सरिता विशेष

बंगलादेश की विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन का मानना है कि जब भी वे यह कहती हैं कि प्यार में उम्र कोई माने नहीं रखती तो इस का अर्थ यह निकाला जाता है कि वे 60 वर्ष के बुजुर्ग और 20 वर्षीय लड़की के बीच प्रेमप्रसंग की बात को जायज ठहरा रही हैं, जबकि उन के इस कथन को दूसरे माने के साथ भी समझा जा सकता है जिस की ओर कभी किसी का ध्यान ही नहीं जाता, यानी प्यार जब होता है तो उस समय उम्र का हिसाबकिताब नहीं लगाया जाता है. सच यह है कि  प्यार सोचसमझ कर शायद ही कभी किया जाता हो.

बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड के धोवनघाट निवासी, 77 साल के प्रवासी भारतीय शत्रुघ्न प्रसाद सिंह कोलकाता से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद जरमनी में नौकरी की और वहीं हैम्बर्ग क्रोनेनबर्ग में बस गए. कई वर्षों तक नौकरी करने के बाद वे कुछ साल पहले रिटायर हो गए. इसी बीच उन की पत्नी की मृत्यु हो गई.

पत्नी के गुजर जाने के सदमे और अकेलेपन से निकलने की कोशिश में फेसबुक के जरिए उन की दोस्ती जरमनी की 75 वर्षीय इडलटड्र हबीब से हुई. इडलटड्र हैमबर्ग की रहने वाली हैं. उन के पति की मृत्यु हो चुकी थी. फेसबुक पर हुई दोस्ती धीरेधीरे प्यार में बदल गई और फिर उन दोनों ने साथ जिंदगी गुजारने का फैसला कर लिया.

फिल्म अभिनेता व अभिनेत्रयों की जिंदगियों पर गौर करें तो ऐसे रिश्तों की भरमार है और उन का आज तक का सफल वैवाहिक जीवन दर्शाता है कि प्यार के लिए आपसी सामंजस्य, समझदारी, समर्पण व सम्मान जरूरी है न कि उम्र.

ऐसा नहीं है कि यदि आप को अपने से दोगुनी उम्र की लड़की या लड़के से प्यार हुआ है और आप उसे अपने भावी पार्टनर के रूप में देखते हैं तो आप मोह या इन्फैचुरेशन से ग्रस्त हैं. हां, कभीकभी यह मोह या इन्फैचुरेशन हो भी सकता है पर समय के साथ आप समझ जाते हैं कि यह प्यार नहीं, बल्कि मात्र आकर्षण है. किंतु जब इस प्रकार के रिश्ते तमाम दिक्कतों व चुनौतियों को पार कर और सचाई को स्वीकार कर के भी अटूट बंधन में बंधने की इच्छा रखते हैं तब वह सच्चा प्यार कहलाता है. दरअसल, आसक्ति यानी मन का लगाव व प्यार में बहुत बारीक सा फर्क होता है, जिसे एज डिफरैंस वाले रिश्तों में समझदारी से संभालना जरूरी होता है.

बौलीवुड और हौलीवुड में ऐसे कई जोड़े

हिंदी फिल्मों के ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार ने जब अभिनेत्री सायरा बानो से विवाह किया था तो उन की उम्र 45 साल व सायरा बानो की 22 थी. 1966 में ये दोनों परिणयसूत्र में बंधे पर 1980 में इन के रिश्ते की डोर कुछ समय के लिए टूटी लेकिन जो प्यार व विश्वास इन के रिश्ते में था, उस ने इन्हें एक बार फिर हमेशा के लिए जोड़ दिया और तब से अब तक इन का रिश्ता बेहद मजबूत व मधुरता से चल रहा है.

हेमा मालिनी व धर्मेंद्र की जोड़ी भी एज गैप रिलेशन की सफलता बयान करती है. ‘शोले’ फिल्म की शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र को हेमा से प्यार हुआ और तब वे हेमा से 13 साल सीनियर थे. साथ ही पहले से शादीशुदा. पर बताने की जरूरत नहीं कि इन का वैवाहिक जीवन आज भी कायम है और ईशा व अहाना नाम की 2 बेटियां उस रिश्ते की परिणति हैं.

ऐसा ही संजय दत्त व मान्यता का रिश्ता है. संजय मान्यता से 19 साल बड़े हैं. पर इस का प्रभाव कहीं भी इन के रिश्ते पर पड़ा नहीं दिखता. करीना कपूर ने भी अपने से 11 साल बड़े सैफ अली खान से शादी की. हालांकि सैफ अली खान के लिए एज गैप रिलेशन कोई नई बात नहीं थी. उन की पहली पत्नी अमृता सिंह शादी के समय 33 साल की थीं जबकि सैफ 21 के. 13 साल तक इन का रिश्ता चला पर फिर टूट गया. हालांकि रिश्ता टूटने का कारण उम्र कतई नहीं थी.

इसी तरह बौलीवुड दिग्गज अभिनेता कबीर बेदी ने अपनी दोस्त परवीन दुसांज से चौथी शादी की. कबीर जहां 70 पार कर चुके हैं वहीं परवीन 41 पार कर चुकी हैं.

हाल ही में मौडल व ऐक्टर 53 वर्षीय मिलिंद सोमण ने अपनी गर्लफ्रैंड अंकिता कुंवर से शादी रचा ली. 27 वर्ष की अंकिता असम की रहने वाली हैं जबकि मिलिंद मराठी हैं. बता दें अंकिता एक एयरलाइन में केबिन क्रू एग्जिक्यूटिव थीं.

इमरान खान जैसे पाकिस्तानी लोकप्रिय क्रिकेट खिलाड़ी के बारे में जब खबर आई कि उन्होंने 21 साल की लड़की के साथ ब्याह रचा लिया तो दक्षिण एशिया सहित दुनियाभर के देशों के समाजों ने दांतों तले उंगली दबा ली थी. अमेरिका के प्रैसिडैंट डोनाल्ड ट्रंप और उन की पत्नी मेलानिया की उम्र में 24 साल का अंतर है.

हौलीवुड में अपने से बड़ी उम्र की महिला से प्यार व शादी का ट्रैंड शुरू करने का श्रेय डैमी मूर व एशन कूचर को जाता है. जब पौप सिंगर मडोना ने ऐक्टर गाय रिची से शादी की तब वो उन से 10 साल छोटा था. ये तमाम उदाहरण बताते हैं कि उम्र के बड़े फासलों को लांघ कर लोग परिणय बंधन में बंध रहे हैं और विवाह नामक संस्था की परिभाषा को बदल रहे हैं.

महत्त्व रखता है मैच्योर होना

मशहूर उपन्यासकार मार्क ट्वेन ने कहा था, ‘‘उम्र कोई विषय होने के बजाय दिमाग की उपज है. अगर आप इस पर ज्यादा सोचते नहीं हैं तो यह माने भी नहीं रखती.’’ शायद यही वजह है कि आज 21वीं सदी के समाज के लिए एज डिफरैंस बहुत बड़ी बात नहीं रह गई है. पर हां, आज भी इस प्रकार के संबंधों के लिए राह चुनौतीपूर्ण है. वहीं हमउम्र साथी के साथ रिश्ते में बंधना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है.

कंप्रोमाइज और अंडरस्टैंडिंग वहां भी चाहिए होती है. वैसे भी एक सफल रिश्ते के लिए किसी एक का मैच्योर होना महत्त्व रखता है, रूप से नहीं दिमाग से, ताकि रिश्ता पूरी समझदारी व धैर्य से निभाया जा सके. वहीं, हमउम्र कपल्स में अकसर ईगो प्रौब्लम ज्यादा देखी गई है कि वह नहीं झुकता तो मैं क्यों झुकूं. बस, यहीं से शुरू होती है रिश्तों में दरार. लेकिन एक मैच्योर साथी धैर्य से रिश्ते की कमजोरियों पर गौर करता है. आप का प्यार, आपसी सामंजस्य, विश्वास एकदूसरे की परवा व समझदारी. इन की नींव से खड़ा रिश्ता जिंदगी के आखिरी पड़ाव में भी आप का हाथ थामे रखता है. चूंकि उस की बुनियाद उम्र नहीं, आप का सच्चा प्यार होता है.

जिंदगी में यदि ऐसा कोई आप को मिलता है जिस से मिलने के बाद आप खुद को पूरा समझने लगते हैं. आप का माइंडसैट, नेचर, बिहेवियर, खूबियां व खामियां सब वह अच्छे से समझता है या कहें कि आप को लगता है कि उस के साथ सब मैच करता है, पर अगर कुछ मैच नहीं करता है तो वह है आप दोनों की उम्र. यदि इस को ले कर आप पसोेपेश में हैं तो यकीन मानिए कि मात्र इस आधार पर आप अपना सच्चा हमसफर खो रहे हैं.

क्या है वजह

अकसर देखा गया है कि पुरुष 60 वर्ष की उम्र तक पहुंचतेपहुंचते कम उम्र की औरत के साथ प्यार में पड़ जाते हैं या पत्नी के गुजर जाने के बाद वे साथी की तलाश करने लगते हैं, बेशक चाहे वह एक दोस्त के रूप में ही क्यों न हो, ताकि उस के साथ वे अपनी छोटीबड़ी बातें शेयर कर अपने मन के बोझ को हलका कर सकें. जब यह साथ उन्हें भाने लगता है तो वे विवाह करने का फैसला ले लेते हैं.

काफी एज गैप होने के बावजूद स्त्री और पुरुष साथ जिंदगी गुजारने का फैसला क्यों लेते हैं, यह सवाल लोगों को चौंकाता रहा है. इस का जवाब लगातार ढूंढ़ा भी जा रहा है. कुछ लोग मानते हैं कि स्त्रियां अपने लिए आर्थिक सुरक्षा चाहती हैं और इसलिए वे उम्र के अंतर को नजरअंदाज कर देती हैं जबकि कुछ यह कहने से नहीं चूकते कि अधिक उम्र में पुरुष के मन में आकर्षण पक्ष जोर मारता है. बहरहाल, कोई सही रिजल्ट नहीं निकल सकता है क्योंकि हर इंसान की भावनात्मक जरूरतें अलगअलग होती हैं और इसलिए निर्णय का आधार भी अलग ही होता है.

मनोवैज्ञानिक पल्लवी शाह मानती हैं कि संबंधों में उम्र का फर्क  न के बराबर होता है. 60 वर्ष के बाद बहुत सी महिलाओं को ठोस व मजबूत सहारे के साथ जिस्मानी चाहत भी शादी के लिए प्रेरित करती है. स्त्री जिस शारीरिक संतुष्टि की चाह को युवावस्था में दबा लेती है वह उम्र बढ़ने के साथ स्त्रीग्रंथि के उभरने से तीव्र हो जाती है. ऐसा ही कुछ पुरुषों के साथ भी होता है. अधेड़ावस्था में पुरुष फिर से किशोर हो उठते हैं और वे शादी जैसी संस्था का सहारा ढूंढ़ते हैं.

आप मशहूर प्लेबैक सिंगर आशा भोंसले की 16 वर्ष की उम्र में अपने 31 वर्षीय प्रेमी गणपत राव भोंसले के साथ घर से पलायन कर, पारिवारिक इच्छा के खिलाफ शादी करने को क्या कहेंगे? गणपत राव लता मंगेशकर के यहां ड्राइवर थे. 1960 के आसपास इस विवाह का दुखांत हो गया. 1980 में आशा भोंसले ने राहुल देव बर्मन (आरडी बर्मन) से शादी की.

सायरा बानो कहती हैं, ‘‘हम दोनों ने उम्र के फर्क को कभी महसूस ही नहीं किया. उलटा, अब मुझे यह लगने लगा है कि दिलीप साहब मुझ से छोटे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आ कर एक बीवी होने के साथसाथ मैं उन की एक मां की तरह भी देखभाल करने लगी हूं.’’

क्यों हो आपत्ति

बड़ी सरलता और सहजता के साथ प्रेम की परिभाषा को परिवर्तित कर यह मान लिया जाता है कि प्रेम भावनाओं पर कभी कोई रोक नहीं लगाई जा सकती. प्यार किसी उम्र का मुहताज नहीं होता. हालांकि इस का सीधा अर्थ यह है कि हम उम्र के किसी भी मुकाम पर पहुंचने के बाद अपने साथी से उतना ही प्रेम और लगाव रख सकते हैं जितना हम संबंध के शुरुआती दौर में रखते थे.

एक वक्त था जब कपल्स में एज डिफरैंस एक टैबू माना जाता था. मैट्रो सिटीज को छोड़ दें तो काफी हद तक छोटे शहरों में आज भी इस बात को सुन कर परिवार व समाज की भौंहें तन जाती हैं. पर देखने में आया है कि एज गैप का प्यार भी बहुत बार सफल हुआ है. हालांकि आज भी समाज एक बार लड़के का उम्र में बड़ा होना तो स्वीकार कर लेता है पर लड़की का उम्र में बड़ा होना उस की नाराजगी का सबब बन ही जाता है.

समय आ गया है कि सारी वर्जनाओं को तोड़ते हुए, बस, इतना समझ लिया जाए कि प्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास है जो 2 लोगों को बहुत गहराई से आपस में जोड़ता है.

अगर कोई बड़ी उम्र का पुरुष या स्त्री किसी के प्रति अपनी भावनाओं का इजहार करता है या उसे अपने प्रेम का एहसास करवाता है तो हमें उन की आपसी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए. बूढ़ा होने, चेहरे पर झुर्रियां पड़ने और बाहरी सुंदरता खो जाने के बाद भी अगर वे एकदूसरे के लिए प्यार महसूस करते हैं तो निश्चित ही उन का प्रेम सच्चा है और फिर ऐेसे में उम्र तो वैसे भी माने नहीं रखती.