आने वाले समय में इंटरनेट के सर्च इंजन लोगों की जान बचाने में भी मदद कर सकते हैं क्योंकि वैज्ञानिक एक ऐसा तरीका विकसित कर रहे हैं, जिससे उन प्रयोगकर्ताओं की पहचान प्रभावी ढंग से की जा सकती है, जिनके द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने का खतरा है. इन सर्च इंजनों के जरिए उन्हें यह जानकारी दी जाएगी कि उन्हें कहां से मदद मिल सकती है.

सर्च इंजन पर डाले गए सवाल केवल उपयोगकर्ताओं की रुचि के बारे में ही नहीं बताते बल्कि उनमें उनके मूड और स्वास्थ्य की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी निहित होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के चलते, गूगल जैसे सर्च इंजन पहले ही खोज के लिए डाले जा रहे उन सवालों के जवाब दे रहे हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि प्रयोगकर्ता शायद आत्महत्या के बारे में विचार कर रहा है. इन प्रयोगकर्ताओं का ध्यान काउंसलिंग और आत्महत्या की रोकथाम करने वाली अन्य सेवाओं की ओर खींचा जाता है.

जर्मनी की लुडविग मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी (एलएमयू) के फ्लोरियन अरेन्ड ने कहा, ‘इंटरनेट आत्महत्या रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है.’ वास्तव में अनेक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि आत्महत्या करने को आतुर व्यक्ति भी उपलब्ध सहायता संसाधनों की याद दिलाने पर अपना इरादा बदल सकता है. 

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