सरिता विशेष

बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई के लिए माहौल उथलपुथल भरा रहा. नवंबर से बाजार में फिर तेजी लौटी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1,000 और 500 के नोट अचानक प्रचलन से बाहर करने की घोषणा से बाजार में हाहाकार मच गया. शुरुआत में ही बाजार गहरा गोता लगाते हुए सूचकांक 1,700 अंक तक ढह गया. इसी बीच सरकार की बेहतर आर्थिक सुधारों की नीति और अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम से उद्योगपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत से बाजार उबरने लगा और शाम तक 339 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ.

नैशनल स्टौक एक्सचेंज यानी निफ्टी भी 541 अंक की गिरावट से उबर कर 111 अंक की बढ़त पर बंद हुआ. बाजार में पुराने नोटों के बंद होने से तरलता की भारी कमी रही लेकिन विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना तथा कालाबाजारी और जाली नोटों पर नकेल कसने की रणनीति तथा ट्रंप की जीत से विश्व बाजार के उत्साहवर्द्धक माहौल का बीएसई सूचकांक पर भी सकारात्मक असर पड़ा और बाजार तेजी पर बंद हुआ. टाटा समूह में मचे घमासान के कारण टाटा के शेयरों में 19 प्रतिशत की गिरावट रही. ट्रंप की औद्योगिक नीतियों को ले कर लगाए जा रहे अनुमान और अटकलों तथा उन की जीत पर अमेरिका में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद बीएसई का सूचकांक11 नवंबर को 700 अंक तक ढह गया.