शादी के बाद जब पतिपत्नी एकसाथ अपने अंतरंग क्षणों में होते हैं तो उस समय उन के बीच जिस्म प्रधान होता है, एकदूसरे को पाने की इच्छा, एकदूसरे में खो जाने की चाहत होती है. उस समय दिल है कि मानता नहीं वाली हालत होती है. वे दोनों दीनदुनिया से बेखबर हो कर, बस, एकदूसरे में आकंठ डूबे रहना चाहते हैं. एकदूसरे के जिस्म के प्रति आकर्षण तो होता ही है, साथ ही होता है समर्पण का भाव. फिर धीरेधीरे जीवन यथार्थ पर आता है.

जीवन में बच्चे आते हैं, जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं. प्यार व समर्पण धीरेधीरे हवा होने लगता है. ऐसे में अपने प्यार को बचाए रखना दोनों के लिए ही चुनौती होती है. समझदार दंपती इस दौर में भी अपनी भावनाओं को समाप्त नहीं होने देते और सैक्सुअल जीवन का आनंद लेते रहते हैं.

60 वर्ष की उम्र तक आतेआते तो अधिकांश जोड़े घरगृहस्थी में इतना रम जाते हैं कि उन का सैक्सुअल जीवन समाप्तप्राय हो जाता है. वे पारिवारिक जिम्मेदारियों में इस कदर डूब जाते हैं कि अपने सैक्ससुख के बारे में तो उन्हें सोचने का वक्त ही नहीं मिलता. कुछ तो इस उम्र तक दादादादी और नानानानी भी बन जाते हैं और मन में भाव आ जाता है कि अब इस उम्र में क्या सैक्ससुख भोगना.

परंतु जिस तरह पेट की भूख के लिए खाने की जरूरत होती है उसी तरह जिस्म की भूख को शांत करने के लिए सैक्स की जरूरत होती है. कई बार जब दोनों में से किसी की भी घर में संतुष्टि नहीं हो पाती तो वे बाहर का रुख करते हैं.

सैक्स की जरूरत को समझें

आमतौर पर सैक्स के बारे में महिलाएं कुछ शांत जबकि पुरुष कामुक और जिज्ञासु रहते हैं. घरों में महिलाएं उम्र और जिम्मेदारियां बढ़ने के साथसाथ इस ओर से दूर होने लगती हैं और जब पति रोमांस व सैक्स की ख्वाहिश जाहिर करते हैं तो वे कहती हैं, ‘अरे, इस उम्र में आप को जवानी सूझ रही है. अब अपनी तो उम्र निकल गई, बच्चों को खेलनेखाने दो.’

ऐसा व्यवहार कर के आप उन की भावनाओं का मजाक न उड़ाएं बल्कि आप को यह समझना होगा कि यह तो एक तरह की भूख है जिस की पूर्ति पति अपनी पत्नी से ही करेगा. इसलिए इस बात को प्यार से हैंडिल करें और जितना हो सके उन्हें सहयोग करें.

ध्यान रखें कि प्यार और सैक्स में उम्र की कोई डैडलाइन नहीं होती. अच्छा है कि जीवन के इस फेज का आप खुद भी आनंद लें और पति को भी लेने दें. बच्चे यदि बाहर हैं तो भी आजादी से अपनी सैक्सुअल लाइफ को एंजौय करें.

भावनाओं को समझें

शादी के बरसों बाद पतिपत्नी एकदूसरे के जिस्म से परिचित हो चुके हैं, इसलिए अब जिस्म प्रधान नहीं रहता. शादी के शुरुआती दिनों में तो रोटी बनाती पत्नी को भी पति प्यार से खींच कर ले जाता है और पत्नी खुश हो कर खिंची चली जाती है परंतु 60 वर्ष की उम्र में पत्नी को इस तरह खींच कर बैड पर नहीं ले जाया जा सकता.

ऐसे में आप दोनों एकदूसरे की भावनाओं को समझ कर, छोटीछोटी बातों का ध्यान रख कर और प्यारभरी बातों से एकदूसरे के मन में प्यार व समर्पण का भाव जगाएं ताकि सैक्स की इच्छा जाग्रत हो जाए और इस अवस्था में भी एकदूसरे के लिए कुछ करगुजरने का भाव दोनों के मन में रहे.

ध्यान रखें जिस्म कितना ही बूढ़ा हो जाए, मन हमेशा जवान रहना चाहिए. ‘बागबान’ फिल्म में अमिताभ बच्चन हेमा मालिनी से जिस रोमांटिक अंदाज में बातचीत करता है उस से भला किस के मन में एकदूसरे के प्रति प्यार की भावना जाग्रत नहीं होगी.

समय निकालें

चाहे आप संयुक्त परिवार में रहें या एकाकी परिवार में, सैक्स और रोमांस के लिए कब व कैसे समय निकालना है, यह आप को ही तय करना है. 50 वर्षीया अणिमा की बेटी 11वीं में है. वह कहती है, जब भी हम में से किसी का मूड होता है, मेरे पति सुबह से मेरा काम जल्दी करवा देते हैं और फिर उन के औफिस जाने से पूर्व हम अपने लिए वक्त निकालते हैं.

रोमांस के बिना पति के साथ का मजा कैसा? इस अवस्था तक बच्चे भी बड़े हो जाते हैं. इसलिए पतिपत्नी के लिए सैक्सुअल संबंधों को बनाए रखना वास्तव में चुनौती से कम नहीं होता. खुशहाल घरेलू जिंदगी और प्यार की गरमाहट को बनाए रखने के लिए सैक्स के लिए समय निकालना जरूरी है.

खुद पर दें ध्यान

अकसर महिलाएं उम्र का रोना रो कर अपने प्रति लापरवाह हो जाती हैं. बेतरतीब बाल, अस्तव्यस्त वस्त्र, निस्तेज चेहरा लिए रहती हैं. ऐसा लगता है मानो सारे जमाने का दुख उन्हें ही है. इस की अपेक्षा अपने प्रति सचेत हो कर अपनेआप को कुछ समय दे कर व्यवस्थित और स्मार्ट रहें ताकि आप को देख कर वे हमेशा कुछ करगुजरने को तैयार रहें.

संतुलित भाषा का प्रयोग करें

रीना और उस के पति ने बड़ी मुश्किल से बेटे के ट्यूशन जाने के बाद अपने लिए वक्त निकाला. ऐनवक्त पर रीना ने पति से मोबाइल के बारे में पूछा. पति झुंझला कर बोला, ‘‘देख नहीं सकतीं, सामने ही तो पड़ा है.’’ रीना के पति का अच्छाभला मूड खराब हो

गया और बात बनतेबनते रह गई. सो, छोटीछोटी बातों पर ध्यान न दें, एकदूसरे की भावनाओं का ध्यान रखें और कटाक्ष व व्यंग्यात्मक भाषा के स्थान पर एकदूसरे के लिए संतुलित व सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल करें.

एकदूसरे से बात करें

सैक्स के बारे में आपस में खुल कर बातचीत करें. पुराने और उबाऊ तरीकों को छोड़ कर नए तरीके ईजाद करें ताकि सैक्स के प्रति आप की जिज्ञासा बनी रहे. आप चाहें तो इस बारे में इंटरनैट का सहारा लें. सैक्स को महज एक खानापूर्ति के स्थान पर एकदूसरे को खुश करने के लिए करें. दूसरी बातों की तरह सैक्स पर भी सहज व स्वाभाविक बातचीत करें. एकदूसरे की तारीफ करें, रोमांटिक बातें करें, एकदूसरे को सैक्स में अपनी पसंदनापसंद बताएं क्योंकि छोटीछोटी बातें ही अकसर टौनिक का काम कर के सैक्सुअल लाइफ के साथसाथ आप की शादीशुदा जिंदगी को भी हैल्दी बनाए रखती हैं.

कुल मिला कर 60 वर्ष की उम्र के बाद भी अपनी सैक्सुअल लाइफ को बचाए रखने के लिए पतिपत्नी दोनों को ही कोशिश करनी चाहिए. हालिया रिसर्च से यह सिद्ध हो चुका है कि 50 वर्ष की उम्र के बाद भी हैल्दी सैक्सुअल लाइफ जीने वाले दंपती अधिक स्वस्थ व सुखद दांपत्य जीवन जीते हैं. सैक्स अपनेआप में एक बहुत अच्छी ऐक्सरसाइज होने के साथसाथ आप के रिश्ते को भी मजबूती प्रदान करता है. सैक्स में उम्र को कभी बाधक न बनाएं और एक हैल्दी सैक्सुअल लाइफ का आनंद उठाएं.