Family Story in Hindi : सुमन ने तो पहली बार मिलते ही मोहिका को अपनी बेटी मान लिया था लेकिन मोहिका थी कि सुमन को सिर्फ सौतेली मां ही मानती रही. सुमन मोहिका की यह नफरत फिर भी सहती जा रही थी.

घड़ी की सूई की तरह सुमन का कलेजा धकधक कर रहा था. मन में बुरेबुरे विचार आजा रहे थे. समझ नहीं आ रहा था उसे कि वह क्या करे. पति विराज हफ्तेभर बाद औफिस टूर से लौट कर आराम से सो रहे थे, इसलिए उसे सोते से जगा भी नहीं सकती वह लेकिन उसे कैसे नींद आ सकती है जब जवान बेटी घर से बाहर हो.

विराज और सुमन की बेटी मोहिका बोल कर तो यही गई थी कि वह साढ़े 10 बजे तक घर आ जाएगी लेकिन रात के 12 बजने को हैं और अभी तक उस का अतापता नहीं है. दरअसल, मोहिका अपने एक दोस्त के जन्मदिन की पार्टी में गई थी. उस ने कहा था कि वह जल्दी आ जाएगी. मगर अभी तक वह घर नहीं आई है, फोन भी नहीं उठा रही. अब तो उस का फोन बंद आ रहा है. उस के कई दोस्तों को कौल कर के पूछा उस ने मोहिका के बारे में लेकिन सब ने यही कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता कि वह कहां है.

क्या करूं अब मैं, हां, राजवी से पूछती हूं. शायद उसे पता हो क्योंकि मोहिका ने कहा था कि वह राजवी के साथ ही यश के जन्मदिन की पार्टी में जाने वाली है. अपने मन में सोच उस ने राजवी को फोन लगाया. उस ने भी यही उत्तर दिया कि उसे नहीं पता कि मोहिका कहां है.

‘‘अरे, ऐसेकैसे नहीं पता है मोहिका तुम्हारे साथ ही पार्टी में गई थी न?’’ सुमन को गुस्सा आ गया अब. एक तो वह वैसे ही मोहिका के फोन बंद आने को ले कर परेशान है, ऊपर से यह राजवी कह रही है कि उसे नहीं पता कि वो कहां है.

‘‘देखो बेटा, मैं क्या कह रही हूं, मोहिका तुम्हारे साथ ही यश के जन्मदिन की पार्टी में गई थी न, तो तुम्हें तो पता होगा न कि वह कहां है.’’ उस पर राजवी बोली कि नहीं, वह उस के साथ पार्टी में नहीं गई थी बल्कि वह और आदिल साथ में यश की पार्टी में गए थे.

‘‘आदिल, यह आदिल कौन है?’’ वह पूछ ही रही थी कि तभी दरवाजे पर बाइक रुकने की आवाज आई. वह दौड़ कर बालकनी में गई. तब तक बाइक फुर्र हो चुकी थी. पता ही नहीं चल पाया कि कौन था वह लड़का. सुमन झटक कर दरवाजा खोलने गई. अपने सामने मोहिका को सहीसलामत देख सुमन की जान में जान आई लेकिन दूसरे ही पल उस का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया क्योंकि यह कोई टाइम है घर आने का? पता भी है उसे, इतनी देर में वह कितनी मौतें मरी है.

दिल्ली शहर वैसे भी लड़कियों के लिए सेफ नहीं रहा अब. और जब जवान बेटी यों इतनी रात गए घर से बाहर हो तो मां को तो चिंता होगी ही न. ऊपर से उस का फोन भी बंद आ रहा था. उसे लगा कि कहीं मोहिका के साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया. इंसान की फितरत है कि उस के दिमाग में पहले नैगेटिव विचार ही आते हैं.

‘‘कहां थी तुम इतनी देर तक और यह लड़का कौन था जो तुम्हें बाइक से छोड़ कर गया? बोलो? तुम्हारा फोन भी बंद आ रहा था, क्यों? पता भी है मेरी क्या हालत हो गई थी?’’

सुमन की बातों का कोई जवाब दिए बगैर मोहिका सीधे अपने कमरे में चली गई.  जैसे उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा उस की बातों का. ‘‘मैं तुम से कुछ पूछ रही हूं मोहि, जवाब क्यों नहीं देती? कहां और किस के साथ थी तुम इतनी रात तक?’’

‘‘नहीं दूंगी, क्या करोगी?’’ तन कर मोहिका बोली, ‘‘और होती कौन हो आप मुझ से इस तरह से सवाल करने वाली, हां? मैं जहां जाऊं, जब आऊं, जिस के साथ जाऊं मेरी मरजी.’’

‘‘मोहिका,’’ तभी पीछे से विराज गरजा, यह क्या तरीका है अपनी मां से बात करने का? वह कुछ पूछ रही है, जवाब दो?

‘‘नहीं दूंगी, क्योंकि यह मेरी मां नहीं है, समझे आप,’’ कह कर उस ने इतनी जोर से अपने कमरे का दरवाजा बंद किया कि सुमन कांप उठी.

‘‘मोहिका, दरवाजा खोलो,’’ विराज ने जोर से दरवाजे पर मुक्का मारा, फिर आगे कहा, ‘‘दरवाजा खोलो. वरना मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

‘‘नहीं खोलूंगी, तोड़ दो दरवाजा. जो करना है, कर लो. मैं दरवाजा नहीं खोलूंगी,’’ वह भी कमरे से गरजी, ‘‘क्यों पीछे पड़े हो मेरे? जीने क्यों नहीं देते मुझे? बोलो मर जाऊं?’’

‘‘न, नहीं बेटा, ऐसा मत कहो. देखो, देखो हम कुछ नहीं बोल रहे हैं, तुम्हें जो करना है, करो,’’ बाहर से सुमन घिघियाते हुए बोली और उस ने हाथ जोड़ कर विराज से भी चुप रहने को कहा. डर गई वह कि कहीं मोहिका कुछ कर न ले. अगर उस ने कुछ कर डाला तो फिर क्या वह जी पाएगी उस के बगैर?

‘‘आप तो चुप ही रहो,’’ धड़ाक से दरवाजा खोलते हुए वह बोली, ‘‘आप ने ही मेरे पापा को मेरे खिलाफ भड़काया है न. सबकुछ तो छीन लिया आप ने मुझ से. अब जीने भी नहीं दोगी?’’

‘‘ज्यादा बकवास कर रही है. यह तुम्हें जीने नहीं दे रही या तुम इसे…’’ विराज आगे कुछ और बोलता, उस से पहले ही सुमन ने उस का हाथ पकड़ लिया और आंख के इशारे से चुप रहने को कहा. सुमन जानती है मोहिका के स्वभाव को. बहुत जिद्दी है. कुछ नहीं समझती, उलटे और चिल्लाने लगती है. इतनी रात गए, आसपड़ोस के लोग क्या सोचेंगे, यह सोच कर उस ने विराज को चुप रहने का इशारा किया. विराज तो थोड़ी देर बाद सो गया लेकिन सुमन की आंखों से नींद गायब हो चुकी थी. कैसे नींद आती उसे जब उस की ही बेटी उस पर इलजाम पर इलजाम लगाए जा रही तो.

उस की आंखों से टपटप कर आंसू बहे जा रहे थे यह सोच कर कि मोहिका को तो उस ने उसी दिन अपनी बेटी मान लिया था जब विराज उसे देखने आए थे और कहा था कि वह सिर्फ अपनी बेटी मोहिका की खातिर दूसरा विवाह कर रहे हैं, ताकि उस की बेटी को एक मां मिल सके. सुमन ने भी एक मां की तरह मोहिका को अपने सीने से लगा लिया था लेकिन शादी के इन 18 सालों में मोहिका ने कभी उसे अपनी मां नहीं माना.

मोहिका जब 3 साल की थी तभी एक गंभीर बीमारी के चलते उस की मां चल बसी. बूढ़ी दादी ने जैसेतैसे कर उसे कुछ दिन संभाला लेकिन उस के जीवन का भी क्या भरोसा, यही सोच कर उस ने अपने बेटे विराज से कहा कि अपनी बेटी के लिए वह दूसरा विवाह कर ले. विराज अपनी मां की बातों से सहमत तो हुआ पर कोई ऐसी लड़की मिल नहीं रही थी उसे जो एक बच्चे के पिता से विवाह को तैयार हो. किसी को भी बच्चे की झंझट नहीं चाहिए थी.

तभी उसे सुमन के बारे में पता चला. सुमन का भी पहले एक विवाह हो चुका था. पति फौज में था लेकिन शादी के एक साल बाद ही उस का फौजी पति एक युद्ध में शहीद हो गया. बेटे के गम में सुमन के ससुर भी दुनिया से चल बसे तो ससुराल वालों ने उसे अपशगुनी कह कर घर से निकाल दिया.

यहां मायके में भी भाईभाभी उसे बोझ समझने लगे थे. उस की बूढ़ी मां तो खुद बेटेबहू पर आश्रित थी तो वह क्या ही कहती लेकिन रोजरोज बेटी की दुर्दशा होते देख वह रोती और सोचती कि काश, फिर से बेटी का घर बस जाए तो वह चैन से जी पाए.

तभी एक दिन सुमन की चचेरी बहन उस के लिए विराज का रिश्ता ले कर आई. उस ने बताया कि विराज की पहली पत्नी मर चुकी है और उस की एक 4 साल की बेटी है. अगर सुमन की शादी विराज से हो जाती है तो उसे इस नरक से छुटकारा तो मिल ही जाएगा, एक बच्ची को उस की मां भी मिल जाएगी. उस ने यह भी कहा कि वह विराज को सुमन के बारे में सबकुछ बता चुकी है और वह सुमन से शादी के लिए तैयार है लेकिन सुमन का मत भी जानना जरूरी था कि क्या वह एक बच्चे के पिता से विवाह करने को तैयार है. कहीं बाद में ऐसा न हो कि मासूम सी मोहिका नैग्लेक्ट हो जाए? इसलिए सारी बात शादी से पहले ही क्लियर हो जाए तो अच्छा. और इस के लिए सुमन और विराज का एकदूसरे से मिलना जरूरी था.

उस दिन जब विराज अपनी बेटी मोहिका को ले कर सुमन से मिलने उस के घर पहुंचा तो बिना कोई सवाल किए उस ने मोहिका को अपनी गोद में उठा लिया और उसे पुचकारने लगी थी और मोहिका भी कैसे सुमन से लिपट गई थी जैसे वह उसे बहुत पहले से जानती हो.

शादी के बाद जब वह विराज के घर उस की दुलहन बन कर आई, उसी दिन से उस ने मोहिका को अपनी बेटी मान लिया था. उस के जीवन में मोहिका का सब से पहला स्थान था. उस का खानापीना, उस की देखभाल की सारी जिम्मेदारी सुमन ने ओढ़ ली थी. मोहिका की आंखों से ही वह सोती और उस की आंखों से ही जागती थी. उस की आंखों में कभी एक बूंद आंसू भी आ जाए तो वह तड़प उठती थी.

कोई भी मां अपनी बेटी को इस हद तक प्यार नहीं करती होगी जैसे सुमन मोहिका से करती थी. उस के सुख के लिए वह अपने सुखचैन की परवा न करती थी. मोहिका भी सुमन का आंचल पकड़े घूमती रहती. कोई उसे अपने पास बुलाता तो वह जा कर सुमन की गोद में छिप जाती थी. उस वक्त सुमन निहाल हो उठती थी.

उस वक्त मोहिका 6 साल की थी जब सुमन की तबीयत बहुत खराब हो गई और उसे अस्पताल में भरती करवाना पड़ा था लेकिन वह एक दिन भी अस्पताल में नहीं रह पाई मोहिका के बिना. उसे देख कर कोई कह ही नहीं सकता था कि वो मोहिका की सगी मां नहीं है.

वक्त के साथ जैसेजैसे मोहिका बड़ी होती जा रही थी, उस के व्यवहार में बदलाव दिखने लगा था. बहुत जिद्दी हो गई थी वह. कुछ सुनती ही नहीं थी सुमन की. कुछ बोलने पर चिल्लाती, घर के सामान फेंकती और अपनी नानीमौसी से फोन पर सुमन की शिकायत करती कि उस की मां बहुत बुरी औरत है.

वह जबतब अपनी नानी के घर जाने की जिद करती. उस के जिद्दीपन पर सुमन जब कड़े से उसे समझती कि वहां बारबार जाने से उस की पढ़ाई पर असर पड़ेगा, घर में जो मैम उसे ट्यूशन पढ़ाने आती हैं, वह वापस चली जाएंगी, इसलिए रोजरोज वहां जाने की जरूरत

ही क्या है? तो वह रोतेबिलखते फोन पर अपनी नानी से सुमन की शिकायत करती और कहती वह उसे यहां से आ कर ले जाए. उस की नानी उसे समझने के बजाय सुमन को ही खूब खरीखोटी सुना डालतीं और कहतीं कि सौतेली मां कभी सगी नहीं बन सकती.

सुमन खूब रोती और सोचती कि सौतेली मां इतनी बुरी क्यों मानी जाती है समाज में? आखिर, क्यों एक मां के पीछे सौतेली शब्द जोड़ दिया गया है. मां तो मां होती है, फिर इसे सौतेली कह कर कलंकित क्यों किया जाता रहा है? अब और क्या करे वह मोहिका के लिए जिस से सब को लगे कि सच में वह उसे अपनी बेटी मानती है.

मोहिका की मां बनना सुमन के लिए इतना भी आसान न था. रोज वह नईनई चुनौतियों से गुजरती थी. साबित करना पड़ता था उसे कि सच में वह मोहिका को अपनी बेटी मानती है. चलो, यह भी ठीक है लेकिन अब मोहिका भी उसे सौतेली मां समझने लगी थी. उसे लगता कि वह उसे उस के पापा से अलग कर देगी, सबकुछ छीन लेगी और अपना बच्चा होते ही मोहिका को इस घर से दूर कर देगी. ये सारी बातें उस के दिमाग में उस की नानी ही भरती थीं. सब पता था सुमन को लेकिन फिर भी चुप थी.

विराज से कुछ कह भी नहीं सकती थी इस बारे में, क्योंकि उस पर काम का वैसे ही बहुत लोड था तो वह उसे क्या ही टैंशन देती लेकिन सुमन जिस तनाव और परेशानी से गुजर रही थी, वही जान रही थी. एक दिन उस ने मोहिका को अपने पास बिठा कर समझना चाहा कि जैसा वह समझ रही है, ऐसा कुछ भी नहीं है और उस की नानी उसे गलत बात सिखा रही हैं, इसलिए उन की बातों पर ध्यान न दे लेकिन उस की बात समझने के बजाय मोहिका अपनी मां से ही लड़ने लगी कि वह उसे उस की नानी के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रही है.

मोहिका सुमन की कोई भी बात नहीं सुनती. वह जो कहती उस का उलटा ही करती और जब विराज उसे उस की गलतियों पर डांट लगाता तो उसे लगता कि उस की नानी सही ही कहती है कि उस की सौतेली मां उसे पापा से दूर कर देगी जबकि विराज उसे इसलिए डांट लगाता क्योंकि वह बहुत जिद्दी हो गई थी. पढ़ाईलिखाई से भी उस का ध्यान भटकने लगा था जबकि सुमन तो और उसे रोकती कि जाने दो, बच्ची है अभी. बड़ी होगी तो सब समझ जाएगी.

‘‘बच्ची नहीं रही अब. बड़ी हो चुकी है यह,’’ विराज ने आंख कड़ी करते हुए कहा था, ‘‘हर बात में जिद, गुस्सा सही नहीं है, सुमन. तुम मां हो इस की, समझओ इसे दुनियादारी के बारे में.’’ लेकिन सुमन की कहां कुछ सुनती थी वह जो उसे समझती कुछ. मोहिका को तो अपनी नानी की बातें ही सच लगती थीं. उसे तो अपनी नानी सगी और सुमन दुश्मन लगती थी. तभी तो बातबात पर वह सुमन की गलतियां निकालती, उस पर चीखतीचिल्लाती, उसे भलाबुरा कहती और सुमन सब सह जाती थी यह सोच कर कि बच्ची है अभी.

मोहिका की नानी का घर यहीं दिल्ली में ही है, इसलिए अकसर वह उन के घर जाती रहती थी और वहां से वह मोहिका का ब्रेनवाश कर के भेजती थी क्योंकि वहां से आते ही सुमन के साथ उस का व्यवहार बहुत खराब हो जाता था.

उस रोज मोहिका अपने मांपापा के कमरे से आती आवाज कान लगा कर सुन रही थी. उस के पापा सुमन से कह रहे थे कि नहीं, अब वह उस की जान जोखिम में नहीं डाल सकता है. इसलिए जो हो रहा है, होने दो. उस पर सुमन बोली कि नहीं, यह सही नहीं है. वह ऐसा नहीं कर सकती है. इसलिए वह अस्पताल जा रही है. मोहिका को दोनों की बातें कुछ समझ नहीं आईं. इसलिए वह वहां से हट गई. शाम को जब वह घर आई तो पता चला कि सुमन अस्पताल में भरती है.

सुमन के घर में न होने के कारण मोहिका अपनी नानी के घर चली गई. इधर अस्पताल से घर आने के बाद भी सुमन बीमार ही रही. शारीरिक दुर्बलता के कारण उस से ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. विराज ने एक औरत को रख दिया जो पूरे दिन सुमन की देखभाल कर सके और उस के खानेपीने का ध्यान रख सके. वह औरत सुमन का बहुत ध्यान रखती थी. उस के हाथपांव भी दबाती लेकिन यह बात मोहिका की नानी को सहन नहीं हो पा रही थी. इसलिए उस ने मोहिका के मन में सुमन के खिलाफ और जहर भरना शुरू कर दिया कि उस की सौतेली मां उस के पापा की सारी कमाई अपने ऐशोआराम में लुटा देगी.

मोहिका को भी लगने लगा कि सुमन उस के पापा के सारे पैसे अपने पर लुटा देगी. यह घरपैसे सब ले लेगी वह. मतलब कि मोहिका के मन में उस की नानी ने इतना जहर भर दिया कि सुमन उसे अपनी दुश्मन नजर आने लगी.

सुमन समझ रही थी लेकिन क्या करती. कुछ कहती तो और बुरी बनती. मोहिका एक नाजुक डाल है जिसे जबरदस्ती नहीं, बल्कि धीरेधीरे ही झकाया जा सकता है और वह यही कोशिश कर रही थी. मगर उस की सारी कोशिश व्यर्थ जा रही थी, क्योंकि उस की नानी आग में घी डालने का काम जो कर रही थीं.

मोहिका भले ही अपनी सौतेली मां को अपना दुश्मन समझने लगी थी और उस से नफरत करने लगी थी लेकिन सुमन ऐसा कैसे कर सकती थी क्योंकि उस ने तो दिल से मोहिका को अपनी बेटी माना था और यह रिश्ता मरते दम तक नहीं टूट सकता था.

खैर, दिन यों ही बीतते जा रहे थे. मोहिका अब 22 साल की युवती बन चुकी थी और कालेज के थर्ड ईयर में चली गई थी. उस का रूपयौवन खूब निखर आया था. सुमन उस पर निहाल हुई जाती थी. मन करता उस का कि बेटी को गले से लगाए, उसे प्यार करे, उस के बाल संवारे लेकिन हिम्मत नहीं पड़ती थी उस की.

भले ही मोहिका की नानी अब इस दुनिया में नहीं रहीं लेकिन उस ने मोहिका के मन में सुमन के खिलाफ जो जहर का बीज बोया, अब वह पौधा बन चुका था. उसे सुमन एक आंख नहीं सुहाती थी, यहां तक कि, विराज का उस से हंस कर बातें करना, कुछ ला कर देना, कहीं बाहर घुमाने ले कर जाना उसे बरदाश्त नहीं होता था. जब भी विराज कुछ ऐसा करना चाहता, वह कोई न कोई अड़ंगा लगा देती, ताकि दोनों साथ में समय न बिता सकें. सुमन सब समझते हुए भी चुप रहती और बरदाश्त करती, क्योंकि इस के सिवा उस के पास और कोई चारा भी तो नहीं था लेकिन विश्वास था उसे कि एक न एक दिन सारी धुंध छंट जाएगी और मोहिका उस के पास वापस लौट आएगी.

विराज का टूरिंग जौब था. वह ज्यादातर बाहर ही जाता रहता है. पैसे तो बहुत थे इस जौब में लेकिन अपने परिवार के साथ समय बिताने का उसे बहुत कम ही मौका मिल पाता पर इस बात को ले कर निश्चिंत था कि सुमन है मोहिका को संभालने के लिए. हां, सुमन तो है ही और वह आज भी अपनी सभी जिम्मेदारियां वैसे ही निभा रही है लेकिन इधर मोहिका में अजीब तरह का बदलाव देख दंग थी सुमन. देररात तक फोन पर किसी से हंसहंस कर बातें करना और सुमन पर नजर पड़ते ही ‘आई कौल यू लेटर’ बोल कर फोन रख देना, समय से पहले कालेज चले जाना और देर से आना, आखिर क्या है ये सब? ये सब बात वह विराज से भी नहीं बोल सकती, वरना मोहिका की नजर में वह और बुरी बन जाएगी. युवा अवस्था दौर ही ऐसा होता है. युवा बच्चों के कदम डगमगा जाते हैं. कहीं मोहिका भी कुछ गलत तो नहीं. नहींनहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं फालतू की बातें सोच रही हूं, सुमन अपने दिमाग को झटकते हुए खुद को चुप करा देती लेकिन फिर सोचती कि एक बार पूछने में हर्ज ही क्या है. इतना तो पूछ ही सकती है कि वह कौन है जिस से वह देररात तक बातें करती रहती है लेकिन अगर वह गुस्सा हो गई तो? सुमन के मन में कितने सारे सवाल फन उठा कर खड़े हो जाएं लेकिन उस की हिम्मत नहीं होती मोहिका से कुछ कहने या पूछने की, दिन यों ही बीतते जा रहे थे.

‘‘आदिल, सच बताओ, तुम मुझ से प्यार तो करते हो न?’’ रोज की तरह उस कौफीहाउस में बैठी मोहिका ने आदिल का हाथ अपने हाथ में लेते हुए पूछा. आदिल और मोहिका स्कूल के समय से दोस्त थे और अब यह दोस्ती प्यार का रूप ले चुकी थी. दोनों ने अपनी शादी को ले कर कई सारे सपने बुन डाले थे. ‘‘बोलो न आदिल, प्यार तो करते हो न, मुझ से?’’

‘‘हां, पर आज अचानक से यह सवाल क्यों?’’

‘‘बस, ऐसे ही,’’ मोहिका बोली, ‘‘जानते हो, जब तुम उस सौम्या से बात करते हो न तो मेरा कलेजा जल उठता है. कल तुम जब उस से हंसहंस कर बात कर रहे थे न तो मेरा तो मन किया कि मैं उस का गला ही दबा दूं,’’ मोहिका ने दांत भींचते हुए कहा.

‘‘अरे, बसबस,’’ आदिल हंसा, ‘‘पागल, ऐसा कुछ भी नहीं है. तुम्हें तो पता है, मैं और सौम्या वौलीबौल में हैं, तो उसी के बारे में डिस्कस कर रहे थे.’’

‘‘वह सब मुझे नहीं पता, पर तुम उस से ज्यादा बात नहीं करोगे, समझे,’’ मोहिका ने मासूम सा मुंह बनाते हुए कहा.

‘‘ठीक है भई, नहीं करूंगा, बस,’’ यह कह कर आदिल ने 2 कप कौफी और्डर किया और फिर दोनों कौफी पीते हुए बातें करने लगे कि तभी मोहिका के फोन पर सुमन का फोन आ गया.

‘‘यह लो मदर इंडिया का फोन आ गया. पर मैं उठाने वाली नहीं, भले बजता रहे फोन,’’ मोहिका ने मुंह बनाते फोन को एक तरफ रख दिया और आदिल से बातें करने लगी. फिर सुमन का कई बार फोन आया पर वह इग्नोर ही करती रही.

‘‘अरे, फोन उठा तो लो. पता नहीं कोई जरूरी बात करनी हो उन्हें?’’ आदिल के बहुत कहने पर भी उस ने सुमन का फोन नहीं उठाया.

‘‘अजीब हो तुम भी, क्या प्रौब्लम है तुम्हें उन से? समय तुम्हारा अच्छा है कि तुम्हारे पास मां तो है, सौतेली ही सही. कोई तो है घर में जो तुम्हारी चिंता करती है. मैं ने तो अपनी मां को देखा तक नहीं. मुझे जन्म देते ही वे चल बसीं. जान ही नहीं पाया कभी कि मां होती क्या है और उन का प्यार कैसा होता है. सही कह रहा हूं. तुम समय की बलवान हो जो तुम्हारे पास मां है.’’ आदिल की बात पर मोहिका ने अजीब सा मुंह बनाया.

‘‘ऐसे मुंह मत बनाओ, सही कह रहा हूं मैं. तुम कहती हो कि वे तुम्हारी सौतेली मां हैं और तुम से प्यार नहीं करतीं. अगर ऐसा ही है तो वे अपना बच्चा करतीं न? बोलो, क्यों नहीं किया आज तक? कभी यह सोचा है तुम ने? तुम्हें ही वे प्यार करती रहीं, तुम्हें ही अपना सबकुछ मानती रहीं और तुम ने क्या दिया उन्हें- नफरत, बेइज्जती, तिरस्कार? लेकिन इस के बावजूद, वे तुम्हारी इतनी चिंता करती हैं और तुम कहती हो कि वे तुम से प्यार नहीं करतीं?

‘‘मुझे यह सब नहीं पता कि उन्होंने अपना बच्चा क्यों नहीं किया और मैं जानना भी नहीं चाहती. मैं तो बस यही जानती हूं कि वह औरत मेरी सौतेली मां है और सौतेली मां कभी अपनी मां नहीं बन सकती.’’

‘‘अब तुम्हारी यही सोच है तो मैं क्या ही कह सकता हूं लेकिन एक बार उन्हें जानने की कोशिश जरूर करना वरना बाद में पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं आएगा, समझ लो,’’ कह कर आदिल चलता बना और वह उसे जाते देखती रह गई.

रोज की तरह मोहिका रात के 8 बजे घर पहुंची और फिर डुप्लीकेट चाबी से दरवाजा खोल कर अंदर आ गई. सुमन ने कैसरोल में खाना रख दिया था. खाना खा कर वह अपने कमरे में जा कर सो गई. आधी रात को सुमन के कमरे से जोरजोर से खांसने की आवाज से मोहिका की नींद खुल गई. पापा घर पर नहीं थे इसलिए मोहिका सुमन के कमरे में चली गई उसे देखने.

‘‘क्या हुआ आप को? कुछ चाहिए? पानी, पानी चाहिए? लाती हूं.’’ जब वह सुमन को पानी देने लगी तो उस का हाथ उसे आग जैसा गरम लगा, ‘‘आप को बुखार है?’’

‘‘हां, सुबह से मन ठीक नहीं लग रहा है,’’ धीरे से सुमन बोली.

‘‘दवा ली आप ने?’’ मोहिका के पूछने पर वह बोली कि उस से उठा नहीं जा रहा है.

‘‘कहां पर है दवा?’’ इशारे से सुमन ने बताया कि उस अलमारी के पहले खाने में बुखार की दवा रखी है.

‘‘ठीक है,’’ कह कर वह अलमारी से दवा निकालने ही लगी कि भरभरा कर ऊपर से एक फाइल उस के सिर पर आ कर गिरी. ‘‘यह क्या है, मैडिकल की फाइल लग रही है.’’ वह पन्ना पलट कर देखने लगी तो उस की आंखें फटी की फटी रह गईं. ‘अबौर्शन, नाम- सुमन कश्यप.’

मोहिका ने पलट कर सुमन को देखा, जो बेसुध पड़ी थी. यानी मां ने अपना अबौर्शन करवाया वह भी 2 बार. पर क्यों, जब वे मां बन सकती थीं, फिर क्यों इन्होंने अपना बच्चा अबौट करवाया. मोहिका को आदिल की कही बात याद आने लगी जो उस ने कहा था कि कभी पूछा उस ने कि सुमन ने अपना बच्चा क्यों नहीं किया? अगर वह उस से सच में प्यार नहीं करती है तो अपना बच्चा करती न? क्यों नहीं किया फिर?

ओह, इतना बड़ा त्याग किया इन्होंने मेरे लिए. और मैं इन से नफरत करती रही आज तक?

‘‘मां, मुझे माफ कर दो’’ कह कर मोहिका सुमन से लिपट कर फूटफूट कर रोने लगी. सुमन तो घबरा ही गई एकदम से कि मोहिका को क्या हो गया.

‘‘क्या हुआ, बेटा, रो क्यों रही हो? किसी ने तुम से कुछ कहा क्या? बोलो न?’’ सुमन की बात पर मोहिका सिसकसिसक कर कहने लगी कि उस से उसे समझने में बड़ी भूल हो गई. वे उसे माफ कर दें.

‘‘पागल, मेरी बेटी,’’ सुमन ने मोहिका का माथा चूम लिया, ‘‘ऐसी कोई बात नहीं है, बेटा.’’

‘‘मां, एक बात पूछूं आप से, आप ने अपना बच्चा क्यों नहीं किया?’’

‘‘इसलिए, क्योंकि मैं पहले से ही एक प्यारी सी बेटी की मां थी तो फिर और बच्चा करने की क्या जरुरत थी,’’ प्यार से मोहिका का सिर सहलाते हुए सुमन कहने लगी, ‘‘मेरा प्यार, मेरा सबकुछ सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए है मेरी बच्ची. मैं इसे किसी के साथ बांट थोड़े न सकती थी.’’

‘‘मां, आप कितनी अच्छी हो और मैं ने आप को कितना गलत समझ लिया. अरे, मैं दवा देना तो भूल ही गई आप को.’’

‘‘अब कोई दवा की जरूरत नहीं है. मैं बिलकुल ठीक हो गई, देखो,’’ सुमन खिलखिला कर हंसते हुए बोली, ‘‘वैसे मुझे आदिल से कब मिलवा रही हो?’’

‘‘आदिल, लेकिन आप को आदिल के बारे में कैसे पता?’’ एक बच्ची की तरह अपने आंसू पोंछते हुए सवालिया नजर से मोहिका बोली.

‘‘सब पता है मुझे. यह भी कि तुम दोनों एकदूसरे से प्रेम करते हो. बोलो, मैं सच कह रही हूं?’’ सुमन की बात पर मोहिका शरमा गई और फिर फफक कर रोने लगी. सुमन भी रोए जा रही थी. मांबेटी के इन आंसुओं में सारी धुंध छंट चुकी थी. अब कोई गिलाशिकवा नहीं था उन के बीच. Family Story in Hindi

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