Indian Origin Billionaires: पैसा कमाना हर्ज की बात नहीं. हर्ज की बात विदेश में जा कर बहुत सा पैसा कमा कर वहीं बस जाना और अपने देश की अनदेखी करना वह भी ताने सुन कर, बेइज्जती बरदाश्त कर और गालियां सुनने के साथसाथ यह गर्व की नहीं बल्कि शर्म और चिंता की बात है जो अमेरिका की एक महिला की एक वायरल पोस्ट से साबित हुई कि वहां बसे भारतीय मूल के धनकुबेर अपने देश के किस काम के.

इस साल सोशल मीडिया प्लेटफौर्म एक्स पर ज्यादा वायरल होने वाली पोस्टों में से एक यह थी जिस में यूजर ने लिखा था, ‘मैं झूठ नहीं बोलूंगी जब मैं ने इसे पहली बार देखा तो मुझे लगा यह एआई से बना हुआ है, अगर यह सच्चा है तो हमें समस्या है.’ इस पोस्ट में, दरअसल, एक कोलाज अटैच था जिस में स्टैंप साइज के 30 फोटोग्राफ्स थे. ये सभी भारतीय मूल के रईस थे जिन में अधिकतर नामी कंपनियों के सीईओ थे, मसलन गूगल के सुंदर पिचाई, माइक्रोसौफ्ट के सत्या नाडेला, जस्केलर इंक के जय चौधरी, यूट्यूब के नील मोहन, आईबीएम के अरविंद कृष्ण, अडोबी के शांतनु नारायण, माइक्रोन के संजय मेहरोत्रा और नोवार्तिज के वसंत नरसिम्हन वगैरह. बहुत दिलचस्प, अहम और काबिलेगौर बात यह है कि हरेक के फोटो के नीचे भारतीय तिरंगा लगा हुआ है.

इस पोस्ट को लाखों व्यूज और हजारों कमैंट्स मिले थे, क्योंकि बात थी भी कुछ ऐसी ही. भारतीय मूल के इन कुबेर अमेरिकी नागरिकों पर गाहेबगाहे भारतीय हिंदू गर्व किया करते हैं कि इन्होंने अमेरिका जा कर भारत और हिंदू धर्म के झंडे गाड़े हैं. यह गर्व उतना ही मिथ्या या बेवजह है जितना सुभाषचंद्र बोस के बारे में यह मान लेना कि देश को आजादी उन की वजह से मिली. जबकि `नेताजी` ने देश के लिए कियाधरा कुछ नहीं था. बल्कि विदेशों में बीमारी के बहाने रहते वे विलासी जिंदगी जीते रहे थे और तानाशाह जरमनी के एडौल्फ़ हिटलर और वैसे ही जापान के सम्राट के साथ काम कर के भारत में लोकतांत्रिक स्वदेशी राज लाने के नारे लगाने लगे थे.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...