सरिता विशेष

कामकाजी महिलाओं को अपने औफिस और परिवार की जिम्मेदारियों को एकसाथ संभालना होता है. ऐसे में कइयों के लिए अपने बेहद व्यस्त शैड्यूल में से खुद के लिए थोड़ा सा भी समय निकाल पाना मुश्किल होता है, क्योंकि उन्हें लगातार एक से दूसरे काम में व्यस्त रहना पड़ता है. अपने शरीर और समय को ले कर नियमित तनाव की वजह से अकसर इन महिलाओं को खुद की और अपने शरीर की मांगों के स्थान पर अपने कर्तव्यों को चुनना पड़ता है. समय और ऊर्जा से तंग कई महिलाएं खाने की अस्वास्थ्यकर आदतों को अपना लेती हैं.

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ये महिलाएं यह भूल जाती हैं कि अगर ये अपने शरीर, अपनी सेहत का ध्यान नहीं देंगी, तो अपने महत्त्वपूर्ण बोझ को उठाने में सक्षम नहीं रह जाएंगी. इसलिए एक खुशनुमा व स्वस्थ जीवन जीने के लिए महिलाओं को अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान देने, समयसमय पर सेहत की जांच कराने, पोषक आहार लेने और नियमित व्यायाम करने के लिए समय निकालने की जरूरत होती है.

सेहत को गंभीरता से लें

जब खाने की बात आती है, तो उम्रदराज वयस्कों को अपने कैलोरी के उपभोग को कम करने और फाइबर व पोषक तत्त्वों से भरपूर खाना खाने की जरूरत होती है. कैलोरी से भरे आहार की वजह से वजन बढ़ सकता है और इस से महिलाओं को डायबिटीज, स्ट्रोक, औस्टियोपोरोसिस, स्तन कैंसर, उच्च रक्तचाप, आर्थ्राइटिस जैसी कई अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं.

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इसलिए महिलाओं के लिए यह अनिवार्य है कि 30 की उम्र के बाद वे अपनी सेहत को गंभीरता से लें. बीमारियों से बचने, अपनी हड्डियों को मजबूत करने, अपने प्रतिरक्षातंत्र को सुदृढ़ करने और त्वचा की रक्षा के लिए सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं.

जानिए 30 साल की होने पर अपने आहार में कैसे संशोधन करें:

– अपने दैनिक आहार में मसूर की दाल और फलीदार सब्जियां शामिल करें. सूखी सेम और मटर, काली सेम, राजमा, पत्तागोभी और मटर की दाल में सेहतमंद फाइबर और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है. पकाई गई 1 कप मसूर की दाल में लगभग 16 ग्राम फाइबर होता है, जो कोलैस्ट्रौल के स्तर को कम करने और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के साथ ही पाचन को भी बेहतर बनाने में मदद करता है.

– एक पैकेट आलू के चिप्स या अपनी पसंदीदा कुकीज में ही संतुष्ट हो जाने की वजह से बाद में जब भी भूख लगे तो ताजा फल और सब्जियां खाने की आदत डालें. चमकीले रंगों वाले फलों का ताजा सलाद या सब्जियों का एक बाउल जैसे कि गाजर, कद्दू, शकरकंद, टमाटर, पपीता या मौसमी हरी सब्जियों का एक बाउल सेहतमंद बीएमआई मैंटेन करने में मदद कर सकता है. यह आप के खून के कोलैस्ट्रौल और शुगर के स्तर को बेहतर करने में भी मदद करता है.

– मलाई निकला दूध, कम वसा या वसारहित दही और चीज कैल्सियम के अच्छे स्रोत हैं. गाय का दूध खासतौर पर कैल्सियम के अच्छे स्रोत हैं. पीनट बटर में कैल्सियम की काफी मात्रा होने के साथ ही विटामिन ई, मैग्नीशियम, पौटैशियम, और प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने वाले विटामिन बी6 की अच्छाई भी होती है.

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– मिठासरहित बादाम का दूध और नारियल का दूध ऐसे पोषणयुक्त सेहतमंद पेयपदार्थ हैं, जो शरीर को पर्याप्त पोषण देते हैं. बादाम के दूध में विटामिन डी की प्रचुर मात्रा होती है जबकि कैलोरी कम होती है. नारियल का दूध लैक्टोजरहित होता है. यह कोलैस्ट्रौल के स्तर को कम करने, रक्त दाब बेहतर करने और हार्ट अटैक या स्ट्रोक रोकने में मदद करता है.

– सेहत और सौंदर्य को ले कर हलदी के कई फायदे हैं. कढ़ी या सूप जैसे अपने खाने में इस सुनहरे पीले पाउडर की एक चुटकी मिलाने से कई बीमारियों के विरुद्घ सुरक्षा मिलती है, ऐस्ट्रोजन हारमोंस को नियमित रखने में मदद मिलती है, स्तन कैंसर का जोखिम कम होता है, झुर्रियां घटती हैं.

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– पालक, पत्तागोभी और गोभी जैसी सब्जियों में बीटा कैरोटिन की मात्रा पर्याप्त होती है और इन के सेहत संबंधित कई फायदे होते हैं.

– भले ही रैड मीट में हाई क्वालिटी प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है, लेकिन इस में सैचुरेटेड वसा भी होती है, जिस से हाई कैलोरी काउंट भी मिलता है. इसलिए सालमन, ट्यूना और सार्डिन जैसी कम वसायुक्त मछलियों का सेवन करें.

– दैनिक उपभोग में बादाम, अखरोट, चिआ के बीज आदि शामिल करें. रोज अगर 1 मुट्ठी बादाम खाए जाएं, तो इस से शरीर को फाइबर, प्रोटीन, कैल्सियम, जिंक, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फास्फोरस, कौपर, आयरन और विटामिन बी मिलेगा. चिआ के बीचों में ओमेगा 3 फैटी ऐसिड्स, कैल्सियम, जिंक, विटामिन बी1, बी2, बी3 और विटामिन ई होता है.

– सोया मिल्क, टोफू, छोले, अलसी, दलिया, जई, ओटमील, और हाई क्वालिटी प्रोटीन सप्लिमैंट्स को अपने आहार का हिस्सा बनाएं.

– राजमा, डार्क चौकलेट्स, किशमिश, जई, ब्रोकली, टमाटर, अखरोट, जैसे हाई क्वालिटी ऐंटीऔक्सीडैंट्स को अपने आहार में मिलाएं. इन खा-पदार्थों में पाए जाने वाले ऐंटीऔक्सीडैंट्स फ्री रैडिकल्स के प्रभावों से कोशिकाओं की रक्षा करते हैं, उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करते हैं, दिल की बीमारी का जोखिम घटाते हैं और प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करते हैं.

– डार्क चौकलेट से डायबिटीज, कार्डियोवैस्क्यूलर बीमारी और दिल से संबंधित अन्य बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है.

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– उम्र बढ़ने की निशानियों को घटाने का सब से अच्छा तरीका है कि रसभरी, स्ट्राबैरी और ब्लूबैरी खाएं.

ऐसे भी कुछ खा-पदार्थ हैं, जिन से महिलाओं को 30 की उम्र के बाद अपनी सेहत के संकल्प को बनाए रखने के लिए पूरी तरह बचना चाहिए:

– सूप, कटी सब्जियां, फल और सौसेज जैसे कैन्ड फूड्स से पूरी तरह बचना चाहिए. कैन्ड फूड में सोडियम बहुत होता है. इस में प्रिजर्वेटिव्स मौजूद होते हैं और टिन में धातु या प्लास्टिक की कोटिंग के कारण इन के दूषित होने की संभावना होती है.

– बहुत ज्यादा फ्रोजन खाना भी सेहतमंद नहीं होता है.इस में 700 से 1800 एमजी तक सोडियम शामिल होता है. इस की वजह से ब्लडप्रैशर और सेहत से संबंधित अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है.

– ज्यादातर बेक्ड फूड आइटम्स जैसे कि केक, पेस्ट्री और बिस्कुट का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि इन में रिफाइंड आटा मौजूद होता है जो अस्वास्थ्यकर होता है. इन में पोषक तत्त्वों की कमी होती है और कैलोरी ज्यादा होती है. ये वसा और शुगर से बने होते हैं.

– कैन्ड जूस और गैस भरे ड्रिंक्स का सेवन कम करें, क्योंकि इन में हाई शुगर की सामग्री होती है, जिस से डायबिटीज बढ़ सकती है और आप के दिल व लिवर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

– सोनिया नारंग, न्यूट्रिशनिस्ट ऐंड फिटनैस ऐक्सपर्ट

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