले कुंडली मिलवा ही लूं कहीं ऐसा ना हो वो कुंडली मिलान को लेकर कोई अड़चन न खड़ी कर दें। तुझे याद होगा एक दिन मैंने तुझसे सवि की बर्थ डेट ली थी। जब कुंडली मिलवाने के लिए पंडित जी को दिखाई तो पंडित जी बोले बहुत ही सुंदर मेल है दोनों बच्चों का। कुंडली बहुत अच्छे गुणों से मिली थी”

लेकिन अब चन्दन सब जान गया था कि कुंडली का न मिलना बाबा की चाल है और सवि के माता-पिता को इस तरह के ढकोसले में घेरना भी बाबा की तरकीबों में शामिल हैं।

“सवि मुझे तुमसे मिलना है अभी इसी वक्त”

“ठीक है मैं वहीं पहुंच रही हूंँ जो हमारा फेवरेट प्लेस है”

दोनों अपने गंतव्य पर पहुंच गए।

“सवि ये क्या नया ड्रामा है कुंडलियों का ?”  चन्दन पूरी तरह से गुस्से से भरा हुआ था।

“चन्दन मैं क्या करूं बाबा जी कहते हैं तुम्हारी और मेरी कुंडली एक दूसरे के विपरित है अर्थात अगर हमारी शादी हुई तो अगले ही दिन हम दोनों में से एक की मृत्यु निश्चित है। इसलिए मेरे पेरेंट्स नहीं मानते इस शादी के लिए। बस अब तो एक ही रास्ता है कि हम दोनों घर से भाग कर शादी करें लेकिन फिर बाबा जी की बात से भी मन डरता है। बाबा जी की भविष्यवाणी कभी झूठी नहीं होती”

“साॅरी सवि मैं चोरी-छिपे शादी करके अपने और अपने पेरेंट्स या तुम्हारे परिवार को इस तरह की ज़िल्लत नहीं दिला सकता। जिसमें न जी सकें हम और न मर सकें। मैं वो ज़िन्दगी न तुम्हें दे सकता हूं और न ही खुद के ऐसी ज़िन्दगी चुन सकता हूंँ और रही तुम्हारे बाबा जी पर विश्वास की बात। तुम्हें बाबा की बातों पर विश्वास है तो आज से हमारे रास्ते जुदा हैं‌ तुम्हें तुम्हारे उसूल और तुम्हारा आश्रम मुबारक।

दुआ करता हूंँ तुम्हारा आने वाला कल सुन्दर और सुरक्षित हो। कहीं ऐसा न हो आज की ग़लती का भुगतान  ता-उम्र करना पड़े” कह कर चन्दन एक पल भी नहीं रूका अगले ही दिन उसने आस्ट्रेलिया की टिकट बुक करवा ली। Emotional Love Story

 

 

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