Hindi Poem : तू अगर इतनी ही हंसी हो जिन्दगी तो
तुझे मौत के दरख्त से वापस ले आऊंगा.

कपोल–कल्पना ही सही, इस सच को झूठ साबित कर दिखाऊंगा
मैं अपनी त्याग–तपस्या से ‘मर’ मनुष्य को अमर बनना सिखाऊँगा.

कहते हैं भगवान देते हैं हमें मन और प्राण
मैं अपनी मिहनत व त्याग से मनुष्य को अमर बनना सिखाऊँगा

क्यों करूँ उस देव के समक्ष समर्पण जो इसे हमारी कायरता समझ लेते हैं
और सदा अमर बने रहने का वरदान देने की जगह हर लेते हैं हमारे प्राण

क्या अन्तिम चिता ही है हमारी नियति या इससे बढ़कर कुछ और
त्याग व समर्पण तो है ही हमारे पास तो फिर प्राण की क्यों मांगू मैं आपसे भीख

क्या जिन्दगी हमें देती रहेगी हमें यह सीख कि मरना पड़ेगा एक दिन तुम्हें क्योंकि
जन्म लिये हो तुम मानव कोख और मांगनी ही होगी उनसे जीने की भीख.

लेखक : अंजनी कुमार

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