Epstein files : एपस्टीन फाइल में नाम आने के बाद दुनिया भर के बड़े नामों में से कइयों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया तो कइयों की गिरफ्तारियां हुई हैं. इनमें नेता, व्यवसायी, शाही घराने के सदस्य और कई सेलेब्रिटीज शामिल हैं. मगर भारत सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है जबकि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम इन फाइलों में प्रमुखता से आया है.

अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस ने एपस्टीन फाइल्स का कुछ अंश जारी कर दिया है. नाबालिग लड़कियों से यौन शोषण के संगठित नेटवर्क का दोषी जेफ्री एपस्टीन और उससे जुड़े दुनिया के तमाम नामचीन लोगों के कारनामे अब पब्लिक डोमेन में हैं. जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी कोई 30 लाख फ़ाइलें अभी तक रिलीज़ हुई हैं और लाखों फाइलें रिलीज होनी बाकी हैं. इन फाइलों में दुनिया के धुरंधर और चर्चित राजनेताओं, उद्यमियों और सेलेब्रिटीज का नाम शामिल है, जिनके इस नरपिशाच से करीबी रिश्तों का जिक्र फाइलों में हैं. एपस्टीन के नजदीकियों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, हिलेरी क्लिंटन, बिल क्लिंटन, एलोन मस्क, बिल गेट्स, माइकल जैक्सन के नाम सुन कर लोग सकते में हैं.

एपस्टीन फाइल में नाम आने के बाद दुनिया भर के बड़े नामों में से कइयों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है तो कइयों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू होने के बाद उनकी गिरफ्तारियां जारी हैं. इनमें नेता, व्यवसायी, शाही घराने के सदस्य और कई सेलेब्रिटीज शामिल हैं.

सीबीएस न्यूज़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ के जेफ्री एपस्टीन के साथ कई ईमेल एक्सचेंज उजागर हुए, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. गोल्डमैन सैक्स की मुख्य वकील कैथी रूएम्लर एपस्टीन से जुड़े ई-मेल्स की वजह से पद से हट गयीं. अमेरिकी अटॉर्नी (वकील) ब्रैड कार्प ने इस्तीफा दिया. हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर लैरी समर्स के जेफ्री एपस्टीन से बातचीत के रिकॉर्ड्स सामने आने के बाद इस्तीफा लिया गया. कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रिचर्ड एक्सेल एपस्टीन से संपर्कों के खुलासे के बाद नेतृत्व से हटे. वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम (WEF) के अध्यक्ष बोर्गे ब्रेंडे ने एपस्टीन के साथ संचार दस्तावेज़ सामने आने के बाद पद छोड़ दिया.

रॉयल मार्सडेन कैंसर चैरिटी के ट्रस्टी और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निकोल जंकेरमन का इस्तीफा हुआ. वहीं स्लोवाकिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मियोज़्लाव लाइचक ने विवाद बढ़ने पर इस्तीफा दे दिया. यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज से सलाहकार बोर्ड के डेविड स्टर्न से इस्तीफा लिया जा चुका है. अरब वर्ल्ड इंस्टीट्यूट के प्रमुख जैक लांग ने जेफ्री से संबंधों के चलते इस्तीफा दिया. डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ई-मेल्स में नाम सामने आने के बाद पद से हटे. नार्वेजियन राजनयिक  मोना जूल की प्रशासनिक पद से छुट्टी कर दी गयी. हालांकि अभी तक ये तमाम लोग सीधे ‘कानून तोड़ने के दोषी’ साबित नहीं हुए हैं मगर एक घृणित यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से दोस्ताना सम्बन्ध रखने के चलते इन लोगों को नैतिकता के आधार पर पद से हटने को मजबूर होना पड़ा.

एपस्टीन मामले में दुनिया भर के कई प्रमुख पदों पर बैठे लोगों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं, जिसमें मुख्य नाम पूर्व ब्रिटिश राजकुमार एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर का है. एंड्रयू को उनके अनुचित व्यवहार के चलते पहले ही शाही घराने से बाहर किया जा चुका है. इनके अलावा ब्रिटेन के पूर्व राजदूत और नेता पिटर मंडेलसन, नॉर्वेजियन राजनैतिक नेता थोरबॉर्न जगलैंड, एपस्टीन की साझेदार गिस्लेन मैक्सवेल जो पहले से नाबालिग बच्चों की तस्करी की दोषी है, को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. ब्रिटेन और यूरोप में एपस्टीन फाइल्स के खुलासों के बाद जांचें तेज हो रही हैं और दुनिया के कुछ बड़े राजनीतिज्ञों पर कानूनी दबाव बढ़ता जा रहा है.

मगर भारत में इस मामले में ख़ामोशी पसरी हुई है. भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अनिल अंबानी का नाम भी इन फाइलों में है.

गौरतलब है कि 2008 तक इस बात का खुलासा हो चुका था कि जेफ्री एपस्टीन एक यौन अपराधी है जिसने अनेक बच्चियों का यौनशोषण किया और उनको वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया. आरोप है कि एपस्टीन ने अपने आइलैंड पर बने महल में दुनिया के तमाम नामचीन लोगों को इन्वाइट करता था और  उनके मनोरंजन व कामपिपासा शांत करने के लिए कमसिन लड़कियों को ही नहीं परोसता था बल्कि उस जगह पर दुधमुहे बच्चों का मांस भी खाने के लिए परोसा जाता था.

2008 में एपस्टीन पर फ्लोरिडा (पामबीच) में नाबालिग लड़कियों से देह व्यापार कराने और यौन शोषण के आरोप लगे. इस आरोप को स्वीकारने के बाद जेफ्री एपस्टीन को 18 महीने की सजा हुई, पर वह लगभग 13 महीने ही जेल में रहा. उसे “वर्क रिलीज़” की अनुमति थी, यानी दिन में बाहर काम करने जाता था और रात में जेल लौटता था. 2009 में वह जेल से रिहा हो गया और उसके कुकर्म ज्यों के त्यों जारी रहे.

बताते चलें कि अगले दस सालों में जेफ्री एपस्टीन के पाप का घड़ा धीरे धीरे भर गया और 2019 में न्यूयॉर्क में फेडरल सेक्स ट्रैफिकिंग के नए आरोपों में उसे फिर गिरफ्तार किया गया. मगर इस बार मामला जटिल था और जेफ्री एपस्टीन अगर अदालत में मुंह खोलता तो कई अन्य लोगों के नाम उजागर हो सकते थे. लिहाजा जेल में मुकदमे के दौरान उसकी संदिग्ध मौत हो गयी. आधिकारिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, मगर सूत्रों की मानें तो जेफ्री एपस्टीन को जेल के भीतर ही मरवा दिया गया.

यह जानते हुए कि अत्यंत घिनौने कृत्य में जेफ्री एपस्टीन को 2008 में सजा सुनाई गयी थी, जिसका कैरेक्टर इस लायक नहीं था कि भारत में रामराज्य लाने का नारा देने वाली सरकार रावण से भी बदतर व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का नाता रखती, बावजूद इसके भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी जेफ्री एपस्टीन से लगातार संपर्क में रहे. कहा जा रहा है कि एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी शामिल है. जो भारत में विभिन्न योजनाओं में विदेशी निवेश के लिए हरदीप पुरी के माध्यम से जेफ्री एपस्टीन की मदद ले रहे थे.

13 फरवरी को विपक्षी दल खासकर कांग्रेस सांसदों ने दिल्ली के संसद भवन के मुख्य मकर द्वार पर भारी विरोध प्रदर्शन किया. यह विरोध प्रदर्शन एपस्टीन फाइल में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से निकट संबंधों के खुलासे को लेकर था. विपक्ष लगातार हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग कर रहा है. मगर मोदी सरकार इस विषय पर चुप्पी मारे बैठी है. मामला जब विपक्ष द्वारा संसद में उठाया गया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन से ही गायब रहे.

हरदीप सिंह पुरी की जेफ्री एपस्टीन को की गयी तमाम इमेल्स अब पब्लिक डोमेन में हैं, जिनमें वे जेफ्री से ऐसे बातचीत कर रहे हैं मानों वह उनका लंगोटिया यार था. हरदीप पुरी और जेफ्री के बीच हुए ईमेल दस्तावेजों से पता चलता है कि वर्ष 2014 और 2015 के बीच एपस्टीन और हरदीप सिंह के बीच दर्जनों बार ईमेल पर बातचीत हुई.

एक नजर इस बातचीत पर –

18 जून 2014 को जेफ्री हरदीप पुरी को लिखता है – ”मेरी टेरजे से बात हुई. रीड हॉफमैन भारत आने के लिए तैयार हैं.”  गौरतलब है कि रीड हॉफमैन अमेरिकी इंटरनेट उद्यमी और लिंक्डइन एक सह संस्थापक हैं.

23 जून 2014 को हरदीप पुरी ने जेफ्री को जवाब भेजा – ”रीड हॉफमैन की यात्रा के लिए सहायता और सुविधा प्रदान करके मुझे ख़ुशी होगी.”

सवाल यह कि आखिर किसने कहा था कि पुरी जेफ्री के जरिये रीड हॉफमैन को भारत में इन्वाइट करें. जाहिर है पुरी नरेंद्र मोदी के आदेशों पर यह बातचीत कर रहे थे.

24 सितम्बर 2014 को जेफ्री एपस्टीन ने रीड हॉफमैन और हरदीप पुरी का आपस में परिचय कराते हुए एक मेल में हॉफमैन को लिखा कि भारत में हरदीप उनके मददगार व्यक्ति हैं. इस मेल के जवाब में रीड हॉफमैन ने हरदीप सिंह पुरी को लिखा – ”हरदीप, आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा. लोगों को चुनने में जेफ्री की पसंद बहुत अच्छी है (मैं अपवाद हूँ)”

25 सितम्बर को हरदीप पुरी ने हॉफमैन को जवाब भेजा – “लोगों के बारे में जेफ्री की समझ पर मुझे कोई शक नहीं है. उनके ‘इंस्टिंक्टस’ तो और भी बेहतर हैं.

इसके बाद 4 अक्टूबर 2014 को जेफ्री एपस्टीन ने हरदीप सिंह पूरी को फिर मेल भेज कर पूछा – “क्या रिड से मीटिंग हुई?”

जवाब में उसी दिन हरदीप पुरी ने लिखा – “मैं आज दोपहर की मीटिंग के लिए एसएफ (सैन फ्रांसिस्को) में हूँ. आप, मेरे दोस्त, सच में काम करवा लेते हैं.”

“कोई  और सलाह?”

इस पर एप्सटीन ने जवाब दिया – “उन्हें बताओ कि विज्ञान और तकनीक से जुड़े लोगों और सोशल नेट्वर्किंग गुरुओं से मिलने के लिए आप उनकी भारत यात्रा का इंतजाम करेंगे.”

11 अक्टूबर 2014 से 24 अक्टूबर 2014 के बीच कई ईमेल एक्सचेंज हुए जिसमें जेफ्री के कहने पर हरदीप सिंह पुरी ने उसके कई सहयोगियों को भारतीय वीजा उपलब्ध कराने में सहायता पहुंचाई.

24 दिसम्बर का एक ईमेल सामने आया है जिसमें हरदीप सिंह पुरी ने जेफ्री एपस्टीन से ‘एक्सोटिक आइलैंड’ या ‘अनूठे टापू’ का ज़िक्र किया और कहा कि – ”जब आप अपने ‘एक्सोटिक आइलैंड’ से वापस आएं तो बताइयेगा, मैं  आपसे मिल कर थोड़ी बातचीत करना चाहता हूँ और आपको भारत में रूचि जगाने वाली कुछ किताबें भी देना चाहता हूँ.”

एपस्टीन के आइलैंड को ‘एक्सोटिक आइलैंड’ कहने का तात्पर्य यही है कि हरदीप सिंह पुरी उसके आइसलैंड के बारे में सब कुछ जानते थे. यानी पुरी एक नरपिशाच की रुचि भारत में जगाने के लिए प्रयासरत थे.

गौरतलब है कि 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी और जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘डिजिटल इंडिया’ प्रोग्राम को लांच किया. मगर इससे करीब सात महीने पहले ही यानि 13 नवम्बर 2014 को इस प्रोग्राम के बारे में हरदीप सिंह पुरी जेफ्री एपस्टीन को बता चुके थे.

हरदीप सिंह पुरी ने जेफ्री को लिखा, “जेफ़, मैंने आपको 3 अक्टूबर को सिलिकॉन वैली में रीड के साथ हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया था. आपकी प्रतिक्रिया थी कि रीड को जल्द से जल्द भारत का दौरा करना चाहिए. अक्टूबर के मध्य में भारत लौटने के बाद, मैं पहले से कहीं अधिक आश्वस्त हूँ कि आज भारत में इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार मौका है.”

हरदीप सिंह पुरी ने इस मेल में आगे लिखा, “उदाहरण के लिए जापानी दूरसंचार और इंटरनेट दिग्गज सॉफ्ट बैंक ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने अगले 10 सालों में भारतीय ई-कॉमर्स क्षेत्र में 10 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है. भारतीय कंपनी स्नैपडील 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर की फंडिंग प्राप्त करने वाली पहली कंपनी है. मजबूत जनादेश के साथ चुनी गई नई सरकार के आने से बाजार में हलचल और बढ़ गई है. यह ‘डिजिटल इंडिया’ पर ख़ास फ़ोकस के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है.”

सवाल यह कि जब डिजिटल इंडिया साल 2015 में लांच हुआ तो हरदीप सिंह पुरी नवंबर 2014 में ही एपस्टीन से इसकी चर्चा कैसे कर रहे थे? इसका सीधा सा अर्थ यह है कि मोदी सरकार की योजनाएं एक अपराधी के सलाह मशवरे से चलाई गयी.

2014 से 2017 के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के बीच 62 बार ईमेल का आदान-प्रदान हुआ और 14 बार मुलाकातें हुईं. यानि जनवरी 2014 में भाजपा ज्वाइन करने के बाद पुरी ने मोदी के हरकारे के तौर पर काम किया हालांकि उनको 2014–2015 के दौरान किसी सरकारी विभाग में अधिकारी या राज्य मंत्री का पद नहीं मिला था. 2014 से पहले वे भारतीय विदेश सेवा अधिकारी (IFS) और राजनयिक थे. अपने विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री को हाशिये पर रख कर बिना किसी प्रशासनिक पद वाले हरदीप सिंह पुरी का इस्तेमाल मोदी सरकार ने क्यों किया?

इस सब में फॉरेन ऑफिस का कोई रोल नहीं था. इसमें मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स की कोई भूमिका नहीं थी, इस सब में भारत का राजदूत हाशिये पर था. 2014 से लेकर आज तक हरदीप सिंह, अनिल अंबानी, जेफ्री एपस्टीन और इन जैसे लोग ही देश की विदेश नीति चला रहे है.

29 मार्च 2017 को अनिल अंबानी जेफ्री एपस्टीन को लिखते हैं – वाइट हाउस से एक घोषणा हुई है कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका आ रहे हैं, क्या आपको मालूम है कि तारीख क्या है?

कुछ मिनटों के बाद ही जेफ्री का जवाब आया – ”ये इजरायल स्ट्रैटजी का पार्ट है.” यानी भारत और इजरायल संबंधों की रूपरेखा जेफ्री एपस्टीन के द्वारा तय की जा रही थी. 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी यात्रा उसका एक हिस्सा थी, जिसके बारे में जेफ्री एपस्टीन बखूबी जानता था. और शायद उसी ने यह यात्रा अरेंज करवाई थी और उसके बाद 4 जुलाई से 6 जुलाई 2017 को मोदी पहली बार इजरायल यात्रा पर गए. अब एपस्टीन फाइल्स के रिलीज होने के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी भारतीय संसद से मुँह चुरा कर भागे भागे इजरायल गए. उनके वापस लौटते ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया और मीडिया से एपस्टीन फाइल्स का जिक्र गायब हो गया.Epstein files

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