कामकाजी महिलाओं को अपने औफिस और परिवार की जिम्मेदारियों को एकसाथ संभालना होता है. ऐसे में कइयों के लिए अपने बेहद व्यस्त शैड्यूल में से खुद के लिए थोड़ा सा भी समय निकाल पाना मुश्किल होता है, क्योंकि उन्हें लगातार एक से दूसरे काम में व्यस्त रहना पड़ता है. अपने शरीर और समय को ले कर नियमित तनाव की वजह से अकसर इन महिलाओं को खुद की और अपने शरीर की मांगों के स्थान पर अपने कर्तव्यों को चुनना पड़ता है. समय और ऊर्जा से तंग कई महिलाएं खाने की अस्वास्थ्यकर आदतों को अपना लेती हैं.

ये महिलाएं यह भूल जाती हैं कि अगर ये अपने शरीर, अपनी सेहत का ध्यान नहीं देंगी, तो अपने महत्त्वपूर्ण बोझ को उठाने में सक्षम नहीं रह जाएंगी. इसलिए एक खुशनुमा व स्वस्थ जीवन जीने के लिए महिलाओं को अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान देने, समयसमय पर सेहत की जांच कराने, पोषक आहार लेने और नियमित व्यायाम करने के लिए समय निकालने की जरूरत होती है.

सेहत को गंभीरता से लें

जब खाने की बात आती है, तो उम्रदराज वयस्कों को अपने कैलोरी के उपभोग को कम करने और फाइबर व पोषक तत्त्वों से भरपूर खाना खाने की जरूरत होती है. कैलोरी से भरे आहार की वजह से वजन बढ़ सकता है और इस से महिलाओं को डायबिटीज, स्ट्रोक, औस्टियोपोरोसिस, स्तन कैंसर, उच्च रक्तचाप, आर्थ्राइटिस जैसी कई अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं.

इसलिए महिलाओं के लिए यह अनिवार्य है कि 30 की उम्र के बाद वे अपनी सेहत को गंभीरता से लें. बीमारियों से बचने, अपनी हड्डियों को मजबूत करने, अपने प्रतिरक्षातंत्र को सुदृढ़ करने और त्वचा की रक्षा के लिए सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं.

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