लगातार रिकौर्ड बना रहे बौंबे शेयर बाजार को वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आम बजट पेश करने के एक दिन बाद अचानक करारा झटका लगा और सूचकांक करीब साल में पहली बार सर्वाधिक गिरावट पर बंद हुआ. 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री आम बजट पेश कर रहे थे तो बाजार में हलचल रही और सूचकांक ऊपरनीचे झूलता रहा, लेकिन शुक्रवार 2 फरवरी को अचानक बिकवाली का दौर शुरू हुआ और बाजार में तेज गिरावट आ गई. जनवरी के आखिर में बहुत कम समय में शेयर बाजार 36,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर अचानक करीब 850 अंक लुढ़क कर 35,66 पर आ गया.

ऐसा ही माहौल नैशनल स्टौक ऐक्सचेंज के निफ्टी में भी देखने को मिला. कारोबार के दौरान नए रिकौर्ड पर टिका निफ्टी 255 अंकों की गिरावट के साथ 10,760 पर लुढ़क कर आ गया. बाजार में मचे इस कोहराम के बीच वैश्विक क्रैडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने यह कह कर गिरते बाजार को और झटका दिया कि सरकार पर कर्ज के भारी दबाव के चलते भारत की रेटिंग में सुधार कार्यक्रम अवरुद्ध हो रहे हैं.

फिच का बयान आने से एक ही दिन पहले पेश बजट में वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी 3.2 प्रतिशत से बढ़ा कर 3.5 प्रतिशत किया. जानकार शेयर बाजार को अचानक लगे इस झटके की वजह शेयरों से कमाई पर लौंग टर्म कैपिटल गेन टैक्स यानी 1 लाख रुपए से ज्यादा के शेयर पर दीर्घकालिक कर लगाना और म्यूचुअल फंड में 10 प्रतिशत का कर लगाना मान रहे हैं.

बजट के बाद बाजार के अचानक औंधेमुंह गिरने से निवेशकों के करीब 5 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए और सूचकांक 2.25 फीसदी से ज्यादा गिर कर बंद हुआ. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बाजार की गिरावट पर चुटकी ली और कहा कि मोदी सरकारके बजट को बाजार ने भी खारिज कर दिया. पहले, साल की शुरुआत से ही बाजार का मूड बहुत अच्छा था और बाजार में लगातार रिकौर्ड बन रहे थे.

VIDEO : अगर प्रमोशन देने के लिए बौस करे “सैक्स” की मांग तो…

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