Student Protest: 22 जुलाई 2026 को संसद में अखिलेश यादव ने वो बात उठाई जो पूरे देश का जमीर हिला रही है. अखिलेश ने जंतर मंतर पर युवाओं के साथ हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया. जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ मारपीट हुई. बच्चों की हड्डियां टूटी हैं, लड़कियों के साथ धक्का-मुक्की हुई है और कई अभी भी लापता हैं. अखिलेश यादव के सवाल के जवाब में स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि “सरकार पेपर लीक पर चर्चा को तैयार है” हैरानी की बात है कि सरकार को अब भी लगता है कि सारा मुद्दा सिर्फ पेपर लीक का है?
मुद्दा अब पेपर लीक से बहुत आगे निकल चुका है. अब सवाल यह है कि क्या इस देश में सवाल पूछना जुर्म है? क्या जनता को प्रोटेस्ट का भी अधिकार नहीं रह गया है? क्या शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट करने वाले बच्चों को थाने में बंद करना, पीटना और डराना कोई मायने नहीं रखता? हजारों की तादात में युवा अब भी सड़कों पर हैं और सरकार संसद में बैठकर कह रही है “हम पेपर लीक पर चर्चा को तैयार हैं” यह बेहद शर्मनाक स्थिति है. सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के जन्मदिन पर उन्हें ओजस्वी मंत्री कहते हुए ट्विट कर सकते हैं उनके अंदर घायल बच्चों के लिए कोई संवेदना नहीं.
यह पूरे आरएसएस और उसकी सरकार की सबसे बड़ी बेशर्मी ही है. छात्र घायल हैं, लड़कियां डरी हुई हैं, परिवार थानों के चक्कर काट रहे हैं और सरकार अब भी सिर्फ पेपर लीक पर चर्चा करने की बात कह रही है. सरकार को डर है कि अगर “पुलिसिया बर्बरता” पर चर्चा हुई तो जिम्मेदारी तय होगी इसलिए जानबूझकर मुद्दे को पीछे धकेला जा रहा है लेकिन सच्चाई यही है की लाठियों से जनता की आवाज दबती नहीं, और ज्यादा तेज होती है. लाला लाजपत राय के सिर पर लगी सिर्फ एक लाठी के बाद ही देश की जनता जाग गई थी और अंग्रेजों की सत्ता को उखाड़ फेंकने को तैयार हो गई थी. देश अब सिर्फ पेपर लीक पर चर्चा नहीं बल्कि इंसाफ मांग रहा है और इंसाफ तब तक नहीं मिलेगा जब तक सरकार अपनी निर्लज्जता छोड़कर जवाबदेही नहीं अपनाएगी. Student Protest





