यूरोपीय क्षेत्र में जून माह में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की रफ्तार फीकी पड़ने और अमेरिका में बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदकों की संख्या ढाई लाख को पार करने का विश्व के शेयर बाजारों पर नकारात्मक असर देखा गया. हालांकि भारतीय बाजार में वस्तु एवं सेवाकर यानी जीएसटी लागू किए जाने के माहौल के बीच इस का असर ज्यादा नहीं रहा. बौंबे स्टौक एक्सचेंज का सूचकांक रिकौर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद मजबूत स्थिति में रहा. जीएसटी के धूमधाम से लागू होने और इस को ले कर जारी आशंकाओं को दूर करने के लिए किए जा रहे उपायों का भी बाजार पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला और निवेशकों में उत्साह का माहौल बना रहा.

हालांकि जीएसटी लागू होने से पहले निवेशकों का रुख कुछ ढीला पड़ा और वित्तीय बैंकिंग क्षेत्र में जम कर बिकवाली हुई जिस के कारण ईद के बाद बाजार में रौनक सुस्त रही और सूचकांक एक माह में एक दिन की सब से बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ. इस दौरान नैशनल स्टौक एक्सचेंज में भी गिरावट दर्ज की गई. डौलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर रहा. चीन द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रियों को रोकने से दोनों  देशों के बीच उठे ताजा तनाव का बाजार पर नकारात्मक असर देखने को मिला.

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