सरिता विशेष

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का यह विज्ञापन आजकल जगहजगह देखने को मिल रहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लाखों युवा मारे जाते हैं. इस में कहा गया है कि हर साल करीब 3 लाख युवा सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का यह विज्ञापन आजकल जगहजगह देखने को मिल रहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लाखों युवा मारे जाते हैं. इस में कहा गया है कि हर साल करीब 3 लाख युवा सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं. यह आंकड़ा निश्चितरूप से चिंता का विषय है. सरकार इस पर नियंत्रण के लिए नियमित कदम भी उठा रही है. मोटर वाहन विधेयक संसद में आया जिसे लोकसभा ने पारित कर दिया लेकिन राज्यसभा में इस में कुछ सुधार किए जाने की बात कही गई है.

इसलिए विधेयक को सुझाव के लिए संसदीय समिति के पास भेजा गया है. सरकार की योजना सड़कों को कंक्रीट तथा सीमेंट की बनाने की भी है. हमारे यहां सिर्फ 2 प्रतिशत सड़कें ही सीमेंटकंक्रीट की हैं, जबकि जरमनी जैसे विकसित देशों में 40 फीसदी सड़कें सीमेंटकंक्रीट से बनी हैं.

दावा किया जा रहा है कि ये सड़कें टिकाऊ होंगी और मरम्मत पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. साथ ही, सीमेंटकंक्रीट की सड़कें हर मौसम के लिए उपयुक्त होती हैं. इस दिशा में काम करना अच्छा है लेकिन सवाल है कि क्या इस व्यवस्था से सड़क दुर्घटनाएं कम होंगी?

अच्छी सड़कों पर कम दुर्घटना की संभावना जरूर है लेकिन हम लोग सड़क पर चलते समय जब गति नियंत्रण में नहीं रखेंगे और जल्दबाजी के चक्कर में दूसरों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे तथा मानसिकता नहीं बदलेंगे, तो सड़क दुर्घटनाएं कम नहीं होंगी.

सड़कों पर नियम तोड़ना हमारे लिए शान का मामला होता है. हैल्मैट पहन कर दोपहिया वाहन चलाने का नियम है लेकिन हम नियमों की परवा नहीं करते. इसलिए सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढ़ रहा है. जरूरत नियमों का पालन करने की भी है, तब ही हम दुर्घटनाओं से बच पाएंगे.