Widow Rights: हिंदू समाज में कभी किसी सुबूत की मुहताज नहीं रही विधवाओं की बदतर हालत की बड़ी वजह उन के पास संपत्ति का न होना थी. यह अधिकार अब विधवाओं को मिलने लगा है लेकिन अभी भी सीमित है क्योंकि विधवाओं को उन के कानूनी अधिकारों की सटीक जानकारी नहीं है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम कैसे उन की मदद करता है, पढ़िए इस लेख में.
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भोजपुरा थाने में बीती 16 फरवरी को माया पाल (बदला नाम) ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उस के पति अमित पाल की मौत 27 मई, 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी. पति की मौत के बाद से ही ससुराल वाले उस की संपत्ति पर नजर रखे हुए थे जिसे हड़पने के लिए उसे घर से निकाल देना चाहते थे. इस बाबत उसे हर कभी शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था. उस के 10 महीने के बच्चे को जेठ जान से मारने की धमकी देता रहता था.
किसी की रोकटोक न होने से जेठ सुनील पाल अकसर माया के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करता रहता था. 3 अक्तूबर, 2025 को तो उस ने छेड़छाड़ की हदें पार करते बलात्कार करने की कोशिश कर डाली जिस का विरोध करने पर उस के साथ मारपीट जेठ ने तो की ही, उस का साथ सास रूपदेई और ससुर मोहनलाल ने भी दिया. इन तीनों ने मारपीट के अलावा उस के घर में तोड़फोड़ भी की. बेरहमी से मारकुटाई करने के बाद माया का सामान घर से फेंक दिया गया और जेवर छीन लिए और फिर, घर में ताला लगा कर उसे भगा दिया गया. इस का वीडियो माया के पास है.
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