रवि और श्वेता ने घर वालों की मरजी के खिलाफ कोर्ट मैरिज की थी. अभी उन की शादी को एक साल भी पूरा नहीं हो पाया है कि उन के रिश्ते में दरार आनी शुरू हो गई है. शादी से पहले जहां दोनों एकसाथ जीनेमरने की कसमें खाते थे, अब एकसाथ रहने को तैयार नहीं हैं. घर वाले उन के मामले में नहीं पड़ना चाहते क्योंकि उन्हें यह रिश्ता पहले से पसंद नहीं था. रवि और श्वेता दोनों नौकरीपेशा हैं. दोनों को एकदूसरे के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है और अगर समय निकल भी आए तो उन के अपनेअपने गिलेशिकवे खत्म होने का नाम नहीं लेते. श्वेता की शिकायत है कि रवि उस से शादी से पहले जैसा प्यार अब नहीं करता. अगर फुजूलखर्ची के लिए उसे मना करो तो झगड़ा शुरू कर देता है और उस से नौकरानी जैसा व्यवहार करने लगा है. कई बार वह रवि को समझा चुकी है, लेकिन रवि उस की बातों को महत्त्व नहीं देता. अब उस ने फैसला किया है कि वह रवि के साथ नहीं रहेगी.

रवि का मानना है कि शादी के बाद सब की प्राथमिकताएं बदलती हैं और उस की भी बदली हैं. इस में गलत क्या है? रवि का कहना है कि कल तक श्वेता उस की प्रेमिका थी जिस को लुभाने और खुश करने के लिए वह गिफ्ट्स देता था और तरहतरह से लुभाता था. लेकिन आज वह उस की पत्नी है. श्वेता को यह समझना चाहिए और घर की जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए. मैं जब भी उसे घर का काम करने के लिए कहता हूं या कुछ खर्च करता हूं तो वह झगड़ा करना शुरू कर देती है. तंग आ चुका हूं उस की आदतों से, अब मैं उस के साथ नहीं रह सकता.

रोहित का भी यही हाल

रोहित और पूजा की घरवालों की मरजी से अरेंज्ड मैरिज हुई थी. रोहित एक बड़ी कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर है, जबकि पूजा एक गृहिणी है. वह घर की जिम्मेदारियों को अच्छी तरह संभाल रही  थी. शादी के शुरुआती दिनों में सबकुछ अच्छा चल रहा था. दोनों काफी खुश थे. उन के प्यार का दायरा तेजी से बढ़ रहा था. 2 साल बाद जब उन के घर बेटी दिव्या ने जन्म लिया तो उन के प्यार को एक नई पहचान मिली. न जाने फिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों के प्यार को नजर सी लग गई और एकदूसरे की वफादारी को ले कर शक ने उन के दिमाग में जगह बना ली.

रोहित के औफिस में काम करने वाली महिला सहकर्मियों को पूजा शक की नजर से देखती थी. तो वहीं दूसरी तरफ रोहित पूजा के सोशल साइट्स के दोस्तों के मैसेजेस और फोन कौल्स से परेशान था. पूजा कहीं भी बाहर निकलती तो रोहित के दिमाग में तरहतरह के नकारात्मक विचार उस के शक को बढ़ाने का काम करते. अब आएदिन दोनों में झगड़े होने लगे थे. नतीजा यह निकला कि अब दोनों अलगअलग रह रहे हैं. रवि और श्वेता की समस्या हो या रोहित और पूजा की, यह हकीकत आज के दौर में आम सी हो गई है. आधुनिकता और आगे निकलने की दौड़ में आज आपसी रिश्ते इतने उलझ गए हैं कि उन्हें सुलझाने के लिए भी हमारे पास वक्त नहीं है. विशेषकर महानगरों में जहां परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए पतिपत्नी दोनों कार्यरत हैं. ऐसे में अगर कहीं वक्त निकल भी आए तो दोनों का अहं बीच में आ कर बात को बनाने के बजाय और ज्यादा बिगाड़ देता है. हम किसी को भी समझने की कोशिश नहीं करते, बस अपनी ही धुन में अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं.

कई बार हमें इस बात का एहसास होता है कि हमारे बीच जो हो रहा है वह सही नहीं है और ऐसा नहीं होना चाहिए. लेकिन हम इस एहसास को अपने दिल के किसी कोने में दबा देते हैं और वह करते हैं जो हमारा मतलबी दिमाग अहं को संतुष्ट करने के लिए कहता है. आपसी रिश्तों का यह तानाबाना, कभी लगता है कि इतना मजबूत है कि सात जन्मों तक नहीं टूटेगा, तो कभी लगता है वक्त के एक छोटे से झोंके से बिखर जाएगा.

एकदूसरे को मौका दें

अगर किसी बात पर आप की अपने पार्टनर से तकरार होती है और दोनों एकदूसरे से खफा हो कर बात करना बंद कर देते हैं तो आप जरा सोचिए कहां से बात बनेगी या कहां से चीजें सुधरेंगी जब तक हम दूसरों को कोई मौका नहीं देंगे, अपनी बात कहने का या स्वयं के लिए कोई मौका नहीं तलाशेंगे. इस स्थिति में शांत रह कर दूसरे की बात को महत्त्व देना बेहद जरूरी है. यह बात सिर्फ घरेलू रिश्तोें पर ही लागू नहीं होती बल्कि बाहरी रिश्तों पर भी उतनी ही लागू होती है. किसी भी संबंध की शुरुआत झूठ या लालच को आधार बना कर बिलकुल भी नहीं करनी चाहिए. ये वे रास्ते हैं जो कभी मंजिल तक नहीं पहुंचाते.

रिश्ते की अहमियत समझें

किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए उसे अहमियत देना, उस के महत्त्व को समझना बेहद जरूरी है. रिश्ते को अहमियत देने से मतलब उस व्यक्ति को महत्त्व और सम्मान देना जिस से आप का रिश्ता है. सिर्फ रिश्ता बना लेना बड़ी बात नहीं होती, बल्कि देखने वाली बात तो तब होती है जब उस रिश्ते को आप किस शिद्दत के साथ निभाते हैं. उसे प्यार और विश्वास की किन बुलंदियों तक ले जाते हैं.

रिश्ते निभाएं ऐसे

हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ रिश्तों से बंधा होता है जो उसे विरासत में मिलते हैं. जिन में मां, बाप, भाई, बहन आदि शामिल हैं. वहीं दूसरी ओर कुछ रिश्ते उसे बनाने या कमाने पड़ते हैं, दोस्ती और शादी उन्हीं कमाए हुए रिश्तों में शामिल हैं. रिश्ते बनाना और बिगाड़ना आप के हाथ में होता है. कुछ लोग अपने मधुर व्यवहार से गैरों को भी अपना बना लेते हैं, तो कुछ लोग व्यवहार की कटुता से अपनों को भी बेगाना बना देते हैं. अगर आप सिर्फ अपने लिए सोचते और करते हैं, उस सोच में दूसरों को महत्त्व नहीं देते और न ही उन का खयाल करते हैं तो निश्चित ही आप रिश्ते बनाने की बुनियाद पर बहुत कमजोर हैं. रिश्तों की बुनियाद ही वहां से शुरू होती है जब आप किसी और के लिए सकारात्मक सोच के साथ उसे अपनी सोच में महत्त्व देना शुरू करते हैं. उस के बाद अपनेआप ही धीरेधीरे उस व्यक्ति से आप का बौंड इतना मजबूत हो जाता है कि आप को आगे कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती. रिश्ते खुदबखुद सही रास्ते पर आ जाते हैं.

प्यार से अच्छा तालमेल बनाएं

शादी को भारतीय समाज में बहुत ज्यादा महत्त्व दिया जाता है. देखा जाए तो विवाह विश्वास से भरा वह बंधन है जिस में पतिपत्नी का एकदूसरे के साथ ईमानदार होना निहायत जरूरी है. कहा जाता है कि पतिपत्नी गाड़ी के 2 पहियों की तरह होते हैं. गृहस्थ जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए दोनों का न केवल शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है बल्कि एकदूसरे को समझना और महसूस करना उस से कहीं ज्यादा जरूरी है. हो सकता है आप का व उन का सोचनेसमझने और काम करने का नजरिया व तरीका अलग हो.

यह अकसर देखा भी जाता है कि पतिपत्नी के विचार और पसंद आपस में मेल नहीं खाते, बिलकुल विपरीत स्वभाव वाले लोग जीवनसाथी बन जाते हैं. जैसे, अगर एक की आदत कम बोलने की है तो दूसरे की ज्यादा बोलने की, अगर एक पैसे बचाता है तो दूसरा ज्यादा खर्च करता है या फिर एक अंतर्मुखी है तो दूसरा बहिर्मुखी आदि. इस का मतलब यह बिलकुल नहीं कि एक गलत व्यक्ति आप से जुड़ गया है या एक बेमेल रिश्ता बन गया है. अगर आप दोनों के नजरिए अलग हों भी तो उन में प्यार से अच्छा तालमेल बनाएं, एक ऐसी समझ विकसित करें कि विपरीत आदतें आप के रिश्तों पर बुरा असर न डाल सकें.

स्वयं में भी परिवर्तन लाएं

किसी भी व्यक्ति में अपने अनुसार सौ फीसदी परिवर्तन होने की उम्मीद करना, उस के साथ नाइंसाफी करने जैसा है. मतलब उस के रहनसहन, खानपान और आचारविचार को आप अपनी इच्छा के अनुरूप बदलना चाहते हैं. मानव स्वभाव के अनुसार, हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना पसंद करता है और अपनी इच्छा के अनुसार ही जीवन जीना चाहता है, उसे किसी तरह का बंधन असहज महसूस होता है. सामने वाले व्यक्ति में अच्छे परिवर्तन लाने के लिए सब से पहले आप को ही बदलना होगा. तभी आप उस में परिवर्तन की उम्मीद कर सकते हैं.

कहा जाता है न, नेक काम की शुरुआत अपनेआप से ही करनी चाहिए और वह बात यहां पूरी तरह लागू होती है. आप का प्यार, समर्पण और अच्छा बरताव उस विपरीत रिश्ते को भी एक मजबूत बुनियाद दे सकता है. ईमानदारी से अगर हम अपनी स्वार्थ से भरी सोच को छोड़ कर अपने पार्टनर को खुशियां और उसे परेशानियों से दूर रखने का निश्चय कर लें तो यकीन मानिए, आप उस का दिल जीत लेंगे और अपने लिए उस की सोच भी बदलने में जरूर कामयाबी हासिल करेंगे. वह भी आप के लिए उतना ही अच्छा करने के लिए मजबूर हो जाएगा.

पहल करना जरूरी

अगर किसी मोड़ पर आ कर आप के आपसी रिश्ते उलझते भी हैं रिश्तों को सुलझाने की पहल चाहे आप करें या आप के सामने वाला व्यक्ति, लेकिन पहल जल्द ही होनी चाहिए क्योंकि गुजरने वाला हर पल आप के और उन के बीच दिलों की दूरी को बढ़ा रहा है और हो सकता है कि वक्त के साथ ये दूरियां अधिक बढ़ जाएं कि दिलों का दोबारा पास आना संभव न हो सके. कभीकभी देखा जाता है कि हमारी एक छोटी सी जिद की वजह से हमें बहुत बड़ा खमियाजा उठाना पड़ता है. हमारी जिद, अहं या गुस्सा हमें उन लोगों से जुदा कर देता है जिन्हें कभी हम अपने से अलग नहीं करना चाहते. जिस भी वजह से आप के आपसी रिश्तों में खटास आनी शुरू हो, समझ लेना चाहिए कि आगे चल कर वही वजह आप के रिश्तों को बरबाद कर सकती है.

जिरह से बचें

कहा जाता है कि मियांबीवी में जब तक तूतू मैंमैं और तकरार नहीं होगी तब तक प्यार का मजा नहीं आएगा. लेकिन यह तकरार एक सीमा तक रहती है तभी तक ठीक है. अकसर यह देखा जाता है कि प्यार में शुरू की गई तकरार धीरेधीरे इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि वह जिरह या बहस का विकराल रूप ले लेती है और दोनों पतिपत्नी उस में उलझते चले जाते हैं.

सकारात्मक समाधान निकालें

अगर आप के खुशहाल गृहस्थ जीवन के रास्ते को कोई समस्या आ कर रोकती भी है तो परेशान न हों. समझदारी से काम लें. ठंडे दिमाग से आपस में खुल कर बात करें और उस समस्या का कोई न कोई सकारात्मक समाधान निकालें और उस पर अमल करें. ऐसी समझदारी दिखा कर आप एक बार पार्टनर का दिल जीत लेंगे और आप के पार्टनर का भरोसा आप पर फिर से पहले जैसा ही कायम हो जाएगा.

काउंसलर की सलाह लें

आप की रिलेशनशिप के दौरान परेशानियां छोटी या बड़ी किसी भी रूप में सामने आ सकती हैं. अगर जिंदगी में किसी भी मोड़ पर आ कर दोनों को लगता है कि एकदूसरे को समझना और समझाना काफी मुश्किल हो रहा है और आप की कोशिशें रिश्तों को सुधारने में बेअसर साबित हो रही हैं तो ऐसी स्थिति में एक काउंसलर आप की काफी मदद कर सकता है. वह आप के टूटते और बेजान हो रहे रिश्तों में अपनी प्रभावी सलाह दे कर एक नई जान फूंक सकता है.

गलत आदतों से बचें

कोई भी व्यक्ति संपूर्ण नहीं होता, मतलब उस में कोई न कोई कमी या बुराई जरूर पाई जाती है, जो दूसरों के लिए परेशानी का कारण हो सकती है. पारिवारिक कलह से बचने के लिए एक बेहतर रास्ता यह हो सकता है कि हमें उन कामों को या उन गलतियों को करने से बचना चाहिए जो हमारे रिश्ते पर बुरा असर डालती हों या हमारा पार्टनर जिन्हें नापसंद करता हो, जैसे रोजाना शराब पीना, सिगरेट, जुआ, फुजूलखर्ची करना या फिर पार्टनर की आंखों में धूल झोंकना आदि. अगर एक आइडिया लगाया जाए तो ऐसी कोई भी बुरी वजह आप के स्वास्थ्य पर तो विपरीत असर डालती ही है और साथ ही साथ आर्थिक रूप से भी कमजोर करती है.

एकदूसरे पर विश्वास बनाए रखें

जीवनसाथी का दिल जीतने के लिए पार्टनर्स को लगातार धैर्य और सकारात्मक रवैया अपनाए रखना है. किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए उसे भरोसे की बुनियाद पर सम्मान, समर्पण, प्यार और समय देना बहुत ही जरूरी होता है जिस के बल पर दोनों के बीच एक मजबूत रिश्ता खड़ा होता है. यकीन मानिए जब यह परीक्षा पास कर आप उन का दिल जीत लेंगे, उस के बाद आप दोनों की जिंदगी एक मधुर संगीत में बदल जाएगी. आप के आपसी रिश्ते प्यार और विश्वास की बुनियाद पर इतने मजबूत हो जाएंगे कि उन्हें हिला पाना भी किसी के लिए संभव न होगा.

1.    गुस्सा न करें

2.    भावनाओं को समझें

3.    बचें गलत आदतों से

4.    पहल करना जरूरी

5.    एकदूसरे को मौका दें

6.    शक से दूर रहें

7.    तालमेल जरूरी

8.    खुद को बदलें

9.    रिश्ते निभाएं

10.  आपस में ईमानदारी बरतें

11.  आपसी विश्वास बनाए रखें

12.  समाधान निकालें

13.  जिरह से बचें

14.  काउंसलर की सलाह जरूर लें

 
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