बाल हिंदू परिषद
बात वाकई नपीतुली और स्वयंसिद्ध है कि एक जमाने में लोग ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करना शान और संपन्नता की बात समझते थे. नई पीढ़ी का हिंदू, बच्चों की भीड़ से डरता है. अब तो एक बच्चा भी ‘प्लान’ कर पैदा किया जाता है. 
विश्व हिंदू परिषद के मुखिया अशोक सिंघल ने हिंदुओं को मुफ्त मशविरा दिया है कि हर दंपती कम से कम 5 बच्चे पैदा करे. इस बात से हिंदुओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. उलटे, खुद सिंघल जेडीयू के के सी त्यागी जैसे नेताओं के निशाने पर आ गए कि पहले सिंघल को शादी कर यह नेक काम करना चाहिए था और उन के प्रिय शिष्य नरेंद्र मोदी की भी दूसरी शादी करवा कर इतने ही बच्चे पैदा करवाने चाहिए थे. इस के बाद बच्चों की पैदाइश पर व्याख्यान देते तो बात में दम रहता. 
 
लौट के बुद्धू घर को आए
बिहार की राजनीति में एक म्यान में कई तलवारें साथ दिखती रही थीं पर लोक जनशक्ति पार्टी के मुखिया रामविलास पासवान भी भगवा खेमे में जा मिले जिस की वजह वजूद की लड़ाई है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अब पासवान के पास खोने को कुछ नहीं बचा है. उन की जमीन व दौड़ दोनों खत्म हो चुके हैं. वे कहीं भी जाएं एक से दो नहीं हो सकते. 
दरअसल, पासवान सिद्धांतहीन राजनीति करने का खामियाजा भुगत रहे हैं. दलित समुदाय ने कभी उन्हें भी मायावती की तरह हाथोंहाथ लिया था पर वे खुद ही पहले एनडीए और फिर यूपीए के हाथों बहुमत को भुनाते इधरउधर होते रहे तो इसे कैरियर का उत्तरार्द्ध कहने में हर्ज नहीं.
 
अरविंद की मेधावी उम्मीदवार
सपनों में भी आंदोलन करती रहने वाली समाजसेवी और ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की मुखिया मेधा पाटकर भी ‘आम आदमी पार्टी’ से जुड़ कर मुंबई दक्षिण सीट से चुनाव लड़ेंगी, यह खबर अच्छी है, क्योंकि ‘आप’ और अरविंद केजरीवाल को एक अदद आंदोलन विशेषज्ञ की जरूरत थी जो गलीकूचों से ले कर जनपथ, रामलीला मैदानों और संसद तक में सनाका खींचने की योग्यता रखता हो. 
मेधा पाटकर इन तमाम पैमानों पर खरी उतरती हैं. ‘आप’ के ब्रैंडेड व्यक्तित्वों में उन का नाम भी शुमार हो गया है.  उम्मीद है मेधा जीतीं तो राजनेताओं से सारे हिसाब वे चुकता कर लेंगी जो उन्हें विदेशी एजेंट, ड्रामेबाज और न जाने क्याक्या कहा करते रहे हैं.
 
ठहाकों का दर्द
टैलीविजन कार्यक्रमों में गला फाड़ कर हंसतेहंसाते रहने वाले क्रिकेटर और भाजपा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू के सीने में एक दर्द छिपा था जिसे उन्होंने उजागर कर ही दिया कि कल तक जो प्रकाश सिंह बादल उन्हें सगा बेटा मानते थे वे अब सौतेला बरताव करने लगे हैं और अमृतसर सीट से मुझे लड़ाने में उन की दिलचस्पी नहीं तो मैं भी कोई भिखारी नहीं. 
सूफियाना दर्शन के जानकार सिद्धू का दिल शायद भूल गया कि सारी दुनिया भिखारी है, देने वाला तो एक ही है-ऊपर वाला और नीचे नरेंद्र मोदी, जिन की शरण में जाएं तो किस की मजाल कि ठहाकों के मालिक को यों रोंआसा होने दें. वैसे भी राजनीति में कोई किसी का सगासौतेला नहीं होता. सारी लड़ाई पैसों और वोटों की होती है.