सरिता विशेष

फिल्म ‘लव सेक्स और धोखा’ से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता राजकुमार राव ने लीक से हटकर फिल्में की और अपनी जगह बनायीं, आज हर निर्देशक उन्हें अपने फिल्म में लेना पसंद करते हैं, हालांकि इसे करने में उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. कई बार रिजेक्शन का भी सामना करना पड़ा, पर उन्होंने हार नहीं मानी, क्योंकि उन्हें सिद्ध करना था कि वे एक कलाकार हैं और अच्छा अभिनय कर सकते हैं.

मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे राजकुमार राव को दसवीं कक्षा पास करने के बाद ही अभिनय का कीड़ा लग चुका था. उन्होंने स्कूल और कौलेज में जमकर थिएटर किया और पुणे आकर एफटीआईआई में अभिनय का प्रशिक्षण भी लिया. इसके बावजूद भी उन्हें औफर मिलना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने धीरज धरा और आज मुकाम हासिल किया. इस संघर्ष में उनके माता-पिता और प्रेमिका पत्रलेखा का बहुत साथ रहा, जिन्होंने उनकी हमेशा हौसलाअफजाई की. इस समय राजकुमार राव फिल्म ‘स्त्री’ के प्रमोशन पर हैं, उनसे बात करना रोचक था. पेश है अंश.

प्र. आपने पहले भी इस तरह की फिल्में की हैं, उससे ये कितना अलग है?

ये एक हौरर कौमेडी और अलग कहानी है, साथ ही एक संदेश भी देती है, जो आज के परिप्रेक्ष्य में बहुत जरुरी है. ये दर्शकों को हंसाएगी भी.

प्र. आपकी जिंदगी की ऐसी कौन सी स्त्री है जिससे आपको डर लगता है और आपको दर्द भी दिया है?

मुझे किसी स्त्री से डर नहीं हमेशा प्यार मिला है फिर चाहे वह मेरी मां हो, पत्रलेखा हो या मेरी टीचर्स. दर्द तो कभी भी नहीं मिला. मुझे खुशी है कि आज की महिलाएं आगे आ रही हैं और वे हर काम को कर रही हैं. आये दिन जो हम अखबारों में देखते है, वह भी धीरे-धीरे कम अवश्य होगा, पर थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि लोगों का माइंड सेट को बदलने में थोड़ा समय लगता है.

प्र. आप एक साधारण शक्ल सूरत के साथ आउटसाइडर होने पर भी अपनी एक मंजिल बनायी है, इसे कैसे देखते हैं? कितना मुश्किल था?

संघर्ष बहुत था, स्कूल के समय से मुझे अभिनय की इच्छा थी. उसके लिए मैंने मेहनत भी की. तीन साल कौलेज में और उसके बाहर थिएटर किया. अभिनय की ट्रेनिंग भी ली. उसके बाद दो साल मुंबई में संघर्ष किया, बहुत लोगों ने रिजेक्ट किया. जहां भी औडिशन होता था, मैं जाता था, पता चलता था कि मुझे लीड में नहीं, किसी छोटे से चरित्र के लिए कास्ट कर रहे है, क्योंकि मेरी शक्ल हीरो जैसी नहीं है. मायूस होता था, पर मैंने उसे कभी नकारात्मक रूप में नहीं लिया. लगता था कि कोई तो ऐसी फिल्म होगी जिसमें मैं लीड काम कर सकूंगा और हुआ भी, दिबाकर ने मुझे वैसा पाया और पहली फिल्म ‘लव सेक्स और धोखा’ मिली. ये सब आसान नहीं था, लेकिन उसमें मजा भी था. बहुत कुछ सीखने को मिला. असफलता आपको अधिक सिखाती है. मैं इस प्रोफेशन को प्यार करता हूं. अभी मेरी पहचान एक अभिनेता के तौर पर हो चुकी है और मैं चाहता हूं कि लोग मुझे उसी रूप में हमेशा देखे अपना प्यार दें.

प्र. पहला ब्रेक आपको कैसे मिला था?

अतुल मोंगिया कास्टिंग कर रहे थे. मैंने उनको अपनी पिक्चर्स भेजे. पहले तो उन्होंने बुलाया नहीं. मैंने दोबारा फोटो भेजे, कई बार औडिशन हुआ और फिल्म मिली. मैं बहुत खुश था कि मुझे दिबाकर बैनर्जी की फिल्म करने को मिल रही है. इस दौरान डरा हुआ भी था कि अगर मुझे मौका नहीं मिला, तो फिर से जीरो लेवल से मुझे मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन अंत में मुझे मौका मिला.

प्र. आपने पहली कमाई को कैसे खर्च किया?

इतना कुछ मिला ही नहीं था कि मैं कहूं कि कैसे खर्च किया, लेकिन हां जितना मिला उससे मुझे खुशी बहुत अधिक मिली थी.

प्र. आपके यहां तक पहुंचने में परिवार का कितना सहयोग था?

सहयोग परिवार का ही था. मेरी मां को विश्वास था कि एक दिन मैं सफल होऊंगा. वित्तीय और मानसिक रूप से उन्होंने बहुत सहयोग दिया है. मेरी मां ने कभी ये नहीं कहा कि तुम कैसे भी पैसे कमाओं. दो साल तक उन्होंने सहयोग दिया. तभी मैं यहां तक पहुंच पाया हूं.

प्र. आपने कई बड़े-बड़े निर्देशकों के साथ काम किया है, क्या इसे आप चुनते हैं या मिल जाता है?

सरिता विशेष

अभी मैं चुन सकता हूं, पहले ऐसा नहीं था. असल में मैं निर्देशक से अधिक कहानियों के साथ काम करता हूं. उसके साथ लोग जुड़ते है. इससे मुझे ग्रो करने का बहुत मौका मिला.

प्र. किस फिल्म ने आपकी इमेज को बदला?

फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ ने मेरी इमेज को बदला. उस फिल्म ने यह दिखा दिया कि मैं कौमेडी फिल्म भी कर सकता हूं, जबकि इससे पहले लोग मेरे सीरियस लुक से ही परिचित थे. अलग-अलग चरित्र मैं निभाना पसंद करता हूं और कर रहा हूं.

प्र. आप कितने फूडी हैं?

मुझे इंडियन फूड बहुत पसंद है. जिसमें घर का खाना मैं अधिक खाता हूं.

प्र. स्टारडम को आप कैसे लेते हैं?

मैं इसलिए अभिनय के क्षेत्र में आया, क्योंकि मैं इस प्रोफेशन से प्यार करता हूं. मैं यहां अपने आपको बदलने नहीं आया. इसे करने में मुझे बहुत मजा आता है और मैं अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक कैमरे के सामने रहना चाहता हूं.

प्र. सोशल मीडिया पर कितना एक्टिव हैं?

मैं सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव नहीं, पर ये एक पावरफुल मीडियम है, जिसके द्वारा कोई भी अपनी बात रख सकता है और ये अच्छा माध्यम है.

प्र. छोटे शहर से आने वाले यूथ को क्या मेसेज देना चाहते हैं?

उनके लिए इतना ही कहना चाहूंगा कि इंडस्ट्री बहुत बड़ी है, यहां सबको काम मिलता है, पर मेहनत अधिक करनी पड़ती है और धीरज रखना पड़ता है. अगर आप में प्रतिभा है, तो काम अवश्य मिलता है.